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उच्च रक्तचाप: अचानक 150/90 से ऊपर गया BP? इन आसान तरीकों से मिनटों में नियंत्रण करें, बिना डॉक्टर या दवा के जान बचा सकते हैं।
उच्च रक्तचाप : जब रक्तचाप बढ़ता है, तो स्ट्रोक का खतरा काफी बढ़ जाता है। 150/90 mmHg एक बहुत गंभीर उच्च रक्तचाप स्तर है। इस स्थिति में रक्त नलिकाओं में दबाव बढ़ जाता है, जिससे रोगी को हार्ट अटैक या स्ट्रोक का सामना करना पड़ सकता है। कभी-कभी यह जानलेवा भी हो सकता है। यदि किसी व्यक्ति का रक्तचाप इस उच्च स्तर को पार कर जाए और आस-पास कोई चिकित्सा सुविधा न हो, तो डॉक्टर द्वारा सुझाए गए कुछ तरीकों से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। ये आपात स्थिति में बहुत मददगार साबित होते हैं। सामान्य रक्तचाप का स्तर 120/80 mmHg होता है; इससे ऊपर या नीचे जाने पर यह खतरा बन सकता है।
150/90 उच्च रक्तचाप को कैसे नियंत्रित करें
उच्च रक्तचाप को नियंत्रण में रखने के तरीके के बारे में dradrianhale नामक इंस्टाग्राम अकाउंट पर जानकारी दी गई है। इसके साथ कैप्शन में कहा गया है, “हर तीन में से एक व्यक्ति का रक्तचाप 150/90 या इससे अधिक होता है, लेकिन उन्हें यह नहीं पता कि यह कितना खतरनाक हो सकता है… कुछ सरल प्राकृतिक घरेलू उपायों से इसे जल्दी सही किया जा सकता है!”
उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने के लिए गर्म पानी का उपयोग करें
यदि रक्तचाप बढ़ गया है और कोई चिकित्सा सुविधा नहीं है, तो मरीज को गुनगुने पानी से भरी बाल्टी में पैरों को रखना चाहिए। कहा जाता है कि गर्म पानी रक्त वाहिकाओं को खोलकर तलवों में रक्त प्रवाह को बेहतर बनाता है। गर्म पानी में पैर रखने से रक्तचाप में सुधार हो सकता है।
सेब का सिरका जीवन दान करेगा
सेब का सिरका, जिसे एप्पल साइडर विनेगर कहा जाता है, का उपयोग वजन कम करने से लेकर संक्रमण नियंत्रण तक में होता है। क्या आपको पता है, उच्च रक्तचाप के समय 10 से 15 मिनट तक तलवों में इसकी मालिश करने से रक्तचाप को नियंत्रित किया जा सकता है। इसे रक्तचाप को कम करने का एक प्राकृतिक उपाय माना जाता है।
रक्तचाप नियंत्रण के लिए गहरी सांस लें
जब रक्तचाप बढ़ता है, तो ध्यानपूर्वक पेट से गहरी सांस लेना और उसे धीरे से बाहर छोड़ना अच्छा होता है। यदि इसे सीधे लेटकर या बैठकर किया जाए, तो इससे राहत मिल सकती है। यह प्रक्रिया शरीर को आराम देने में मदद करती है। इसे 5 मिनट तक करना फायदेमंद होता है।
जड़ी-बूटियों का मिश्रण
लेमन बाम एक सुगंधित जड़ी-बूटी है। इसमें नींबू जैसी खुशबू होती है। इसे वेलेरियन रूट और नागफनी की बेरी के साथ मिलाकर ड्रिंक बनाने से बढ़े हुए रक्तचाप में काफी कमी लाई जा सकती है। ये तीनों जड़ी-बूटियाँ लाभकारी मानी जाती हैं।
अस्वीकृति: यह लेख और इसमें दी गई चिकित्सा सलाह केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है। यह किसी योग्य चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। इस लेख में बताए गए तरीकों और दावों को केवल सुझाव माना जाना चाहिए; डीएनपी इंडिया हिंदी इनकी पुष्टि या खंडन नहीं करता है। किसी भी प्रकार की सलाह/उपचार/दवा/आहार का पालन करने से पहले हमेशा डॉक्टर से सलाह लें।
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सेब खाने से पहले पढ़ लें ये खबर: इस हिस्से में छुपा है जहर! किन लोगों को नहीं खाना चाहिए ‘एप्पल’
सेब को अक्सर ‘An Apple a Day Keeps the Doctor Away’ कहावत से जोड़ा जाता है। इसमें फाइबर, विटामिन-C और एंटीऑक्सिडेंट्स भरपूर होते हैं। लेकिन हर किसी के लिए सेब फायदेमंद हो, यह जरूरी नहीं। कुछ लोगों को इसे सावधानी से या सीमित मात्रा में खाना चाहिए। साथ ही, बहुत कम लोग जानते हैं कि सेब के एक हिस्से में प्राकृतिक रूप से “जहर” भी पाया जाता है।
किन लोगों को नहीं खाना चाहिए सेब?
