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Border 2 के शोर में खो गई 1971 की सच्चाई!, बॉलीवुड की ये अंडररेटेड फिल्म दिलाएगी The Missing 54 की याद

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आज जब Border 2 रिलीज हो चुकी है और हर तरफ उसी का शोर है, ऐसे में 1971 की जंग पर बनी एक ऐसी फिल्म को याद करना और भी जरूरी हो जाता है, जो कभी शोर का हिस्सा नहीं बनी। साल 2007 में आई 1971 रिलीज के वक्त चुपचाप आई, बिना हाइप के चली गई, लेकिन वक्त के साथ लोगों के दिलों में अपनी जगह बनाती चली गई। यह फिल्म जंग को तालियों और सीटियों वाली बहादुरी की तरह नहीं, बल्कि उस खामोश पीड़ा की तरह देखती है जो युद्ध के बाद शुरू होती है, जहां न कोई जश्न होता है, न कोई बैकग्राउंड म्यूजिक, सिर्फ इंसान, उसका दर्द और घर लौटने का लंबा इंतजार होता है। आईए जानते है क्या है कहानी?

क्या है 1971 की कहानी?

यह फिल्म 1971 के भारत-पाक युद्ध के उन भारतीय सैनिकों की कहानी सामने लाती है, जिनकी जंग युद्धविराम के साथ खत्म नहीं हुई। कहानी 1977 के दौर में आगे बढ़ती है, यानी लड़ाई को छह साल बीत चुके हैं, लेकिन कुछ भारतीय सैनिक अब भी पाकिस्तान की जेलों में बंद हैं। यहां फोकस उनकी बहादुरी या युद्ध कौशल पर नहीं, बल्कि जिंदा रहने की जद्दोजहद पर है। भूख, यातना, अपमान और सबसे बड़ा सवाल कि क्या उनका देश अब भी उन्हें याद करता है? इस फिल्म में सैनिक किसी पोस्टर के हीरो नहीं, बल्कि थके हुए इंसान हैं जो उम्मीद को आखिरी सांस तक पकड़े हुए हैं। लेकिन यहीं कहानी रुकती नहीं, बल्कि एक और ज्यादा असहज सच की तरफ मुड़ जाती है।

मिसिंग 54 की कहानी है 1971

‘1971’ की सबसे बड़ी ताकत यह है कि यह चुपचाप The Missing 54 की याद दिलाती है, ये वो 54 भारतीय सैनिक हैं, जिनके बारे में माना जाता है कि युद्ध के बाद भी वे पाकिस्तान की जेलों में रह गए और जिन्हें कूटनीति कभी वापस नहीं ला सकी। फिल्म किसी पर सीधे आरोप नहीं लगाती, लेकिन एक गहरा सवाल छोड़ जाती है: ‘क्या जंग सिर्फ सीमा पर लड़ी जाती है, या युद्ध के बाद फाइलों और टालमटोल में भी चलती रहती है? यहां विलेन कोई एक मुल्क नहीं, बल्कि वही व्यवस्था है जो सैनिकों को इंसान से घटाकर आंकड़ों में बदल देती है और इस सवाल को आवाज देती है फिल्म की कास्ट, जो शोर नहीं करती, असर छोड़ती है।

आईना दिखाती है फिल्म

फिल्म की असली ताकत इसकी कास्ट और ट्रीटमेंट है। मनोज बाजपेयी यानी मेजर सूरज सिंह कोई भाषणबाज हीरो नहीं, बल्कि हालात को समझने वाला, कम बोलने वाला अफसर है। रवि किशन, दीपक डोबरियाल और पियूष मिश्रा शोर नहीं करते, बल्कि खामोशी से दर्द बयां करते हैं। खासकर पीयूष मिश्रा का किरदार, जो टूटने के बाद भी घर लौटने की उम्मीद थामे रहता है। डायरेक्टर अमृत सागर ने इसे जानबूझकर मसाला वॉर फिल्म नहीं बनाया। तंग फ्रेम, धूल भरा कैमरा और भारी दीवारें दर्शक पर भी असर छोड़ती हैं। न आइटम सॉन्ग, न हीरो एंट्री, न स्लो मोशन राष्ट्रवाद, शायद इसलिए अपने समय में यह फिल्म नहीं चली, क्योंकि यह मनोरंजन कम और आईना ज्यादा थी और यही ईमानदारी इसे बाद में नेशनल अवॉर्ड तक ले गई।

