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पनीर का सेवन स्वास्थ्य के लिए सही है या गलत? आयुर्वेद विशेषज्ञ ने ‘विषैला भोजन’ कहकर क्या बयान दिया जो चौकाने वाला है।

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पनीर: क्या आप भी इसे स्वास्थ्यवर्धक मानकर पनीर का सेवन करते हैं? यदि हां, तो आयुर्वेदिक विशेषज्ञ ने कुछ ऐसा कहा है जो आपको चौंका सकता है। विशेषज्ञ के अनुसार, पनीर एक बेहद हानिकारक और विषैले खाद्य पदार्थ के रूप में जाना जाता है, जिसका लोग प्रतिदिन सेवन करते हैं। आइए जानते हैं वे क्या कहते हैं, जो आपकी सोच को बदल सकता है। पनीर, जिसका उपयोग आप विभिन्न सब्जियों में करते हैं और यह शाकाहारियों के लिए एक प्रमुख विकल्प है, इसे आयुर्वेद में बिल्कुल भी नहीं स्वीकार किया गया है। आइए जानें इस मामले में पूरी जानकारी।

आयुर्वेद में पनीर को प्राकृतिक क्यों नहीं माना गया

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आयुर्वेद के विशेषज्ञ आचार्य मनीष जी, जो HIIMS और शुद्धती आयुर्वेद के संस्थापक हैं, ने बताया कि पनीर एक अत्यंत विषैले खाद्य पदार्थ के रूप में जाना जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह बिल्कुल भी स्वास्थ्यवर्धक नहीं है। आयुर्वेद में लिखा गया है कि दूध को विकृत न करके खाना चाहिए। पनीर दूध का विकृत रूप है। इसे गाय और भैंस से निकाला जाता है, जिससे यह प्राकृतिक नहीं रह जाता है, इसलिए यह स्वस्थ नहीं माना जा सकता। विशेषज्ञ द्वारा बताई गई बातें निश्चित रूप से आपको चौंका सकती हैं।

सेहत के लिए Paneer का सेवन क्यों है हानिकारक

आयुर्वेद के विशेषज्ञों के अनुसार, दूध का विकृत रूप आपके स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है, क्योंकि शास्त्रों में केवल दूध, दही, लस्सी और छाछ का ही उल्लेख किया गया है। यदि गाय स्वस्थ नहीं है, तो पनीर और भी हानिकारक हो सकता है। हालांकि, इस वीडियो में यह भी बताया गया है कि अगर आप पनीर का सेवन सुरक्षित तरीके से करना चाहते हैं, तो आप विशेषज्ञ से मार्गदर्शन ले सकते हैं।

यह सच है कि पनीर को लोग बड़े चाव से खाते हैं और भारतीय भोजन में इसकी विशेष पहचान है, लेकिन आयुर्वेदिक विशेषज्ञ की बातों को सुनकर आप पनीर के सेवन के बारे में पुनर्विचार कर सकते हैं।

अस्वीकृति: यह लेख और इसमें दी गई जानकारी केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी भी प्रकार से किसी योग्य चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। इस लेख में बताए गए सुझावों को केवल विचारणीय माना जाना चाहिए; डीएनपी इंडिया हिंदी न तो इनकी पुष्टि करता है और न ही खंडन करता है। किसी भी उपचार, दवा या आहार का पालन करने से पहले हमेशा डॉक्टर से सलाह लें।

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अगर पैरों में दिखें ये बदलाव, तो समझ लें लिवर दे रहा है खतरे का संकेत

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आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, अनियमित खानपान और जंक फूड की बढ़ती आदतें शरीर के अंदरूनी अंगों पर बुरा असर डालती हैं। कई बार लोग थकान, सूजन या छोटे-मोटे बदलावों को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन डॉक्टरों के अनुसार कई बार यही छोटे संकेत किसी बड़ी बीमारी का संकेत हो सकते हैं। खासतौर पर लिवर खराब होने के शुरुआती लक्षण शरीर में दिखने लगते हैं, जिनमें से कुछ संकेत सबसे पहले पैरों में नजर आते हैं।

लिवर शरीर के लिए क्यों जरूरी है?

