पॉलिटिक्स
SIR 2025: क्या ममता बनर्जी की सत्ता पर पकड़ कमजोर पड़ने वाली है? बिहार की तरह बंगाल में भी भाजपा की जीत की तैयारी! जानकर लोग खुशी से झूम उठेंगे।
SIR 2025: पश्चिम बंगाल सहित पूरे देश के 12 राज्यों में वोटर सूची का गहन संशोधन (एसआईआर) आरंभ हो गया है। इसके चलते दक्षिण से उत्तर तक विरोध प्रदर्शन के स्वर उठने लगे हैं। पश्चिम बंगाल के हकीमपुर सीमा पर अवैध बांग्लादेशियों की एक बड़ी भीड़ देखी जा रही है। एसआईआर 2025 के भय के चलते ये लोग अपनी इच्छा से बीएसएफ के जवानों से बांग्लादेश जाने की अपील कर रहे हैं। यह दृश्य केवल हकीमपुर सीमा पर नहीं, बल्कि दक्षिण बंगाल और उत्तर बंगाल समेत कई सीमावर्ती क्षेत्रों में भी देखने को मिल रहा है। इससे संकेत मिल रहा है कि आगामी विधानसभा चुनावों में ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
दूसरी ओर, बीजेपी खेमे में उत्साह का माहौल है। यह 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के ठीक पहले हो रहा है। बीजेपी ने अपनी राजनीतिक स्थिति को मजबूत होने का दावा करना शुरू कर दिया है। बिहार चुनाव के बाद, भारतीय जनता पार्टी के नेता अब पश्चिम बंगाल में जीत का आश्वासन दे रहे हैं। इसके पीछे की वजह जानने के लिए इस समाचार को अंत तक पढ़ना उचित है।
क्या ममता बनर्जी के हाथ से सत्ता का नियंत्रण छिन सकता है? – SIR 2025
बिहार विधानसभा चुनाव के परिणाम, भारतीय जनता पार्टी के लिए एक नई रणनीति का निर्माण कर रहे हैं। यही कारण है कि बीजेपी ने मार्च-अप्रैल 2026 में होने वाले पश्चिम बंगाल चुनावों में जीत का दावा करना शुरू कर दिया है। इस बीच, ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के प्रति चिंता कम होने का कोई संकेत नहीं है। पश्चिम बंगाल में रह रहे अवैध प्रवासियों का पलायन, जो हकीमपुर सीमा, दक्षिण बंगाल और उत्तर बंगाल समेत विभिन्न सीमाओं पर एसआईआर के भय से वापस बांग्लादेश लौट रहे हैं, ममता बनर्जी के मतदान आधार को घटित कर सकता है।
हकीमपुर सीमा पर मिले अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों का कहना है कि उन्हें मतदाता सूची में बड़ी संख्या में बदलाव का भय है और वे किसी न किसी तरीके से पश्चिम बंगाल से भागने का प्रयास कर रहे हैं। सीमा पर स्थित अवैध बांग्लादेशियों का कहना है कि वे गरीबी और उचित दस्तावेजों की कमी के कारण यहाँ आए थे। अब जब बंगाल में एसआईआर 2025 चल रहा है, तो वापस लौटना एक बेहतर विकल्प लग रहा है।
उनमें से एक का कहना है कि उन्होंने बिचौलियों से आधार, राशन कार्ड और वोटर कार्ड जैसे दस्तावेज प्राप्त किए थे। अब इन पुराने दस्तावेजों को वोटर सूची के गहन संशोधन 2025 में पुनः सत्यापित किया जा रहा है, इसलिए लोग पूछताछ और हिरासत से बचने के लिए अपनी इच्छानुसार बांग्लादेश लौटने का प्रयास कर रहे हैं। इसका स्पष्ट मतलब है कि पश्चिम बंगाल में अवैध प्रवासियों की संख्या बहुत अधिक है, और राज्य की सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस ने हमेशा उनकी सहायता की है। अब चुनाव आयोग की कड़ी कार्रवाई ने ममता बनर्जी सरकार की कानून व्यवस्था की असली तस्वीर उजागर कर दी है।
बिहार के बाद बंगाल में भाजपा को क्या लाभ मिलेगा? – एसआईआर 2025
2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में, भारतीय जनता पार्टी और नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड ने सफलतापूर्वक गठबंधन को जीवंत किया है। बिहार में कभी पारंपरिक वोट बैंक माने जाने वाला आधार बिखर चुका है, जिससे कई नए उदाहरण सामने आए हैं। जाति के समीकरण को देखें तो एनडीए भी वहाँ मजबूती से कायम है।
