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पॉलिटिक्स

हुमायूं कबीर: बीजेपी का कठोर रुख, राज्यपाल की टिप्पणी! कैसे टीएमसी विधायक के खिलाफ कार्रवाई के लिए मजबूर हुईं ममता बनर्जी बाबरी की नींव रखने के मामले में?

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हुमायूं कबीर: बंगाल से हटकर विभिन्न राजनीतिक क्षेत्रों में चर्चा का विषय बने टीएमसी विधायक हुमायूं कबीर पर गाज गिर गई है। पूरा मामला विधायक के निलंबन से संबंधित है। समय की मांग या बदलते समीकरण, ममता बनर्जी ने अपनी पार्टी के इस विधायक को निलंबित करने का निर्णय लिया है। यह निर्णय नई बाबरी मस्जिद के निर्माण की शुरुआत से ठीक पहले लिया गया है।

सवाल यह है कि क्या टीएमसी बीजेपी के कठोर रुख और राज्यपाल की टिप्पणियों से प्रभावित होकर यह कदम उठाने को मजबूर हुई? मुर्शिदाबाद सहित कई मुस्लिम बहुल जिलों में लोकप्रिय विधायक हुमायूं कबीर को निलंबित करने की वजह क्या हो सकती है? इसके अलावा भी कुछ प्रश्न हैं जिनका उत्तर खोजा जाएगा।

कैसे हुमायूं कबीर पर कार्रवाई को मजबूर हुईं ममता बनर्जी?

पहले का समीकरण पूरी तरह अलग था। जब हुमायूं कबीर ने यह घोषणा की कि मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में नई बाबरी मस्जिद बनेगी, तो टीएमसी चुप रही। इस रुख से बीजेपी में खलबली मच गई। सुवेंदु अधिकारी, सुकांत मजूमदार सहित कई बीजेपी नेताओं ने ममता बनर्जी को लक्ष्य बनाया।

बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने भी प्रशासन को कानून-व्यवस्था को लेकर कड़े निर्देश दिए। इन सबके बीच ममता बनर्जी की चुप्पी सबको चुभ रही थी। अंततः, हुमायूं कबीर के बयान से बंगाल में सांप्रदायिक संबंधों में बिगड़ने की संभावनाएं व्यक्त की गई और इसके बाद ममता बनर्जी ने एक्शन लिया। इसी क्रम में आज 4 दिसंबर को हुमायूं कबीर का टीएमसी से निलंबन पत्र जारी किया गया।

हुमायूं कबीर के विवाद के चलते टीएमसी बैकफुट पर!

अपने विवादास्पद विधायक के कृत्यों के कारण टीएमसी बैकफुट पर आ गई थी। सबसे पहले, हुमायूं कबीर का 6 दिसंबर को नई बाबरी मस्जिद के निर्माण के लिए नींव रखने का ऐलान टीएमसी के लिए सिरदर्द साबित हुआ। इस ऐलान के बाद बीजेपी और वाम दलों ने भी टीएमसी की विचारधारा पर सवाल उठाए। इसके बाद विधायक हुमायूं कबीर द्वारा बेतुके बयान देते हुए हाईवे ब्लॉक करने की धमकी देना टीएमसी को भारी पड़ा।

इतना ही नहीं, हुमायूं कबीर ने ममता बनर्जी सरकार को लगभग चेताते हुए बाबरी निर्माण की कसम खा ली थी। इससे विपक्षी दलों ने सत्तारूढ़ टीएमसी पर जोरदार हमले किए। ममता बनर्जी पर तुष्टिकरण की राजनीति करने के आरोप भी लगाए गए। अंततः, टीएमसी ने इस विवाद से खुद को अलग करते हुए हुमायूं कबीर को पार्टी से निष्कासित किया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि 6 दिसंबर को नई बाबरी मस्जिद निर्माण की नींव रखने का ऐलान करने वाले बागी विधायक आगे क्या पहल करते हैं।

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देश

वंदे मातरम्’ के 150 साल: 77वें गणतंत्र दिवस में दिखेगा नया भारत, परंपरा से प्रगति तक; हर झाँकी में छुपी है भारत की कहानी