लिवर हमारे शरीर का बेहद महत्वपूर्ण अंग है। यह कई जरूरी काम करता है, जैसे:

-पाचन प्रक्रिया में मदद करना

-शरीर से जहरीले पदार्थ (टॉक्सिन्स) बाहर निकालना

-खून को साफ करना

-ब्लड शुगर को संतुलित रखना

-शरीर के लिए जरूरी प्रोटीन बनाना

अगर लिवर कमजोर या खराब होने लगता है, तो शरीर में टॉक्सिन्स जमा होने लगते हैं और कई स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

  1. पैरों और टखनों में सूजन

लिवर से जुड़ी समस्याओं में अक्सर एड़ियों और टखनों में सूजन दिखाई देने लगती है। यह समस्या खासतौर पर लिवर सिरोसिस जैसी स्थिति में होती है। इसमें खून में प्रोटीन की कमी होने लगती है, जिससे शरीर में तरल पदार्थ जमा होने लगता है। यह तरल पदार्थ पैरों में इकट्ठा हो जाता है और सूजन पैदा करता है। कई बार यह सूजन दर्द रहित होती है, इसलिए लोग इसे थकान या ज्यादा देर खड़े रहने की वजह समझ लेते हैं। लेकिन अगर यह सूजन लंबे समय तक बनी रहे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

  1. पैरों की त्वचा का पीला पड़ना

लिवर खराब होने पर शरीर में बिलीरुबिन का स्तर बढ़ जाता है। इससे त्वचा का रंग पीला पड़ने लगता है। आमतौर पर लोग इसे आंखों या चेहरे पर देखते हैं, लेकिन कई बार पैरों की त्वचा भी पीली दिखने लगती है। यह भी लिवर से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकता है।

  1. तलवों में खुजली

कुछ लोगों को लिवर की समस्या होने पर पैरों के तलवों में खुजली भी महसूस हो सकती है। यह खुजली अक्सर रात के समय ज्यादा होती है और कई बार लंबे समय तक बनी रहती है।

कब डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी?

अगर पैरों में सूजन, त्वचा का पीला पड़ना या लगातार खुजली जैसे लक्षण दिखाई दें, तो इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय रहते जांच करवाना, संतुलित आहार लेना और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना लिवर को सुरक्षित रखने में मदद कर सकता है।

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90% लोग नहीं जानते डायबिटीज की असली वजह, इन 5 कारणों से बढ़ता है खतरा

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आज के समय में Diabetes यानी मधुमेह एक आम लेकिन गंभीर बीमारी बन चुकी है। डायबिटीज चाहे किसी भी प्रकार की हो, इसमें शरीर का ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है, जो आगे चलकर कई स्वास्थ्य समस्याओं की वजह बन सकता है। अक्सर लोगों को लगता है कि ज्यादा चीनी खाने से ही डायबिटीज होती है, लेकिन ऐसा पूरी तरह सही नहीं है। डायबिटीज होने के पीछे कई अन्य कारण भी जिम्मेदार होते हैं।

90% लोगों को नहीं पता असली वजह

डॉक्टर के अनुसार करीब 90 प्रतिशत लोग डायबिटीज के असली कारणों से अनजान हैं। कई लोग सोचते हैं कि मीठा या चावल छोड़ देने से डायबिटीज से बचा जा सकता है, लेकिन बीमारी का कारण सिर्फ यही नहीं होता। डायबिटीज का खतरा बढ़ाने वाले कई लाइफस्टाइल और हेल्थ से जुड़े फैक्टर भी होते हैं, जिन्हें नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।

पेट की चर्बी और शारीरिक निष्क्रियता

पेट के आसपास बढ़ने वाली चर्बी भी डायबिटीज का बड़ा कारण बन सकती है। जब पेट की चर्बी बढ़ती है तो शरीर में ऐसे हार्मोन निकलते हैं जो इंसुलिन के काम को प्रभावित करते हैं। इसके अलावा अगर व्यक्ति शारीरिक रूप से सक्रिय नहीं रहता और लंबे समय तक बैठे रहने की आदत है, तो इससे भी डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है।

ज्यादा हाई-कार्ब फूड खाना

बार-बार हाई कार्बोहाइड्रेट वाला खाना भी डायबिटीज का एक बड़ा कारण माना जाता है। अगर कोई व्यक्ति हर 2–3 घंटे में कुछ न कुछ खाता रहता है, तो शरीर में बार-बार इंसुलिन रिलीज होता है। ऐसे में धीरे-धीरे पैंक्रियाज पर दबाव बढ़ता है और समय के साथ इसकी कार्यक्षमता कमजोर पड़ सकती है।

नींद की कमी और ज्यादा तनाव

पर्याप्त नींद न लेना और लगातार तनाव में रहना भी डायबिटीज का जोखिम बढ़ा सकता है। नींद की कमी से शरीर में कॉर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जो इंसुलिन के काम में बाधा डाल सकता है।