यह जान लेना आवश्यक है कि राष्ट्रीय जनता दल, कांग्रेस और अन्य राजनीतिक दल जो वर्षों से बिहार के एमवाय वोट बैंक पर नजर रखे हुए थे, 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में वह समीकरण ध्वस्त हो गया है। इसलिए, पश्चिम बंगाल का चुनाव जीतना अब भाजपा के लिए कोई बड़ी चुनौती नहीं रह गया है, खासकर तब जब बंगाल में ममता बनर्जी के अवैध मतदाता एसआईआर 2025 के भय के कारण बांग्लादेश भागने को विवश हैं। इस दृष्टिकोण से, पश्चिम बंगाल, जो लंबे समय से बदलाव और विकास की राह देख रहा है, भाजपा को सत्ता की चाबी सौंप सकता है।
देश
‘केजरीवाल भ्रष्ट नहीं है…’, मीडिया के सामने फूट-फूटकर रोए Arvind Kejriwal; क्लीन चिट मिलते ही दिया वायरल बयान
आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को कथित शराब नीति मामले में बड़ी राहत मिली है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों से बरी कर दिया है। फैसले के बाद मीडिया से बात करते हुए केजरीवाल भावुक हो गए।
भावुक हुए केजरीवाल
उन्होंने कहा, “हमने पहले ही कहा था कि सच्चाई की जीत होगी। आज सच की जीत हुई है। मुझे भारतीय न्याय प्रणाली पर पूरा भरोसा था कि न्याय जरूर मिलेगा।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनकी पार्टी को राजनीतिक रूप से निशाना बनाया गया और झूठे आरोपों के जरिए बड़े नेताओं को जेल भेजा गया।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी, CBI के सबूतों पर सवाल
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि जांच एजेंसी आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त और ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सकी। चार्जशीट में भी कई खामियां पाई गईं और किसी गवाह या दस्तावेज से आरोप पुष्ट नहीं हुए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिना ठोस प्रमाण के केवल आरोपों के आधार पर किसी के खिलाफ मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। निष्पक्ष सुनवाई के लिए निष्पक्ष जांच जरूरी है, लेकिन इस मामले में अभियोजन पक्ष अपना केस साबित करने में विफल रहा।
‘कोई आपराधिक साजिश साबित नहीं’
अदालत ने यह भी कहा कि सीबीआई द्वारा लगाए गए आरोपों में आपराधिक साजिश का कोई ठोस आधार नहीं मिला। न तो केजरीवाल और न ही सिसोदिया के खिलाफ प्रत्यक्ष सबूत पेश किए जा सके। इन्हीं कारणों से कोर्ट ने दोनों नेताओं को बरी करने का आदेश दिया। फैसले के बाद ‘आप’ कार्यकर्ताओं ने इसे न्याय और सच्चाई की जीत बताया।
देश
शराब घोटाले में AAP को राहत, केजरीवाल-सिसोदिया पर आरोप साबित करने में नाकाम रही CBI
दिल्ली के कथित आबकारी नीति मामले में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को बड़ी राहत मिली है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने दोनों नेताओं को आरोपों से मुक्त कर दिया है। अदालत ने कहा कि जांच एजेंसियां उनके खिलाफ मुकदमा चलाने लायक पर्याप्त और ठोस सबूत पेश करने में विफल रहीं। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सीबीआई द्वारा लगाए गए आरोपों में आपराधिक षड्यंत्र का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला। फैसले के साथ ही मामले में नामजद अन्य कई आरोपियों को भी राहत मिली। केजरीवाल और सिसोदिया व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित हुए, जबकि कुछ अन्य आरोपी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए।
