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सीएम सिद्धारमैया कर्नाटक की राजनीतिक समस्या करेंगे सुलझाने! डीके शिवकुमार के साथ आमने-सामने की बातचीत से मिलेगा समाधान, क्या आएगा नया बदलाव?

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मुख्यमंत्री सिद्धारमैया: राजनीतिक हलचल के बीच जो गूंज उठ रही है, उसका प्रभाव दूर-दूर तक महसूस किया जा रहा है। स्थिति यह है कि बेंगलुरु से दिल्ली तक नेतृत्व परिवर्तन की बातें जोर पकड़ रही हैं। जहां एक ओर डीके शिवकुमार का समूह मुख्यमंत्री पद को लेकर कोई समझौता करने के लिए तैयार नहीं है, वहीं दूसरी ओर सीएम सिद्धारमैया द्वारा शांति प्रस्ताव भेजा गया है।

सीएम सिद्धारमैया ने कहा है कि वे डीके शिवकुमार के साथ आमने-सामने बैठकर इस राजनीतिक समसya को हल करना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने उन्हें नाश्ते पर भी आमंत्रित किया है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की यह पहल कांग्रेस आलाकमान के लिए कुछ राहत देने वाली जरूर है। हालांकि, स्थिति अब भी बेकाबू होते दिखाई दे रही है, इसी वजह से परिस्थिति में बदलाव की संभावना पर सवाल उठ रहे हैं।

सिद्धारमैया करेंगे डीके शिवकुमार के साथ आमने-सामने वार्ता

राजनीतिक उठापटक के बीच, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने एक शांति प्रस्ताव भेजा है। उन्होंने कहा है कि वे डीके शिवकुमार को नाश्ते पर बुलाते हैं, जहां बैठकर सभी बातें स्पष्ट की जाएंगी। यह जानकारी मिल रही है कि कर्नाटक में ‘सीएम कुर्सी’ को लेकर चल रही राजनीतिक उठापटक अब खुलकर सामने आ गई है।

स्थिति यह है कि सीएम सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच पहले से ही शब्दों को लेकर टकराव हो चुका है। इसके अलावा, दोनों समूह का दिल्ली दौरा और आलाकमान तक कुर्सी की मांग का संदेश पहुंचाना कई संभावनाओं की ओर इशारा करता है। सिद्धारमैया का डीके शिवकुमार को नाश्ते पर आमंत्रित करना दर्शाता है कि वे कुर्सी छोड़ने के इरादे में नहीं हैं। वे अब भी बीच का रास्ता निकालकर इस राजनीतिक उतार-चढ़ाव पर रोक लगाना चाहते हैं।

क्या सिद्धारमैया की पहल से स्थिति में बदलाव आएगा?

इस सवाल का सही उत्तर भविष्य के गर्भ में छिपा है। लेकिन यह निश्चित है कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने खुद पहल कर विकल्प खोजने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। जहां डीके शिवकुमार का गुट लगातार उन्हें मुख्यमंत्री बनाने की मांग पर दृढ़ है, वहीं वार्ता की बात करना सिद्धारमैया की समझदारी को दर्शाता है। मुख्यमंत्री आलाकमान के सामने खुद को सक्रिय रूप में प्रस्तुत करते हुए, वे डीके शिवकुमार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

भविष्य में क्या होगा, यह समय ही बताएगा। लेकिन यह जरूर है कि सीएम सिद्धारमैया ने शांति प्रस्ताव भेजकर एक रणनीति बना ली है। क्या डीके शिवकुमार उनके साथ बैठकर चर्चा करेंगे या नहीं, यह भविष्य की बात है। लेकिन यदि प्रयासों की बात होगी, तो उसमें सीएम सिद्धारमैया का नाम जरूर आएगा जिन्होंने स्थिति बदलने की दिशा में कदम बढ़ाया है। अब देखना यह है कि कर्नाटक की राजनीति में इस प्रभुत्व की लड़ाई आखिर कहां तक जाती है।

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देश

‘केजरीवाल भ्रष्ट नहीं है…’, मीडिया के सामने फूट-फूटकर रोए Arvind Kejriwal; क्लीन चिट मिलते ही दिया वायरल बयान

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आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को कथित शराब नीति मामले में बड़ी राहत मिली है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों से बरी कर दिया है। फैसले के बाद मीडिया से बात करते हुए केजरीवाल भावुक हो गए।

भावुक हुए केजरीवाल

उन्होंने कहा, “हमने पहले ही कहा था कि सच्चाई की जीत होगी। आज सच की जीत हुई है। मुझे भारतीय न्याय प्रणाली पर पूरा भरोसा था कि न्याय जरूर मिलेगा।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनकी पार्टी को राजनीतिक रूप से निशाना बनाया गया और झूठे आरोपों के जरिए बड़े नेताओं को जेल भेजा गया।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी, CBI के सबूतों पर सवाल

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि जांच एजेंसी आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त और ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सकी। चार्जशीट में भी कई खामियां पाई गईं और किसी गवाह या दस्तावेज से आरोप पुष्ट नहीं हुए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिना ठोस प्रमाण के केवल आरोपों के आधार पर किसी के खिलाफ मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। निष्पक्ष सुनवाई के लिए निष्पक्ष जांच जरूरी है, लेकिन इस मामले में अभियोजन पक्ष अपना केस साबित करने में विफल रहा।

