पॉलिटिक्स
मायावती: क्या BSP 2027 के विधानसभा चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी? सपा-भाजपा के गठबंधन पर इसका क्या असर हो सकता है? जानें।
मायावती: राजधानी लखनऊ के हजरतगंज स्थित बसपा कार्यालय पर आज कार्यकर्ताओं की भीड़ है। पूर्वांचल से लेकर पश्चिमी यूपी, अवध और ब्रज क्षेत्र के बसपा कार्यकर्ता हाथों में फूलों के गुलदस्ते लिए पार्टी सुप्रीमो मायावती को 70वें जन्मदिन की शुभकामनाएँ देने पहुंचे हैं। हालांकि, बसपा कार्यकर्ताओं की भीड़ पहले की तुलना में कम नजर आ रही है। वह दौर था जब मायावती की बसपा ने यूपी की सत्ता में अपना बोलबाला कायम किया था। 2007-2012 के कार्यकाल के बाद, बार-बार चुनाव में बसपा की स्थिति कमजोर होने लगी और मायावती को झटका लगा।
आज जब मायावती अपने 70वें जन्मदिन पर मीडिया से बात करेंगी, तो उनके मन में कई सवाल होंगे। क्या पूर्व सीएम मायावती की पार्टी 2027 विधानसभा चुनाव में अपनी पहचान बना सकेगी? क्या बसपा अपने प्रतिद्वंद्वियों सपा-बीजेपी के समीकरण को प्रभावित कर सकेगी? इसके अलावा अन्य प्रश्न भी हैं जिनका उत्तर जानना रोचक होगा। आइए हम आपको इसे विस्तार से समझाते हैं।
क्या 2027 विधानसभा चुनाव में मायावती की पार्टी प्रभावी साबित होगी?
आज 15 जनवरी, 2026 को बसपा सुप्रीमो मायावती अपना 70वां जन्मदिन मना रही हैं। पार्टी के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी अब उनके भतीजे आकाश आनंद के पास है। यूपी में चंद्रशेखर रावण के रूप में दलितों के एक नेता का उदय भी हो चुका है। इस स्थिति में बड़ा सवाल है कि 2017 और 2022 विधानसभा चुनावों में बुरी तरह विफल रहने वाली बसपा 2027 में क्या प्रभावी सिद्ध होगी? इसका सही उत्तर तो भविष्य में ही मिलेगा। हालांकि, यह निश्चित है कि बसपा इस दिशा में प्रयास की कोई कमी नहीं रखेगी।
वर्ष 2012 में यूपी की सत्ता से बाहर हुई बसपा अब 2027 के लिए पूरी तरह तैयार है। मायावती ‘एकला चलो’ के रास्ते पर आगे बढ़ रही हैं। जिस यूपी में 2007 में 206 सीटों पर जीत हासिल करके बसपा सत्ता में आई थी, उसी यूपी में अब पार्टी को अपनी पहचान बनाए रखने का संघर्ष करना है। 2007 के बाद से, वर्ष दर वर्ष बसपा का प्रदर्शन गिरता गया। 2012 में मायावती की पार्टी ने 80 सीटों पर जीत हासिल की, जबकि 2017 में यह संख्या 19 और 2022 में केवल 1 सीट तक सिमट गई। ऐसे में 2027 का चुनाव बसपा के लिए अपनी पहचान बचाने की चुनौती है, जिसके लिए पार्टी हर संभव प्रयास करेगी।
सपा-भाजपा के समीकरण पर इसका क्या प्रभाव हो सकता है?
