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पेट की चर्बी घटाने के लिए ये 3 सलाह अपनाएं, जानें डॉक्टर से कैसे करें फिटनेस यात्रा को मजेदार

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पेट का फ़ैट: पेट के फ़ैट को कैसे घटाया जा सकता है, आइए जानते हैं इस विषय पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय। सौरभ शेट्टी, जो पहले एम्स के प्रशिक्षित हैं, ने इस बारे में लोगों को बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि पेट का फ़ैट कम करने के लिए आप किन-किन टिप्स को आजमा सकते हैं, जो आपके लिए लाभदायक हो सकते हैं। इंटरमिटेंट फास्टिंग आपके लिए लाभकारी साबित हो सकता है। डॉक्टर शेट्टी ने इस वीडियो में यह बताया है और साथ में 2026 में 3 सुझाव प्रदान किए हैं जिनका आप उपयोग कर सकते हैं।

12:12 शेड्यूल से पेट के फ़ैट में मिल सकता है लाभ

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19 दिसंबर 2025 को साझा किए गए इस वीडियो में डॉक्टर सेट्ठी कहते हैं कि आप 12:12 फास्टिंग शेड्यूल को अपना सकते हैं जो आपके लिए मददगार हो सकता है। इससे रात में अच्छी नींद आ सकेगी और आपको unhealthy खाद्य विकल्पों से दूर रहने में मदद मिलेगी।

फास्टिंग के दौरान आपको क्या करना चाहिए

डॉक्टर शेट्टी का कहना है कि फास्टिंग के दौरान आप केवल ब्लैक कॉफी, ग्रीन टी, ब्लैक टी, पानी, एप्पल साइडर विनेगर, नींबू पानी और अदरक की चाय का सेवन करें।

खाने के समय पर डाइट का ध्यान रखें

इसके साथ ही, डॉक्टर सौरभ शेट्टी ने बताया है कि पेट का फ़ैट कम करने के लिए आपको उच्च फाइबर खाद्य पदार्थों पर ध्यान देना चाहिए। साथ ही, उच्च प्रोटीन आहार को भी अपने खाने में शामिल करें। अपने खाने के समय में आप पनीर, टोफू, काबुली चना, चिकन और मछली को शामिल करें; वहीं उच्च फाइबर में आप फलों और सब्जियों का सेवन कर सकते हैं।

PET FAT के लिए INTERMITTENT FASTING का चलन

इंटरमिटेंट फास्टिंग से पेट के फ़ैट को कम किया जा सकता है और इस क्रम में डॉक्टर सौरभ शेट्टी द्वारा दिए गए इन तीन सुझावों को आप आजमा सकते हैं। यह सही है कि वर्तमान समय में इंटरमिटेंट फास्टिंग एक बेहतरीन विकल्प बन गया है जिसे वजन कम करने के लिए लोग बड़े पैमाने पर अपना रहे हैं, लेकिन इसे सही तरीके से करना अधिक महत्वपूर्ण है।

अस्वीकृति: यह लेख और इसमें दिया गया उपचार केवल सामान्य जानकारी प्रदान करता है। यह किसी भी प्रकार से योग्य चिकित्सा परामर्श का विकल्प नहीं है। इस लेख में दिए गए सुझावों और दावों को केवल सुझाव के रूप में देखा जाना चाहिए; डीएनपी इंडिया हिंदी न तो इनकी पुष्टि करता है और न ही खंडन करता है। किसी भी सुझाव/उपचार/दवा/आहार के पालन से पहले हमेशा डॉक्टर से सलाह लें।

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चाय पीने के शौकीन हो जाए सतर्क, एक भूल से हो सकता है कैंसर; जानें गरमा-गरम चाय कैसे बनती है जानलेवा…

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भारत में चाय लोगों की दिनचर्या और भावनाओं से जुड़ी आदत है। सुबह की शुरुआत हो या दिनभर की थकान दूर करनी हो, अधिकतर लोग चाय पर ही भरोसा करते हैं। कई घरों में तो बिना चाय के दिन अधूरा माना जाता है। लेकिन अगर यही चाय बहुत ज्यादा गर्म पी जाए, तो यह सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।