अंडररेटेड वॉर फिल्मों में है शामिल

अगर आज हम ‘बॉर्डर’ या हाल ही में रिलीज हुई ‘बॉर्डर 2’ जैसी फिल्मों की बात करते हैं, तो 1971 अपने आप एक जरूरी तुलना बन जाती है। जहां ‘बॉर्डर’ जंग को जीत, शौर्य और जोश के नजरिए से दिखाती है, वहीं ‘1971’ यह सवाल उठाती है कि जीत के बाद सैनिकों का क्या होता है?यहां न तिरंगे लहराते हैं, न जश्न मनता है, यहां बस जीत के बाद की वह खामोशी है, जो धीरे-धीरे भीतर चुभती है और सोचने पर मजबूर करती है। शायद इसी वजह से यह फिल्म उस दौर में समझी नहीं जा सकी। इस फिल्म से जुड़ी एक कड़वी लेकिन अहम सच्चाई यह भी है कि सिनेमाघरों में नाकाम रहने के बावजूद, डिजिटल दौर में इसे दूसरा जीवन मिला। यूट्यूब और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर इसे करोड़ों लोगों ने देखा और दर्शकों ने इसे बॉलीवुड की सबसे अंडररेटेड वॉर फिल्मों में शामिल किया। इससे साफ होता है कि कमी फिल्म में नहीं थी, बल्कि उस समय में थी, जो शोर वाली देशभक्ति को तो अपनाने के लिए तैयार था, लेकिन सच्ची, शांत और तकलीफदेह कहानियों को सुनने के लिए नहीं।

कुल मिलाकर अगर वॉर फिल्म का मतलब आपके लिए सिर्फ धमाके, नारे और जीत रहा है, तो ‘1971’ आपकी सोच बदल सकती है, क्योंकि यह फिल्म जोश नहीं देती, समझ देती है- चिल्लाकर नहीं, बल्कि चुपचाप सवाल करके और ‘बॉर्डर 2’ के शोर के बीच अगर आप 1971 की जंग को इंसानों की नजर से देखना चाहते हैं, तो ‘1971’ को शांति से, ध्यान से जरूर देखना चाहिए।

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PM Modi से कैसी रही Vijay Deverakonda-Rashmika Mandanna की मुलाकात? शेयर की खास तस्वीरें

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साउथ सिनेमा के चर्चित कपल विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना अब आधिकारिक तौर पर पति-पत्नी बन चुके हैं। 26 फरवरी 2026 को उदयपुर में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ दोनों ने शादी रचाई। शादी के बाद कपल जयपुर से हैदराबाद लौट आया। इस बीच विजय ने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री से मुलाकात की तस्वीरें शेयर कर सभी का ध्यान खींच लिया।

पीएम मोदी से लिया आशीर्वाद

विजय ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर कुछ तस्वीरें साझा कीं, जिनमें वह और रश्मिका पारंपरिक परिधान में नजर आ रहे हैं। विजय ने सफेद कुर्ता-पायजामा पहना था, जबकि रश्मिका पीले सूट में बेहद खूबसूरत दिखीं। तस्वीरों के साथ विजय ने बताया कि शादी से पहले उन्होंने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद लिया। उन्होंने लिखा कि इस मुलाकात में भारत के इतिहास, संस्कृति और कहानियों पर चर्चा हुई। साथ ही प्रधानमंत्री ने उनके माता-पिता के लिए एक भावुक पत्र भी लिखा।