अगर बसपा 2027 विधानसभा चुनाव में प्रभावी साबित होती है, तो इसका सीधा असर बीजेपी-सपा के समीकरण पर पड़ेगा। प्रतिद्वंदी दलों को इसका लाभ भी हो सकता है, तो कहीं उन्हें नुकसान भी उठाना पड़ सकता है। हाल की बात करें तो 2024 लोकसभा चुनाव में बसपा ने भले ही कोई सीट नहीं जीती, लेकिन उसने समीकरण को प्रभावित किया। 2024 के चुनाव में बीजेपी की जीती हुई 33 सीटों में से 16 सीटें ऐसी थीं जहां बसपा को मिले वोट बीजेपी द्वारा जीते गए मार्जिन से अधिक थे। यदि यहां बसपा का प्रदर्शन कमजोर रहता, तो बीजेपी को नुकसान हो सकता था।
विपक्षी दल सपा का समीकरण भी बीएसपी के प्रदर्शन पर काफी हद तक निर्भर करता है। 2019 लोकसभा चुनाव में भी इसका असर देखने को मिला था। विधानसभा चुनाव 2017 और 2022 में दलितों का वोट बीजेपी की ओर शिफ्ट होने की बातें हुई थीं। इसका नतीजा यह हुआ कि बीजेपी सत्ता में वापस लौटी। ऐसे में यदि 2027 में बीएसपी फिर से प्रभावी साबित होती है, तो बीजेपी को नुकसान उठाना पड़ सकता है। सत्ता किसके हाथ में जाएगी, इसका उत्तर भविष्य में ही स्पष्ट होगा। लेकिन यह तय है कि यदि मायावती की बसपा चुनावी मैदान में सक्रियता के साथ उतरी, तो 2027 का समीकरण बदल सकता है।
देश
‘केजरीवाल भ्रष्ट नहीं है…’, मीडिया के सामने फूट-फूटकर रोए Arvind Kejriwal; क्लीन चिट मिलते ही दिया वायरल बयान
आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को कथित शराब नीति मामले में बड़ी राहत मिली है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों से बरी कर दिया है। फैसले के बाद मीडिया से बात करते हुए केजरीवाल भावुक हो गए।
भावुक हुए केजरीवाल
उन्होंने कहा, “हमने पहले ही कहा था कि सच्चाई की जीत होगी। आज सच की जीत हुई है। मुझे भारतीय न्याय प्रणाली पर पूरा भरोसा था कि न्याय जरूर मिलेगा।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनकी पार्टी को राजनीतिक रूप से निशाना बनाया गया और झूठे आरोपों के जरिए बड़े नेताओं को जेल भेजा गया।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी, CBI के सबूतों पर सवाल
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि जांच एजेंसी आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त और ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सकी। चार्जशीट में भी कई खामियां पाई गईं और किसी गवाह या दस्तावेज से आरोप पुष्ट नहीं हुए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिना ठोस प्रमाण के केवल आरोपों के आधार पर किसी के खिलाफ मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। निष्पक्ष सुनवाई के लिए निष्पक्ष जांच जरूरी है, लेकिन इस मामले में अभियोजन पक्ष अपना केस साबित करने में विफल रहा।
‘कोई आपराधिक साजिश साबित नहीं’
अदालत ने यह भी कहा कि सीबीआई द्वारा लगाए गए आरोपों में आपराधिक साजिश का कोई ठोस आधार नहीं मिला। न तो केजरीवाल और न ही सिसोदिया के खिलाफ प्रत्यक्ष सबूत पेश किए जा सके। इन्हीं कारणों से कोर्ट ने दोनों नेताओं को बरी करने का आदेश दिया। फैसले के बाद ‘आप’ कार्यकर्ताओं ने इसे न्याय और सच्चाई की जीत बताया।
देश
शराब घोटाले में AAP को राहत, केजरीवाल-सिसोदिया पर आरोप साबित करने में नाकाम रही CBI
दिल्ली के कथित आबकारी नीति मामले में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को बड़ी राहत मिली है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने दोनों नेताओं को आरोपों से मुक्त कर दिया है। अदालत ने कहा कि जांच एजेंसियां उनके खिलाफ मुकदमा चलाने लायक पर्याप्त और ठोस सबूत पेश करने में विफल रहीं। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सीबीआई द्वारा लगाए गए आरोपों में आपराधिक षड्यंत्र का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला। फैसले के साथ ही मामले में नामजद अन्य कई आरोपियों को भी राहत मिली। केजरीवाल और सिसोदिया व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित हुए, जबकि कुछ अन्य आरोपी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए।
