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क्या खत्म हो गया सोने-चांदी का जलवा? 1 हफ्ते में 12,000+ गिरा दाम

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बीते कई महीनों में पहली बार सोने और चांदी की कीमतों में इतनी बड़ी गिरावट देखने को मिली है। बाजार में अचानक आई इस कमजोरी ने निवेशकों को चौंका दिया है। इस गिरावट के पीछे कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव जैसे वैश्विक कारण अहम भूमिका निभा रहे हैं।

सोने की कीमत में भारी गिरावट

शुक्रवार को सोने का भाव टूटकर 1,45,570 प्रति रुपये 10 ग्राम के स्तर पर आ गया।

इस हफ्ते: 12,766 प्रति रुपये 10 ग्राम की गिरावट
मार्च में अब तक: 15,330 रुपये की गिरावट

जनवरी के बाद यह किसी एक हफ्ते में सोने की सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है। अगर यह ट्रेंड जारी रहा, तो 15 महीनों में पहली बार ऐसा हो सकता है जब पूरे महीने सोने में सिर्फ गिरावट दर्ज हो।

चांदी भी दबाव में

सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।

शुक्रवार का रेट: 2,28,871 रुपये प्रति किलोग्राम
इस हफ्ते: 29,645 रुपये की गिरावट

इससे पहले जनवरी के आखिरी हफ्ते में चांदी में 69,047 रुपये की बड़ी गिरावट देखी गई थी।

गिरावट के पीछे बड़े वैश्विक कारण

ब्रोकरेज हाउस मोतीलाल ओसवाल के कमोडिटी एक्सपर्ट मानव मोदी के मुताबिक:

-अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ है
-ट्रेजरी यील्ड में तेजी आई है
-कच्चे तेल की कीमतें 4 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं

इन सभी कारणों से निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में सोने से दूरी बना रहे हैं।

ब्याज दरों का असर

मिडिल ईस्ट में तनाव के चलते अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने सतर्क रुख अपनाया है।

-ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कम हुई
-कई देशों के सेंट्रल बैंक दरें बढ़ाने की ओर बढ़ रहे हैं

ऑस्ट्रेलिया के रिजर्व बैंक ने दरें बढ़ा दी हैं, जबकि यूरोपियन सेंट्रल बैंक, स्विस नेशनल बैंक और बैंक ऑफ जापान ने भी दरों में कटौती की संभावना कम होने के संकेत दिए हैं।

आगे क्या रहेगा ट्रेंड?

तेल की बढ़ती कीमतों और सप्लाई चेन पर असर के कारण महंगाई बढ़ने की आशंका है। ऐसे में केंद्रीय बैंक सख्त रुख अपनाते हैं, जिससे सोना-चांदी जैसे धातुओं पर दबाव बना रहता है। हालांकि, बाजार की दिशा आगे वैश्विक हालात और नीतिगत फैसलों पर निर्भर करेगी। यह जानकारी केवल सामान्य खबर और विश्लेषण के उद्देश्य से है। सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव कई कारकों पर निर्भर करता है। निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।

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चुनाव खत्म होते ही भारत में महंगा हुआ पेट्रोल-डीजल, पाकिस्तान ने घटाए रेट

अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध के बीच वैश्विक तेल संकट गहराता जा रहा है। इसी बीच पाकिस्तान ने पेट्रोल-डीजल के दाम घटाए हैं, जबकि भारत में चार साल बाद ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी हुई है।

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अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध के बाद दुनियाभर में तेल संकट गहराता जा रहा है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। इसी बीच पाकिस्तान सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत देते हुए 5 रुपये प्रति लीटर की कटौती का ऐलान किया है।

पाकिस्तान में कितने हुए नए दाम?

नई कटौती के बाद पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत 409.78 रुपये प्रति लीटर और हाई-स्पीड डीजल की कीमत 409.58 रुपये प्रति लीटर हो गई है। पाकिस्तान सरकार युद्ध शुरू होने के बाद से हर शुक्रवार रात पेट्रोलियम कीमतों की समीक्षा कर रही है। पिछले सप्ताह ही सरकार ने पेट्रोल में 14.92 रुपये और डीजल में 15 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी।

युद्ध के बाद तेजी से बढ़े थे दाम

अमेरिका-इजरायल-ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद पाकिस्तान ने 6 मार्च को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 55 रुपये प्रति लीटर तक की भारी बढ़ोतरी की थी। इसके बाद 9 मार्च को सरकार ने खर्च में कटौती के कई बड़े फैसले भी घोषित किए थे।