कोर्ट ने जांच पर उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत ने अभियोजन पक्ष के तर्कों की विस्तार से समीक्षा की। कोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसियां नेताओं को सीधे तौर पर कथित घोटाले से जोड़ने वाले साक्ष्य पेश नहीं कर सकीं। केवल आरोपों के आधार पर किसी के खिलाफ मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि निष्पक्ष सुनवाई के लिए निष्पक्ष जांच अनिवार्य है और इस मामले में प्रॉसिक्यूशन अपना पक्ष साबित करने में असफल रहा।
2021-22 की आबकारी नीति से जुड़ा था मामला
यह पूरा मामला दिल्ली सरकार की 2021-22 की नई आबकारी नीति से संबंधित था। विपक्षी दलों और जांच एजेंसियों का आरोप था कि इस नीति में भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और कार्टेलाइजेशन हुआ, जिससे सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचा। जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा की गई थी। आरोप था कि नीति कुछ चुनिंदा शराब कारोबारियों को लाभ पहुंचाने के लिए बनाई गई और इसके बदले कथित तौर पर रिश्वत ली गई। यह मामला आम आदमी पार्टी के लिए बड़ा राजनीतिक संकट बना था और कई नेताओं को जेल भी जाना पड़ा था। हालांकि, अब अदालत के फैसले के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं ने इसे ‘सत्य की जीत’ बताया है।
देश
PM Modi बने डिजिटल दुनिया के ‘बादशाह’, इंस्टाग्राम पर 100M का आंकड़ा पार कर रचा इतिहास
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को सोशल मीडिया पर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। उन्होंने इंस्टाग्राम पर 100 मिलियन (10 करोड़) फॉलोअर्स का आंकड़ा पार कर लिया है। इसके साथ ही वे दुनिया के पहले ऐसे नेता बन गए हैं, जिनके इंस्टाग्राम पर 100 मिलियन से अधिक फॉलोअर्स हैं। साल 2014 में इंस्टाग्राम से जुड़ने वाले प्रधानमंत्री मोदी के फॉलोअर्स की संख्या कई वैश्विक नेताओं से कहीं आगे निकल चुकी है।
वैश्विक नेताओं से आगे पीएम मोदी
इंस्टाग्राम फॉलोअर्स के मामले में पीएम मोदी, Donald Trump से भी काफी आगे हैं। ट्रंप के 43.2 मिलियन फॉलोअर्स हैं, जो मोदी के मुकाबले आधे से भी कम हैं।
सूची में अन्य नेताओं की स्थिति इस प्रकार है:
Prabowo Subianto – 15 मिलियन
Luiz Inácio Lula da Silva – 14.4 मिलियन
Recep Tayyip Erdoğan – 11.6 मिलियन
Javier Milei – 6.4 मिलियन
भारत में भी सबसे आगे
देश के भीतर भी इंस्टाग्राम पर पीएम मोदी का दबदबा कायम है। दूसरे स्थान पर Yogi Adityanath हैं, जिनके 16.1 मिलियन फॉलोअर्स हैं।तीसरे नंबर पर Rahul Gandhi हैं, जिनके 12.6 मिलियन फॉलोअर्स हैं। बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी के इजरायल के दो दिवसीय आधिकारिक दौरे के दौरान उनके फॉलोअर्स की संख्या में और तेजी से वृद्धि हुई।
इजरायल की संसद में मिला सर्वोच्च सम्मान
अपने इजरायल दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी को वहां की संसद ने सर्वोच्च सम्मान से नवाजा। यह सम्मान भारत और इजरायल के रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने में उनके योगदान के लिए दिया गया। भाषण के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सांसदों से बातचीत की। इस दौरान इजरायली सांसदों ने उनके साथ सेल्फी और तस्वीरें भी लीं। उनके संबोधन के दौरान संसद में उन्हें स्टैंडिंग ओवेशन भी मिला।
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