अमित शाह से भी हुई खास मुलाकात

विजय ने यह भी बताया कि उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की। इस दौरान भारतीय संस्कृति और सिनेमा पर बातचीत हुई। अमित शाह ने नवविवाहित जोड़े को आशीर्वाद स्वरूप एक सुंदर गणेश प्रतिमा भेंट की।

दो रीति-रिवाजों से हुई शादी

विजय और रश्मिका की शादी तेलुगु और कोडवा दोनों परंपराओं के अनुसार संपन्न हुई। उदयपुर में आयोजित इस निजी समारोह में सिर्फ परिवार के सदस्य और करीबी दोस्त ही शामिल हुए।

4 मार्च को हैदराबाद में रिसेप्शन

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कपल 4 मार्च को हैदराबाद में भव्य वेडिंग रिसेप्शन देगा। इस समारोह में साउथ इंडस्ट्री और बॉलीवुड के कई बड़े सितारों के शामिल होने की संभावना है।

‘राणाबली’ में फिर साथ दिखेंगे

शादी के बाद अब विजय और रश्मिका अपनी आगामी फिल्म राणाबली में साथ नजर आएंगे। फिल्म का पहला रोमांटिक गाना हाल ही में रिलीज हुआ है, जिसे फैंस के लिए वेडिंग गिफ्ट माना जा रहा है। फिलहाल, यह स्टार कपल अपनी नई जिंदगी की शुरुआत के साथ-साथ प्रोफेशनल फ्रंट पर भी सुर्खियां बटोर रहा है।

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Chahal संग अफेयर की अफवाहों के बाद आया शेफाली बग्गा का रिएक्शन, बोलीं- ‘पर्सनल लाइफ को…’

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क्रिकेट होस्ट और एक्ट्रेस शेफाली बग्गा इन दिनों सुर्खियों में हैं। हाल ही में उनका नाम भारतीय क्रिकेटर युजवेंद्र चहल के साथ जोड़ा जा रहा है। दोनों को कई मौकों पर साथ देखा गया, जिसके बाद सोशल मीडिया पर डेटिंग की चर्चाएं तेज हो गईं। हालांकि, अब शेफाली ने इन अफवाहों पर अपनी चुप्पी तोड़ी है।

क्या क्रिकेटर को करेंगी डेट?

इंटरव्यू में शेफाली ने अपनी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ को लेकर खुलकर बात की। जब उनसे पूछा गया कि क्या वह किसी क्रिकेटर को डेट करना चाहेंगी, तो उन्होंने दिलचस्प अंदाज में जवाब दिया। शेफाली ने कहा कि वह अपनी निजी जिंदगी को प्रोफेशन से अलग रखना पसंद करती हैं और अनावश्यक उलझनों से दूर रहना चाहती हैं। उन्होंने साफ कहा कि वह चीजों को जितना हो सके सिंपल रखना चाहती हैं।

‘मुझे भी मिल जाए मेरा विराट’

जब उनसे मजाक में कहा गया कि फैंस चाहते हैं कि उन्हें भी विराट कोहली जैसा लाइफ पार्टनर मिले, तो शेफाली मुस्कुराते हुए बोलीं, “मैं भी चाहती हूं कि मुझे जल्द कोई विराट मिल जाए।” हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि फिलहाल उनके क्रिकेटर अच्छे दोस्त हैं और वह अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर ज्यादा खुलासा नहीं करना चाहतीं।

बुमराह-संजना की जोड़ी पर दिया रिएक्शन

इंटरव्यू के दौरान जब जसप्रीत बुमराह और संजना गणेशन की जोड़ी का उदाहरण दिया गया और पूछा गया कि ऐसा उनके साथ क्यों नहीं हो सकता, तो शेफाली ने इस सवाल को हंसते हुए टाल दिया। उनकी मुस्कान ने जरूर कई इशारे किए, लेकिन उन्होंने किसी भी रिश्ते की पुष्टि नहीं की।