गर्म चाय से खाने की नली को पहुंचता है नुकसान

वैज्ञानिक अध्ययनों में पाया गया है कि अत्यधिक गर्म पेय—खासकर 65 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक तापमान पर—नियमित रूप से पीने से खाने की नली (एसोफैगस) को नुकसान पहुंच सकता है। बार-बार बहुत गर्म तरल निगलने से इस नली की अंदरूनी परत जल सकती है, जिससे सूजन (क्रॉनिक इंफ्लेमेशन) और कोशिकाओं में बदलाव (सेल म्यूटेशन) शुरू हो सकते हैं। लंबे समय में यही बदलाव कैंसर का रूप ले सकते हैं।

बढ़ सकता है कैंसर का जोखिम

World Health Organization (डब्ल्यूएचओ) भी यह चेतावनी दे चुका है कि 65 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा गर्म पेय का नियमित सेवन एसोफैजियल कैंसर का जोखिम बढ़ा सकता है। खाने की नली के कैंसर के मुख्य रूप से दो प्रकार होते हैं—एसोफैजियल स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा और एसोफैजियल एडेनोकार्सिनोमा। पहला प्रकार आमतौर पर नली के ऊपरी हिस्से में पाया जाता है और इसे गर्म पेय व तंबाकू सेवन से जोड़ा जाता है। दूसरा प्रकार नली के निचले हिस्से में होता है और अक्सर मोटापा या लंबे समय तक बनी रहने वाली एसिडिटी से संबंधित होता है।

चाय नहीं तापमान से होती है समस्या

ध्यान देने वाली बात यह है कि चाय खुद नुकसानदेह नहीं है, बल्कि उसका अत्यधिक गर्म होना समस्या पैदा करता है। यही बात कॉफी, सूप या किसी भी गरम पेय पर लागू होती है। आयुर्वेद भी सलाह देता है कि भोजन और पेय न तो बहुत गरम हों, न अत्यधिक ठंडे। आयुर्वेदिक दृष्टिकोण के अनुसार, हल्का गर्म पेय पाचन में सहायक हो सकता है, लेकिन जरूरत से ज्यादा गर्म चीजें शरीर में पित्त बढ़ाकर सूजन और अन्य रोगों की आशंका बढ़ा सकती हैं।

ये संकेत होते हैं गंभीर बीमारी के इशारे

यदि किसी व्यक्ति को निगलने में कठिनाई, गले में लगातार खराश, निगलते समय दर्द या बिना कारण तेजी से वजन कम होने जैसे लक्षण महसूस हों, तो इन्हें हल्के में नहीं लेना चाहिए। ऐसे संकेत गंभीर बीमारी की ओर इशारा कर सकते हैं। समय रहते डॉक्टर से परामर्श लेना बेहद जरूरी है, क्योंकि शुरुआती पहचान ही कई बार बड़ी बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका साबित होती है।

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गर्म पानी पीने के क्या होते हैं नुकसान? अगली बार रखिए खास ध्यान, नहीं तो भुगतने पड़ेंगे भारी अंजाम

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गर्म या गुनगुना पानी अक्सर सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है। वजन घटाने, पाचन सुधारने और शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकालने जैसे कई लाभ इसके साथ जोड़े जाते हैं। लेकिन हर चीज की तरह इसका जरूरत से ज्यादा सेवन नुकसान भी पहुंचा सकता है। लंबे समय तक लगातार गर्म या गुनगुना पानी पीना कुछ स्थितियों में हानिकारक हो सकता है।

गर्म पानी पीने के संभावित नुकसान

  1. अल्सर का खतरा

डॉक्टर के मुताबिक, रोजाना खाली पेट या बार-बार गर्म पानी पीने से खाद्य नली और पेट की अंदरूनी परत पर असर पड़ सकता है। इससे जलन और आगे चलकर अल्सर की समस्या पैदा होने की आशंका रहती है।

  1. जीभ और मुंह की अंदरूनी परत को नुकसान

बहुत ज्यादा गर्म पानी पीने से जीभ जल सकती है। इससे मुंह के अंदर मौजूद म्यूकस मेम्ब्रेन को भी नुकसान पहुंच सकता है, जो आगे चलकर अन्य समस्याओं की वजह बन सकता है।

  1. त्वचा का रूखापन

कई लोगों को यह अंदाजा नहीं होता कि उन्हें कितना गुनगुना पानी पीना चाहिए। जरूरत से ज्यादा सेवन त्वचा को ड्राई बना सकता है। लगातार रूखी त्वचा रहने से स्किन इंफेक्शन का खतरा भी बढ़ सकता है।

  1. दांतों को नुकसान

बहुत अधिक और नियमित रूप से गर्म पानी पीने से दांतों की ऊपरी परत (एनामेल) पर असर पड़ सकता है। इससे कैविटी और दांतों की संवेदनशीलता बढ़ने की संभावना रहती है।