जेनेटिक कारण

अगर परिवार में किसी को पहले से डायबिटीज रही है, तो अन्य सदस्यों में भी इसका खतरा ज्यादा हो सकता है। यानी जेनेटिक्स भी इस बीमारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

डायबिटीज के शुरुआती लक्षण

डायबिटीज के शुरुआती लक्षणों को पहचानना बहुत जरूरी होता है। इनमें शामिल हैं-बार-बार प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, लगातार थकान और कमजोरी महसूस होना, धुंधला दिखाई देना, चोट लगने पर घाव का देर से भरना, बार-बार अलग-अलग तरह के संक्रमण होना। अगर ये लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है, ताकि समय रहते बीमारी को कंट्रोल किया जा सके।

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बाल रंगने से पहले सावधान! हेयर डाई से हो सकता है नुकसान, इस्तेमाल से पहले जान लें ये जरूरी बातें

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आजकल कम उम्र में ही बाल सफेद होने की समस्या तेजी से बढ़ रही है। बदलती लाइफस्टाइल, बढ़ता तनाव, गलत खानपान और प्रदूषण को इसके प्रमुख कारण माना जाता है। ऐसे में कई लोग सफेद बालों को छिपाने के लिए हेयर डाई का सहारा लेते हैं। पहले जहां हेयर डाई का इस्तेमाल अधिकतर उम्रदराज लोग करते थे, वहीं अब युवा भी नियमित रूप से इसका उपयोग करने लगे हैं। बाजार में केमिकल बेस्ड डाई, हर्बल डाई और इंस्टेंट कलर जैसे कई विकल्प उपलब्ध हैं, जिन्हें लोग घर पर ही आसानी से इस्तेमाल कर लेते हैं। हालांकि, बालों को रंगते समय अक्सर लोग सिर्फ रंग पर ध्यान देते हैं और यह भूल जाते हैं कि हेयर डाई का असर त्वचा पर भी पड़ सकता है।

त्वचा पर भी पड़ सकता है हेयर डाई का असर

बालों में डाई लगाते समय यह अक्सर माथे, कानों और गर्दन के आसपास की त्वचा के संपर्क में आ जाती है। इससे स्किन से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। डॉक्टरों के मुताबिक, हेयर डाई में मौजूद कई केमिकल्स त्वचा के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। कुछ लोगों को इसके कारण एलर्जी, खुजली और जलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

एलर्जी, रैशेज और सूजन का खतरा

डॉक्टर बताते हैं कि जब हेयर डाई त्वचा के संपर्क में आती है, तो यह स्किन को सेंसिटिव बना सकती है। कई मामलों में त्वचा पर लालपन, रैशेज और सूजन भी देखने को मिलती है। अगर लंबे समय तक या बार-बार हेयर डाई का इस्तेमाल किया जाए, तो इससे त्वचा की प्राकृतिक नमी भी प्रभावित हो सकती है। इसके कारण त्वचा रूखी और बेजान लगने लगती है। कुछ लोगों को डाई लगाने के बाद सिर की त्वचा में जलन या चुभन भी महसूस हो सकती है, खासकर उन लोगों को जिनकी त्वचा पहले से संवेदनशील होती है।

हेयर डाई लगाते समय रखें ये सावधानियां

हेयर डाई का इस्तेमाल करते समय कुछ आसान सावधानियां अपनाकर त्वचा को नुकसान से बचाया जा सकता है। डाई लगाने से पहले हमेशा पैच टेस्ट जरूर करें। माथे, कान और गर्दन के आसपास वैसलीन या क्रीम लगा लें, ताकि डाई सीधे त्वचा पर न लगे। हमेशा अच्छे ब्रांड और कम केमिकल वाले प्रोडक्ट का ही इस्तेमाल करें। डाई लगाने के बाद बालों और स्किन को अच्छी तरह साफ करना जरूरी है। अगर हेयर डाई लगाने के बाद त्वचा में ज्यादा खुजली, लालपन या जलन महसूस हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में तुरंत बालों को साफ पानी से धोना बेहतर होता है। अगर इसके बाद भी समस्या बनी रहती है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

बार-बार डाई लगाने से बचें

विशेषज्ञों के अनुसार, बार-बार हेयर डाई लगाने से बचना चाहिए। कोशिश करें कि बालों की देखभाल के लिए प्राकृतिक उपायों को भी अपनाया जाए। इससे बालों के साथ-साथ त्वचा भी स्वस्थ बनी रहती है।

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