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देश इस बार 77वां गणतंत्र दिवस मनाने जा रहा है जिसमे हर साल कि तरह इस बार भी कई राज्यों की खास झाँकियाँ दिखाई देंगी। इन झाँकियों में अलग-अलग राज्यों की भाषा, संस्कृति और वेशभूषा का प्रदर्शन किया जाता है। ये झाँकियाँ एक परंपरा मात्र न होकर भारत की सांस्कृतिक विभिन्नताओं का परिचय देती हैं। आईए जानते है कि क्यों खास है गणतंत्र दिवस की झाँकियाँ

वंदे मातरम् के 150 साल : मुख्य थीम

इस वर्ष गणतंत्र दिवस 2026 की थीम “वंदे मातरम् के 150 वर्ष” रखी गई है। सूत्रों के मुताबिक भारत पर्व मे झाँकियों के जरिए भारत की सांस्कृतिक परिदृश्य, राष्ट्रभक्ति और आत्मनिर्भर भारत की तस्वीर पेश की जाएगी। इस बार गणतंत्र दिवस की झाँकियाँ परेड मे तो नहीं दिखेंगी लेकिन 26 जनवरी से 31 जनवरी तक लाल किला मैदान मे देखी जा सकती है। सूत्रों के अनुसार गणतंत्र दिवस के परेड में इस बार 17 राज्यों और केंद्र सरकार के 13 विभागों की 30 झाँकियाँ देखी जा सकती है इन झाँकियों की चयन प्रक्रिया काफी सख्त रखी गई थी जिसके कारण कई राज्यों की झाँकियों का चयन नहीं हो सका।

हर राज्य की अपनी अनूठी थीम

इस बार ये झाँकियाँ सिर्फ वेशभूषा या लोकनृत्य तक सीमित नहीं होंगी बल्कि इस बार हर राज्य एक अनूठे थीम के साथ उतरेंगे । कर्नाटक की झाँकी का थीम ‘Millets to Microchips जब कि बिहार की झाँकी में मखाना जैसे स्थानीय उत्पाद एवं मध्य प्रदेश की झाँकी में अहिल्याबाई होलकर की 300वीं जयंती दिखाई देंगी । हर झाँकी एक अलग और नई कहानी कहती नज़र आएगी।

नारी शक्ति पर बड़ा फोकस

गणतंत्र दिवस 2026 की झाँकियों में महिला सशक्तिकरण को केंद्र बनाया गया है, महिला सैनिक, वैज्ञानिक और महिला सेना की भागीदारी को बढ़ाया गया है साथ ही बिहार की झाँकी में मखाना जैसे उत्पाद की थीम भारत के हर क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है। कई झाँकियों में हरित भारत और आत्मनिर्भरता जैसे विषयों पर भी जोर दिया गया है वहीं कई राज्यों और विभागों ने जल संरक्षण, सौर ऊर्जा और प्राकृतिक खेती जैसे थीम को जगह दी है। रक्षा मंत्रालय ने झाँकी में स्वदेशी हथियार और तकनीकों को अनूठे ढंग में पेश किया है

सिनमेटिक टच और तकनीकों को प्रयोग

गणतंत्र दिवस 2026 परेड और झाँकियों में इस बार सिनमेटिक टच भी दिखाई देगा, साथ ही इस बार LED स्क्रीन, 3D एलिमेंट, लाइव परफॉर्मेंस, कोरियोग्राफी का इस्तेमाल करके डॉक्यूमेंट्री भी तैयार की जाएगी। खास बात ये भी है कि पहली बार भारतीय सिनेमा को समर्पित झाँकी ने भी लोगों का ध्यान खींचा। इस झाँकी का प्रतिनिधित्व फिल्म-मेकर संजय लीला भंसाली करेंगे।

ये झाँकियाँ भारत की पहचान नहीं, भारत को नई दिशा दिखायेंगी। गणतंत्र दिवस 2026 की झाँकियाँ यह साफ करती हैं कि भारत अब सिर्फ अपनी विरासत पर गर्व नहीं करता, बल्कि भविष्य की तस्वीर भी दुनिया को दिखा रहा है।