  1. तनाव में मनोवैज्ञानिक निर्भरता

आमतौर पर माना जाता है कि गर्म पानी पीने से तनाव कम होता है। लेकिन अगर हर बार तनाव होने पर केवल गर्म पानी पर निर्भर रहा जाए तो इसकी मनोवैज्ञानिक आदत पड़ सकती है। इसलिए इसे स्ट्रेस रिलीफ का स्थायी उपाय नहीं बनाना चाहिए।

  1. डिहाइड्रेशन का जोखिम

जरूरत से ज्यादा गर्म पानी पीने से शरीर के फ्लुइड बैलेंस पर असर पड़ सकता है, जिससे डिहाइड्रेशन की स्थिति भी बन सकती है। इसलिए ठंडे और गर्म पेय पदार्थों के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है।

क्या करें?

डॉक्टर की सलाह है कि जो लोग लंबे समय से लगातार गुनगुना पानी पी रहे हैं, वे इसकी मात्रा पर ध्यान दें और जरूरत से ज्यादा सेवन से बचें। हालांकि, यह जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति को इससे नुकसान ही हो या हर किसी को समान लाभ मिले। किसी भी आदत को अपनाने से पहले अपने शरीर की जरूरत और विशेषज्ञ की सलाह को ध्यान में रखना बेहतर होता है।

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पैक्ड फूड्स: अगर आप नाश्ते में खाते हैं महंगे हेल्दी ऑप्शन, तो जानिए इसके नुकसान, अन्यथा आपकी सेहत पर पड़ेगा बुरा असर।

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प्रोसेस्ड फ़ूड्स: पैकेज में आने वाले फूड्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। लोग अब खुद खाना बनाने से बचने के लिए रेडी-टू-ईट विकल्प चुनने लगे हैं। प्रोसेस्ड फूड स्वादिष्ट लगता है, लेकिन यह स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है। इनसे वजन तो बढ़ता ही है, बल्कि डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय समस्याएं, डायबिटीज, लिवर और किडनी से संबंधित परेशानियां भी हो सकती हैं। प्रोसेस्ड फूड में प्रिजर्वेटिव्स और एडिटिव्स होते हैं, जो गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ इनके नकारात्मक प्रभावों के बारे में बता रहे हैं।

रेडी-टू-ईट फूड शरीर को कैसे नुकसान पहुँचाते हैं?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि, अगर आप अपने ब्रेकफास्ट में रेडी-टू-ईट पोहा, इडली और डोसा शामिल करते हैं तो यह स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है।

वीडियो देखें

वीडियो क्रेडिट: FitTuberHindi

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि, ये ताजगी वाले खाने के मुकाबले बहुत कम पोषक तत्वों से लबरेज होते हैं। इनमें विटामिन, फाइबर और प्रोटीन की मात्रा अत्यंत कम होती है। यह तुरंत पेट भर देते हैं लेकिन शरीर को गंभीर नुकसान पहुँचाते हैं। डॉक्टर बताते हैं कि, ये रेडी-टू-ईट फूड स्वास्थ्य को केवल हानि पहुंचाते हैं। प्रोसेस्ड फूड में चीनी, नमक, हानिकारक वसा और केमिकल्स की मात्रा अधिक होती है, जबकि पोषक तत्वों की कमी होती है। ये शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं।

प्रोसेस्ड फ़ूड्स क्या होते हैं?

प्रोसेस्ड फ़ूड वे खाद्य पदार्थ होते हैं जिनमें परिवर्तन किया जाता है। इनमें शीतल पेय, चिप्स, पैकेट में बंद सब्जियाँ, दालें, मांस, फलों का जूस आदि शामिल हैं। ये असली नहीं होते। इन्हें लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए कृत्रिम तत्व मिलाए जाते हैं, जिनके साइड इफेक्ट्स अत्यंत हानिकारक होते हैं।

अस्वीकृति: यह लेख और इसमें दी गई चिकित्सा सलाह केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है। यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। इस लेख में बताई गई विधियों और दावों को केवल सुझाव माना जाना चाहिए; डीएनपी इंडिया हिंदी इनकी न तो पुष्टि करता है और न ही इनका खंडन करता है। किसी भी सुझाव/उपचार/दवा/आहार का पालन करने से पहले हमेशा डॉक्टर से सलाह लें।

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