1) डायबिटीज के मरीज
सेब का ग्लाइसेमिक इंडेक्स मध्यम है, पर इसमें प्राकृतिक शुगर (फ्रक्टोज) होती है। डायबिटीज के मरीजों को मात्रा नियंत्रित रखनी चाहिए और जूस की बजाय पूरा सेब (छिलके सहित) खाना बेहतर है।
2) इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (IBS) या पाचन समस्या वाले लोग
सेब में FODMAPs (फ्रक्टोज) होते हैं, जो कुछ लोगों में गैस, पेट दर्द या ब्लोटिंग बढ़ा सकते हैं।
3) एसिडिटी या GERD से पीड़ित
खाली पेट सेब खाने से कुछ लोगों में एसिडिटी बढ़ सकती है।
4) किडनी रोगी
सेब में पोटैशियम होता है। गंभीर किडनी रोग में डॉक्टर की सलाह से ही फल की मात्रा तय करें।
5) सेब से एलर्जी वाले लोग
कुछ लोगों को सेब खाने से मुंह/गले में खुजली, सूजन या रैशेज हो सकते हैं (ओरल एलर्जी सिंड्रोम)।

सेब के किस हिस्से में होता है “जहर”?
सेब के बीज (Seeds) में एमिग्डालिन नामक यौगिक होता है। यह शरीर में जाकर बहुत अधिक मात्रा में लेने पर सायनाइड (Cyanide) छोड़ सकता है। सामान्य तौर पर 1–2 सेब के बीज गलती से निगल लेने से नुकसान की संभावना बेहद कम होती है। लेकिन बड़ी मात्रा में बीज चबाकर खाना खतरनाक हो सकता है। इसलिए सेब खाते समय बीज निकाल देना ही बेहतर है। ध्यान दें: सेब का गूदा और छिलका सुरक्षित और पौष्टिक होते हैं; समस्या केवल बीज की अत्यधिक मात्रा से है।
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चाय पीने के शौकीन हो जाए सतर्क, एक भूल से हो सकता है कैंसर; जानें गरमा-गरम चाय कैसे बनती है जानलेवा…
भारत में चाय लोगों की दिनचर्या और भावनाओं से जुड़ी आदत है। सुबह की शुरुआत हो या दिनभर की थकान दूर करनी हो, अधिकतर लोग चाय पर ही भरोसा करते हैं। कई घरों में तो बिना चाय के दिन अधूरा माना जाता है। लेकिन अगर यही चाय बहुत ज्यादा गर्म पी जाए, तो यह सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
गर्म चाय से खाने की नली को पहुंचता है नुकसान
वैज्ञानिक अध्ययनों में पाया गया है कि अत्यधिक गर्म पेय—खासकर 65 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक तापमान पर—नियमित रूप से पीने से खाने की नली (एसोफैगस) को नुकसान पहुंच सकता है। बार-बार बहुत गर्म तरल निगलने से इस नली की अंदरूनी परत जल सकती है, जिससे सूजन (क्रॉनिक इंफ्लेमेशन) और कोशिकाओं में बदलाव (सेल म्यूटेशन) शुरू हो सकते हैं। लंबे समय में यही बदलाव कैंसर का रूप ले सकते हैं।
बढ़ सकता है कैंसर का जोखिम
World Health Organization (डब्ल्यूएचओ) भी यह चेतावनी दे चुका है कि 65 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा गर्म पेय का नियमित सेवन एसोफैजियल कैंसर का जोखिम बढ़ा सकता है। खाने की नली के कैंसर के मुख्य रूप से दो प्रकार होते हैं—एसोफैजियल स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा और एसोफैजियल एडेनोकार्सिनोमा। पहला प्रकार आमतौर पर नली के ऊपरी हिस्से में पाया जाता है और इसे गर्म पेय व तंबाकू सेवन से जोड़ा जाता है। दूसरा प्रकार नली के निचले हिस्से में होता है और अक्सर मोटापा या लंबे समय तक बनी रहने वाली एसिडिटी से संबंधित होता है।

चाय नहीं तापमान से होती है समस्या