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पॉलिटिक्स

ममता बनर्जी: ‘मुख्यमंत्री की कठोरता पर सुप्रीम कोर्ट का प्रहार..,’ IPAC रेड मामले में फंसी बंगाल की मुख्यमंत्री, बीजेपी ने आक्रामक अंदाज में की प्रतिक्रिया

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ममता बनर्जी: चुनावी प्रक्रिया के बीच बंगाल में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पिछले हफ्ते आईपैक प्रमुख प्रतीक जैन के आवास पर ईडी की छापेमारी ने पूरे राज्य का राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। इस मुद्दे पर प्रवर्तन निदेशालय की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख सामने आया है। इतना ही नहीं, कोर्ट की बेंच ने ममता बनर्जी समेत बंगाल के कई शीर्ष अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। ममता बनर्जी को सुप्रीम कोर्ट से मिली फटकार के बाद बीजेपी ने आक्रामक रुख अपनाया है। बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने कोर्ट के रुख का जिक्र करते हुए ममता बनर्जी को मिले नोटिस को सुप्रीम थप्पड़ कहा है। इसी बीच, बीजेपी के अन्य नेता भी IPAC छापेमारी मामले को लेकर मुख्यमंत्री के खिलाफ सक्रिय हो गए हैं।

IPAC रेड केस में ममता बनर्जी पर बीजेपी की आक्रामकता

बंगाल में मुख्य विपक्ष की भूमिका निभा रही बीजेपी खुलकर आईपैक छापेमारी मामले में ममता बनर्जी पर हमला कर रही है।

बीजेपी नेता तरुण चुघ ने इस राजनीतिक घटनाक्रम पर ममता बनर्जी को निशाने पर लिया है। उन्होंने कहा, “ED मामले में सुप्रीम कोर्ट की फटकार सत्य की जीत एवं ममता बनर्जी की कालातीत भ्रष्टाचार, माफिया को संरक्षण देने वाली सरकार के लिए एक सुप्रीम थप्पड़ जैसा है। ममता सरकार संवैधानिक संस्थाओं के कार्यों में खुलकर दखल दे रही है और केवल अराजकता फैला रही है। ममता बनर्जी चाहे कितना भी दबाव बनाए, लूट और भ्रष्टाचार की जांच नहीं रुकेगी और अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।”

बिहार बीजेपी के अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि “ममता बनर्जी सरकार का असली चेहरा सुप्रीम कोर्ट ने सामने रखा है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि स्थिति अराजक हो जाएगी। बंगाल में कानून-व्यवस्था की स्थिति क्या है, यह तो सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से ही स्पष्ट है। IPAC की जांच में मुख्यमंत्री व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप करें और फाइल ले जाएं। सुप्रीम कोर्ट के बयान से यह साफ होता है कि किस प्रकार की अराजकता व्याप्त है।”

इसके अलावा, सुवेंदु अधिकारी, सुकांत मजूमदार और अन्य स्थानीय बीजेपी नेताओं ने भी ममता बनर्जी पर तीखे हमले किए हैं।

सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ी!

पिछले कल आईपैक छापेमारी मामले में प्रवर्तन निदेशालय की याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख सामने आया। न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और विपुल पंचोली की बेंच ने ममता बनर्जी, बंगाल पुलिस के DGP, पुलिस आयुक्त और उपायुक्त को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में उत्तर देने को कहा है। इस मामले की अगली सुनवाई 3 फरवरी को होगी। इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट द्वारा ममता बनर्जी और अन्य आला अधिकारियों को जारी नोटिस बंगाल सरकार की समस्याओं को और बढ़ा रहा है। अब यह देखना होगा कि कोर्ट आगे क्या कदम उठाता है।

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पॉलिटिक्स

महाराष्ट्र निकाय चुनाव परिणाम 2026: क्या ठाकरे भाइयों की प्रतिष्ठा को लगेगा धक्का? BMC में बीजेपी और शिवसेना का प्रभाव? काउंटिंग से जुड़े लेटेस्ट अपडेट जानें।