भारत में भी बढ़े ईंधन के दाम

वहीं भारत में सरकारी तेल कंपनियों ने लगभग चार वर्षों बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में संशोधन करते हुए दोनों ईंधनों के दाम में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। भारत में अप्रैल 2022 के बाद लंबे समय तक पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर रखे गए थे। हालांकि मार्च 2024 में लोकसभा चुनाव से पहले पेट्रोल और डीजल पर 2 रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई थी।

चुनाव खत्म होने के बाद बढ़ी कीमतें

चार राज्यों—Assam, Kerala, Tamil Nadu और West Bengal—में विधानसभा चुनाव खत्म होने के 16 दिन बाद यह बढ़ोतरी की गई है। मतदान के दौरान ईंधन की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया था, जबकि पश्चिम एशिया संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दाम लगातार बढ़ रहे थे।

तेल कंपनियों को हो रहा था भारी नुकसान

रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव से पहले तेल कंपनियां पेट्रोल पर 14 रुपये प्रति लीटर, डीजल पर 42 रुपये प्रति लीटर और एलपीजी पर 674 रुपये प्रति सिलेंडर तक का नुकसान झेल रही थीं। सरकार का कहना है कि लंबे समय तक आम लोगों पर बोझ कम रखने के लिए कीमतों को नियंत्रित रखा गया।

दुनिया के मुकाबले भारत में कम बढ़े दाम

वैश्विक आंकड़ों के अनुसार, भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में सबसे कम रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक:

  • म्यांमार में पेट्रोल 89.7% और डीजल 112.7% तक महंगा हुआ।
  • पाकिस्तान, मलेशिया, यूएई और अमेरिका में ईंधन कीमतों में 40% से 80% तक बढ़ोतरी दर्ज की गई।
  • श्रीलंका, कनाडा, ब्रिटेन और फ्रांस जैसे देशों में भी पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया।

इसके मुकाबले भारत में पेट्रोल केवल 3.2% और डीजल 3.4% महंगा हुआ है, जिसे प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे कम वृद्धि माना जा रहा है।

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Petrol Diesel Price Today: क्या बदले दाम? पड़ोसी देशों में पेट्रोल 400 के पार, LPG भी महंगा

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ईरान-इजरायल युद्ध का असर अब आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर साफ दिखने लगा है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण पेट्रोल, डीजल और एलपीजी पर दबाव बढ़ गया है। हाल ही में प्रीमियम पेट्रोल-डीजल के दाम 2 रुपये प्रति लीटर से ज्यादा बढ़ाए गए, जबकि 7 मार्च को एलपीजी सिलेंडर भी महंगा हो चुका है। इसके साथ ही कई जगहों पर एलपीजी की किल्लत की खबरें भी सामने आ रही हैं, जिससे लोगों की चिंता और बढ़ गई है।

कच्चे तेल की स्थिति

वैश्विक बाजार में कच्चा तेल अभी भी ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। ब्रेंट क्रूड करीब 111.43 डॉलर प्रति बैरल और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) लगभग 98 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। यह संकेत है कि आने वाले समय में महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है।

भारत में फिलहाल राहत

हालांकि, फिलहाल भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर हैं। 23 मार्च की सुबह जारी रेट के अनुसार दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर है, जबकि प्रीमियम ईंधन XP95 पेट्रोल 101.89 रुपये और XG डीजल 91.49 रुपये प्रति लीटर पर मिल रहा है। देश में सबसे सस्ता पेट्रोल-डीजल पोर्ट ब्लेयर में है, जहां पेट्रोल 82.46 रुपये और डीजल 78.05 रुपये प्रति लीटर है।

पड़ोसी देशों में महंगाई का असर

दूसरी ओर, पड़ोसी देशों में हालात काफी अलग हैं, जहां ईंधन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। श्रीलंका में पेट्रोल 398 रुपये और डीजल 382 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच चुका है, जबकि पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमतों में 24.4% और डीजल में 21.8% की बढ़ोतरी हुई है। चीन, म्यांमार और अफगानिस्तान में भी ईंधन महंगा हुआ है। हालांकि नेपाल और बांग्लादेश में अभी तक कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है।

LPG सिलेंडर के ताजा रेट

एलपीजी सिलेंडर की बात करें तो घरेलू उपयोग के 14.2 किलोग्राम सिलेंडर के दाम भी अलग-अलग शहरों में ऊंचे स्तर पर बने हुए हैं। दिल्ली में यह 913 रुपये, मुंबई में 912.50 रुपये, कोलकाता में 939 रुपये और चेन्नई में 928.50 रुपये का है। वहीं, 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत दिल्ली में 1883, रुपये कोलकाता में 1875.50 रुपये मुंबई में 1835 रुपये और चेन्नई में 2043.50 रुपये तक पहुंच चुकी है।

आगे क्या होगा?