बिग बॉस’ से मिली पहचान

बता दें कि शेफाली ने अपने करियर की शुरुआत स्पोर्ट्स एंकर के रूप में की थी, लेकिन उन्हें असली पहचान ‘बिग बॉस 13’ से मिली, जिसे सलमान खान ने होस्ट किया था। फिलहाल, शेफाली और चहल के रिश्ते को लेकर अटकलें जारी हैं, लेकिन दोनों की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। अब देखना दिलचस्प होगा कि शेफाली बग्गा का ‘ड्रीम बॉय’ आखिर कौन बनता है।

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‘हीरो नहीं करना चाहते थे साथ काम…’, तापसी पन्नू ने तोड़ी चुप्पी; खोली इंडस्ट्री की सच्चाई

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बॉलीवुड अभिनेत्री Taapsee Pannu इन दिनों अपनी फिल्म Assi को लेकर चर्चा में हैं। सामाजिक मुद्दों पर आधारित फिल्मों के लिए जानी जाने वाली तापसी ने हाल ही में एक इंटरव्यू में अपने करियर से जुड़े कुछ चौंकाने वाले खुलासे किए।

“हीरो मेरे साथ काम नहीं करना चाहते थे”

इंटरव्यू में तापसी से पूछा गया कि क्या बेबाक राय रखने की वजह से उन्हें कभी काम गंवाना पड़ा? इस पर उन्होंने कहा कि शुरुआत में उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी, लेकिन बाद में पता चला कि कुछ हीरो उनके साथ काम नहीं करना चाहते थे। तापसी ने कहा, “मुझे बाद में पता चला कि हीरो ने मना कर दिया। इंडस्ट्री में अक्सर हीरो फिल्म के फैसले लेते हैं, जब तक कोई बड़ा डायरेक्टर न हो। कुछ डायरेक्टर इतने प्रभावशाली होते हैं कि वे जिसे चाहते हैं, उसे ही कास्ट करते हैं।” उन्होंने उदाहरण देते हुए Rajkumar Hirani की फिल्म Dunki का जिक्र किया। तापसी ने बताया कि जब राजू सर ने उन्हें कास्ट करने का फैसला किया, तो कई लोगों के लिए यह चौंकाने वाला था, क्योंकि वह उस ‘स्पेशल सर्किट’ का हिस्सा नहीं मानी जातीं। इस फिल्म में वह Shah Rukh Khan के साथ नजर आई थीं।

“मेरे साथ काम करना मुश्किल? ऐसा नहीं है”

तापसी ने यह भी कहा कि उन्होंने कई बार सुना है कि लोग कहते हैं उनके साथ काम करना मुश्किल है। हालांकि, वह इस बात से सहमत नहीं हैं। उनका कहना है, “अगर कोई मेरी फिल्मोग्राफी देखेगा तो समझ जाएगा कि मैंने कई डायरेक्टर्स के साथ बार-बार काम किया है। अगर मैं मुश्किल होती तो कोई मेरे साथ दोबारा काम क्यों करता? जो लोग मेरे साथ कभी काम नहीं कर पाए, वही ऐसी बातें कहते हैं। मैं सोशल पर्सन नहीं हूं, इसलिए सबको जाकर यह नहीं बता सकती कि मैं कैसी हूं। मैं चाहती हूं कि मेरा काम ही बोले।”

फिल्म ‘अस्सी’ को मिला सकारात्मक रिस्पॉन्स

तापसी की फिल्म ‘अस्सी’ एक गंभीर सामाजिक मुद्दे पर आधारित है। कहानी में एक टीचर के साथ हुई जबरदस्ती की घटना और उसके बाद पुलिस स्टेशन व कोर्ट में उसे जिन परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है, उसे दिखाया गया है। फिल्म को क्रिटिक्स की ओर से अच्छा रिस्पॉन्स मिला है और तापसी के प्रदर्शन की सराहना की जा रही है। एक बार फिर उन्होंने साबित किया है कि वह सिर्फ कमर्शियल सिनेमा ही नहीं, बल्कि संवेदनशील विषयों पर भी दमदार अभिनय करने में सक्षम हैं।

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