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महाराष्ट्र नगर निकाय चुनाव परिणाम 2026: महाराष्ट्र के प्रतिष्ठित निकाय चुनाव के नतीजे आज घोषित किए जा रहे हैं। सुबह 10 बजे से मतगणना की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इससे पूर्व, वोटिंग समाप्त होने के बाद एग्जिट पोल जारी किए गए थे। अधिकतर एग्जिट पोल में बीएमसी में बीजेपी-शिवसेना (शिंदे गुट) को बढ़त मिलती दिखाई दी है।

यदि ऐसा सच में होता है, तो इसे बीएमसी में बीजेपी-शिवसेना की सफलता के रूप में देखा जाएगा। इस स्थिति में क्या ठाकरे भाइयों की प्रतिष्ठा दांव पर लगेगी? इस विषय पर कई प्रश्न उठ रहे हैं। आरएसएस का गढ़ नागपुर, कोल्हापुर, नवी मुंबई, वसई, पनवेल, जालना, ठाणे, नासिक आदि नगर निगम सीटों के परिणाम पर सबकी नजरें टिकी हैं।

क्या ठाकरे भाइयों की प्रतिष्ठा खतरे में है?

इस प्रश्न का सही उत्तर हम दोपहर तक प्राप्त कर लेंगे। दरअसल, शिवसेना (यूबीटी) और राज ठाकरे (एमएनएस) एक साथ बीएमसी के चुनावी मुकाबले में उतर रहे हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद इस लड़ाई में उद्धव और राज ठाकरे के लिए अपने अस्तित्व को बनाए रखना महत्वपूर्ण है। यदि बीएमसी में शिवसेना अपनी स्थिति बनाए रखती है, तो मुंबई में उसका अस्तित्व सुरक्षित रहेगा।

लेकिन अगर बीएमसी पर बीजेपी-शिवसेना (शिंदे गुट) का कब्जा हो जाता है, तो ठाकरे भाइयों की प्रतिष्ठा खतरे में पड़ सकती है। खबर लिखने तक बीएमसी में बीजेपी 25 और शिवसेना 19 सीटों पर आगे चल रही है। कुल 227 सीटों पर मतगणना होनी है और 114 बहुमत का आंकड़ा है। अधिकांश एग्जिट पोल में बीजेपी-शिवसेना (शिंदे गुट) को बहुमत मिलने के संकेत दिए गए हैं। ऐसे में, मतगणना के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि बीएमसी का असली विजेता कौन होता है।

महाराष्ट्र निकाय चुनाव परिणाम से जुड़ी हालिया जानकारी

पुणे से लेकर नागपुर, ठाणे, नासिक, जालना समेत विभिन्न क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं का जमावड़ा उमड़ पड़ा है। सभी महाराष्ट्र निकाय चुनाव परिणाम 2026 से संबंधित आंकड़ों को उत्साहपूर्वक देख रहे हैं। महाराष्ट्र की कुल 29 नगर निगम के 893 वार्ड में मतदान के नतीजे आज घोषित होने वाले हैं। इसके लिए मतगणना सुबह 10 बजे से शुरू हो गई है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका पर सभी की नजरें टिक गई हैं, जहां खबर लिखते समय तक बीजेपी गठबंधन 25 सीटों पर आगे चल रहा है। वहीं, शिवसेना 19 सीटों पर मजबूती से खड़ी है।

आरएसएस के गढ़ नागपुर में बीजेपी 7 सीटों पर आगे है। संभाजीनगर में बीजेपी 8, शिवसेना (शिंदे गुट) 4, और शिवसेना (यूबीटी) 3 सीटों पर आगे चल रही है। इसके अलावा वसई, मालेगांव, धुले, अकोला, नासिक, चंद्रपुर, जलगांव, सोलापुर, नवी मुंबई, अमरावती आदि के परिणाम पर भी सबकी नजरें टिकी हुई हैं। दोपहर के बाद स्थिति लगभग स्पष्ट हो जाएगी और आरंभिक रुझान नतीजों में बदले जा सकते हैं। तब यह देखना रोचक होगा कि महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव में किसका दबदबा बनता है।

नोट– यहां उपलब्ध आंकड़े प्रारंभिक रुझानों के आधार पर हैं। समय के साथ इनमें परिवर्तन की संभावना है।

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