कुल मिलाकर, भारत में फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता जरूर है, लेकिन वैश्विक हालात को देखते हुए आने वाले दिनों में स्थिति बदल सकती है। अगर मिडिल ईस्ट में तनाव जारी रहता है और कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका सीधा असर ईंधन और गैस की कीमतों पर पड़ सकता है, जिससे आम लोगों की जेब पर और बोझ बढ़ने की आशंका है।

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सोना गिरा, बाजार हिला! चांदी की कीमतों में भी आई भारी गिरावट

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मिडिल-ईस्ट में जारी तनाव के बीच सोने की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिल रही है। आमतौर पर सुरक्षित निवेश माने जाने वाला सोना इस बार दबाव में है और अपनी इस साल की लगभग पूरी बढ़त गंवाने के करीब पहुंच गया है। ब्लूमबर्ग के अनुसार, हालिया कारोबार में सोना करीब 3.8% गिरकर 4,320 डॉलर प्रति औंस तक आ गया, जो पिछले साल के स्तर के आसपास है। लगातार आठ सत्रों की गिरावट ने बाजार को चौंका दिया है—यह 1983 के बाद की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट मानी जा रही है।

घरेलू बाजार में भी दबाव

वैश्विक कमजोरी का असर भारतीय बाजार पर भी साफ दिखा।

MCX पर सोना करीब 5% गिरकर 1,37,377 रुपये प्रति 10 ग्राम
MCX पर चांदी करीब 6% टूटकर 2,13,166 रुपये प्रति किलोग्राम

यह गिरावट बताती है कि कीमती धातुओं का पूरा बाजार दबाव में है।

ग्लोबल मार्केट में भी कमजोरी

सिंगापुर बाजार में भी सोना और चांदी दोनों फिसले:

स्पॉट गोल्ड: 3.3% गिरकर 4,343 डॉलर प्रति औंस
चांदी: 3.4% गिरकर 65.61 डॉलर प्रति औंस

इसके साथ ही प्लैटिनम और पैलेडियम में भी गिरावट दर्ज हुई, जो व्यापक कमजोरी का संकेत है।

क्यों गिर रहा है सोना?

इस गिरावट के पीछे कई बड़े कारण हैं:

  1. ब्याज दरों का दबाव
    फेडरल रिजर्व समेत कई केंद्रीय बैंकों ने संकेत दिया है कि फिलहाल ब्याज दरों में कटौती जल्द संभव नहीं है। ऊंची ब्याज दरें सोने के लिए नकारात्मक होती हैं क्योंकि सोना कोई ब्याज नहीं देता।
  2. महंगाई और कच्चे तेल की कीमतें
    मिडिल-ईस्ट संघर्ष के चलते कच्चे तेल की कीमतें बढ़ी हैं, जिससे महंगाई का खतरा बढ़ गया है। इससे ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं।
  3. Forced Selling (मजबूरी में बिकवाली)
    शेयर बाजार और अन्य एसेट्स में नुकसान होने पर निवेशक घाटा कवर करने के लिए सोना बेचते हैं। 28 फरवरी के बाद यही ट्रेंड देखने को मिला, जिसने सोने पर दबाव बढ़ा दिया।

ईरान-अमेरिका तनाव से बढ़ी अनिश्चितता

ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है। होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बयानबाजी और चेतावनियों ने निवेशकों की चिंता और गहरा दी है, जिसका असर सोने की कीमतों पर साफ नजर आ रहा है।

क्या “ओवरसोल्ड” हो चुका है सोना?

विशेषज्ञों के मुताबिक, सोना अब “ओवरसोल्ड” जोन में पहुंच गया है। 14-दिवसीय RSI इंडिकेटर 30 से नीचे आ चुका है, जो आमतौर पर ज्यादा बिकवाली का संकेत होता है। ऐसे में शॉर्ट टर्म में हल्की रिकवरी की संभावना बन सकती है।

निवेशकों के लिए क्या रणनीति?

-बाजार में फिलहाल अनिश्चितता बेहद ज्यादा है
-युद्ध और तेल की कीमतों पर नजर रखना जरूरी है
-शॉर्ट टर्म में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है
-लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए गिरावट खरीदारी का मौका बन सकती है
कुल मिलाकर, सोने में आई यह गिरावट जोखिम भी है और अवसर भी—फैसला आपकी निवेश रणनीति और धैर्य पर निर्भर करेगा।

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