ध्यान देने वाली बात यह है कि चाय खुद नुकसानदेह नहीं है, बल्कि उसका अत्यधिक गर्म होना समस्या पैदा करता है। यही बात कॉफी, सूप या किसी भी गरम पेय पर लागू होती है। आयुर्वेद भी सलाह देता है कि भोजन और पेय न तो बहुत गरम हों, न अत्यधिक ठंडे। आयुर्वेदिक दृष्टिकोण के अनुसार, हल्का गर्म पेय पाचन में सहायक हो सकता है, लेकिन जरूरत से ज्यादा गर्म चीजें शरीर में पित्त बढ़ाकर सूजन और अन्य रोगों की आशंका बढ़ा सकती हैं।
ये संकेत होते हैं गंभीर बीमारी के इशारे
यदि किसी व्यक्ति को निगलने में कठिनाई, गले में लगातार खराश, निगलते समय दर्द या बिना कारण तेजी से वजन कम होने जैसे लक्षण महसूस हों, तो इन्हें हल्के में नहीं लेना चाहिए। ऐसे संकेत गंभीर बीमारी की ओर इशारा कर सकते हैं। समय रहते डॉक्टर से परामर्श लेना बेहद जरूरी है, क्योंकि शुरुआती पहचान ही कई बार बड़ी बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका साबित होती है।
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गर्म पानी पीने के क्या होते हैं नुकसान? अगली बार रखिए खास ध्यान, नहीं तो भुगतने पड़ेंगे भारी अंजाम
गर्म या गुनगुना पानी अक्सर सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है। वजन घटाने, पाचन सुधारने और शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकालने जैसे कई लाभ इसके साथ जोड़े जाते हैं। लेकिन हर चीज की तरह इसका जरूरत से ज्यादा सेवन नुकसान भी पहुंचा सकता है। लंबे समय तक लगातार गर्म या गुनगुना पानी पीना कुछ स्थितियों में हानिकारक हो सकता है।
गर्म पानी पीने के संभावित नुकसान
- अल्सर का खतरा
डॉक्टर के मुताबिक, रोजाना खाली पेट या बार-बार गर्म पानी पीने से खाद्य नली और पेट की अंदरूनी परत पर असर पड़ सकता है। इससे जलन और आगे चलकर अल्सर की समस्या पैदा होने की आशंका रहती है।
- जीभ और मुंह की अंदरूनी परत को नुकसान
बहुत ज्यादा गर्म पानी पीने से जीभ जल सकती है। इससे मुंह के अंदर मौजूद म्यूकस मेम्ब्रेन को भी नुकसान पहुंच सकता है, जो आगे चलकर अन्य समस्याओं की वजह बन सकता है।
- त्वचा का रूखापन
कई लोगों को यह अंदाजा नहीं होता कि उन्हें कितना गुनगुना पानी पीना चाहिए। जरूरत से ज्यादा सेवन त्वचा को ड्राई बना सकता है। लगातार रूखी त्वचा रहने से स्किन इंफेक्शन का खतरा भी बढ़ सकता है।
- दांतों को नुकसान
बहुत अधिक और नियमित रूप से गर्म पानी पीने से दांतों की ऊपरी परत (एनामेल) पर असर पड़ सकता है। इससे कैविटी और दांतों की संवेदनशीलता बढ़ने की संभावना रहती है।
- तनाव में मनोवैज्ञानिक निर्भरता
आमतौर पर माना जाता है कि गर्म पानी पीने से तनाव कम होता है। लेकिन अगर हर बार तनाव होने पर केवल गर्म पानी पर निर्भर रहा जाए तो इसकी मनोवैज्ञानिक आदत पड़ सकती है। इसलिए इसे स्ट्रेस रिलीफ का स्थायी उपाय नहीं बनाना चाहिए।
- डिहाइड्रेशन का जोखिम
जरूरत से ज्यादा गर्म पानी पीने से शरीर के फ्लुइड बैलेंस पर असर पड़ सकता है, जिससे डिहाइड्रेशन की स्थिति भी बन सकती है। इसलिए ठंडे और गर्म पेय पदार्थों के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
क्या करें?
डॉक्टर की सलाह है कि जो लोग लंबे समय से लगातार गुनगुना पानी पी रहे हैं, वे इसकी मात्रा पर ध्यान दें और जरूरत से ज्यादा सेवन से बचें। हालांकि, यह जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति को इससे नुकसान ही हो या हर किसी को समान लाभ मिले। किसी भी आदत को अपनाने से पहले अपने शरीर की जरूरत और विशेषज्ञ की सलाह को ध्यान में रखना बेहतर होता है।
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