कोर्ट ने जांच पर उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत ने अभियोजन पक्ष के तर्कों की विस्तार से समीक्षा की। कोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसियां नेताओं को सीधे तौर पर कथित घोटाले से जोड़ने वाले साक्ष्य पेश नहीं कर सकीं। केवल आरोपों के आधार पर किसी के खिलाफ मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि निष्पक्ष सुनवाई के लिए निष्पक्ष जांच अनिवार्य है और इस मामले में प्रॉसिक्यूशन अपना पक्ष साबित करने में असफल रहा।
2021-22 की आबकारी नीति से जुड़ा था मामला
यह पूरा मामला दिल्ली सरकार की 2021-22 की नई आबकारी नीति से संबंधित था। विपक्षी दलों और जांच एजेंसियों का आरोप था कि इस नीति में भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और कार्टेलाइजेशन हुआ, जिससे सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचा। जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा की गई थी। आरोप था कि नीति कुछ चुनिंदा शराब कारोबारियों को लाभ पहुंचाने के लिए बनाई गई और इसके बदले कथित तौर पर रिश्वत ली गई। यह मामला आम आदमी पार्टी के लिए बड़ा राजनीतिक संकट बना था और कई नेताओं को जेल भी जाना पड़ा था। हालांकि, अब अदालत के फैसले के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं ने इसे ‘सत्य की जीत’ बताया है।
देश
PM Modi बने डिजिटल दुनिया के ‘बादशाह’, इंस्टाग्राम पर 100M का आंकड़ा पार कर रचा इतिहास
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को सोशल मीडिया पर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। उन्होंने इंस्टाग्राम पर 100 मिलियन (10 करोड़) फॉलोअर्स का आंकड़ा पार कर लिया है। इसके साथ ही वे दुनिया के पहले ऐसे नेता बन गए हैं, जिनके इंस्टाग्राम पर 100 मिलियन से अधिक फॉलोअर्स हैं। साल 2014 में इंस्टाग्राम से जुड़ने वाले प्रधानमंत्री मोदी के फॉलोअर्स की संख्या कई वैश्विक नेताओं से कहीं आगे निकल चुकी है।
वैश्विक नेताओं से आगे पीएम मोदी
इंस्टाग्राम फॉलोअर्स के मामले में पीएम मोदी, Donald Trump से भी काफी आगे हैं। ट्रंप के 43.2 मिलियन फॉलोअर्स हैं, जो मोदी के मुकाबले आधे से भी कम हैं।
सूची में अन्य नेताओं की स्थिति इस प्रकार है:
Prabowo Subianto – 15 मिलियन
Luiz Inácio Lula da Silva – 14.4 मिलियन
Recep Tayyip Erdoğan – 11.6 मिलियन
Javier Milei – 6.4 मिलियन
भारत में भी सबसे आगे
देश के भीतर भी इंस्टाग्राम पर पीएम मोदी का दबदबा कायम है। दूसरे स्थान पर Yogi Adityanath हैं, जिनके 16.1 मिलियन फॉलोअर्स हैं।तीसरे नंबर पर Rahul Gandhi हैं, जिनके 12.6 मिलियन फॉलोअर्स हैं। बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी के इजरायल के दो दिवसीय आधिकारिक दौरे के दौरान उनके फॉलोअर्स की संख्या में और तेजी से वृद्धि हुई।
इजरायल की संसद में मिला सर्वोच्च सम्मान
अपने इजरायल दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी को वहां की संसद ने सर्वोच्च सम्मान से नवाजा। यह सम्मान भारत और इजरायल के रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने में उनके योगदान के लिए दिया गया। भाषण के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सांसदों से बातचीत की। इस दौरान इजरायली सांसदों ने उनके साथ सेल्फी और तस्वीरें भी लीं। उनके संबोधन के दौरान संसद में उन्हें स्टैंडिंग ओवेशन भी मिला।
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