‘कोई आपराधिक साजिश साबित नहीं’

अदालत ने यह भी कहा कि सीबीआई द्वारा लगाए गए आरोपों में आपराधिक साजिश का कोई ठोस आधार नहीं मिला। न तो केजरीवाल और न ही सिसोदिया के खिलाफ प्रत्यक्ष सबूत पेश किए जा सके। इन्हीं कारणों से कोर्ट ने दोनों नेताओं को बरी करने का आदेश दिया। फैसले के बाद ‘आप’ कार्यकर्ताओं ने इसे न्याय और सच्चाई की जीत बताया।

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देश

शराब घोटाले में AAP को राहत, केजरीवाल-सिसोदिया पर आरोप साबित करने में नाकाम रही CBI

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दिल्ली के कथित आबकारी नीति मामले में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को बड़ी राहत मिली है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने दोनों नेताओं को आरोपों से मुक्त कर दिया है। अदालत ने कहा कि जांच एजेंसियां उनके खिलाफ मुकदमा चलाने लायक पर्याप्त और ठोस सबूत पेश करने में विफल रहीं। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सीबीआई द्वारा लगाए गए आरोपों में आपराधिक षड्यंत्र का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला। फैसले के साथ ही मामले में नामजद अन्य कई आरोपियों को भी राहत मिली। केजरीवाल और सिसोदिया व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित हुए, जबकि कुछ अन्य आरोपी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए।

कोर्ट ने जांच पर उठाए सवाल

सुनवाई के दौरान अदालत ने अभियोजन पक्ष के तर्कों की विस्तार से समीक्षा की। कोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसियां नेताओं को सीधे तौर पर कथित घोटाले से जोड़ने वाले साक्ष्य पेश नहीं कर सकीं। केवल आरोपों के आधार पर किसी के खिलाफ मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि निष्पक्ष सुनवाई के लिए निष्पक्ष जांच अनिवार्य है और इस मामले में प्रॉसिक्यूशन अपना पक्ष साबित करने में असफल रहा।

2021-22 की आबकारी नीति से जुड़ा था मामला

यह पूरा मामला दिल्ली सरकार की 2021-22 की नई आबकारी नीति से संबंधित था। विपक्षी दलों और जांच एजेंसियों का आरोप था कि इस नीति में भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और कार्टेलाइजेशन हुआ, जिससे सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचा। जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा की गई थी। आरोप था कि नीति कुछ चुनिंदा शराब कारोबारियों को लाभ पहुंचाने के लिए बनाई गई और इसके बदले कथित तौर पर रिश्वत ली गई। यह मामला आम आदमी पार्टी के लिए बड़ा राजनीतिक संकट बना था और कई नेताओं को जेल भी जाना पड़ा था। हालांकि, अब अदालत के फैसले के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं ने इसे ‘सत्य की जीत’ बताया है।

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देश

PM Modi बने डिजिटल दुनिया के ‘बादशाह’, इंस्टाग्राम पर 100M का आंकड़ा पार कर रचा इतिहास

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को सोशल मीडिया पर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। उन्होंने इंस्टाग्राम पर 100 मिलियन (10 करोड़) फॉलोअर्स का आंकड़ा पार कर लिया है। इसके साथ ही वे दुनिया के पहले ऐसे नेता बन गए हैं, जिनके इंस्टाग्राम पर 100 मिलियन से अधिक फॉलोअर्स हैं। साल 2014 में इंस्टाग्राम से जुड़ने वाले प्रधानमंत्री मोदी के फॉलोअर्स की संख्या कई वैश्विक नेताओं से कहीं आगे निकल चुकी है।

वैश्विक नेताओं से आगे पीएम मोदी

इंस्टाग्राम फॉलोअर्स के मामले में पीएम मोदी, Donald Trump से भी काफी आगे हैं। ट्रंप के 43.2 मिलियन फॉलोअर्स हैं, जो मोदी के मुकाबले आधे से भी कम हैं।

सूची में अन्य नेताओं की स्थिति इस प्रकार है:

Prabowo Subianto – 15 मिलियन

Luiz Inácio Lula da Silva – 14.4 मिलियन

Recep Tayyip Erdoğan – 11.6 मिलियन

Javier Milei – 6.4 मिलियन

भारत में भी सबसे आगे

देश के भीतर भी इंस्टाग्राम पर पीएम मोदी का दबदबा कायम है। दूसरे स्थान पर Yogi Adityanath हैं, जिनके 16.1 मिलियन फॉलोअर्स हैं।तीसरे नंबर पर Rahul Gandhi हैं, जिनके 12.6 मिलियन फॉलोअर्स हैं। बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी के इजरायल के दो दिवसीय आधिकारिक दौरे के दौरान उनके फॉलोअर्स की संख्या में और तेजी से वृद्धि हुई।

इजरायल की संसद में मिला सर्वोच्च सम्मान

अपने इजरायल दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी को वहां की संसद ने सर्वोच्च सम्मान से नवाजा। यह सम्मान भारत और इजरायल के रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने में उनके योगदान के लिए दिया गया। भाषण के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सांसदों से बातचीत की। इस दौरान इजरायली सांसदों ने उनके साथ सेल्फी और तस्वीरें भी लीं। उनके संबोधन के दौरान संसद में उन्हें स्टैंडिंग ओवेशन भी मिला।

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