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ईरान के सिक्योरिटी चीफ लारिजानी की मौत का दावा, इजरायल के हमले से बिगड़े हालात

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इजरायल के रक्षा मंत्री ने दावा किया है कि ईरान पर किए गए ताजा हवाई हमले में सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रमुख अली लारिजानी मारे गए हैं। इससे पहले इजरायली डिफेंस फोर्स (IDF) ने भी बताया था कि उसने ईरान में बड़े पैमाने पर एयरस्ट्राइक की, जिसमें लारिजानी मुख्य निशाने पर थे। हालांकि, इस दावे पर अब तक ईरान की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

अन्य नेताओं और ठिकानों पर भी हमला

इजरायल ने दावा किया है कि उसने तेहरान में मौजूद फलस्तीनी इस्लामिक जिहाद के नेता अकरम अल-अजूरी और कई अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को भी निशाना बनाया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये सभी गाजा और वेस्ट बैंक में सक्रिय नेटवर्क से जुड़े थे और ईरान में छिपे हुए थे।

कई शहरों में बड़े पैमाने पर एयरस्ट्राइक

इजरायली वायुसेना ने तेहरान समेत ईरान के कई शहरों में सैन्य ठिकानों पर दर्जनों मिसाइल और बम गिराए। कमांड सेंटर, ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल स्टोरेज, एयर डिफेंस सिस्टम। इन हमलों में शिराज और तबरीज जैसे शहर भी प्रभावित बताए जा रहे हैं। इजरायल का दावा है कि उसने ईरान के हवाई क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत कर ली है।

पहले ही बढ़ा हुआ था तनाव

हमले से ठीक एक दिन पहले अली लारिजानी ने मुस्लिम देशों को संबोधित करते हुए अमेरिका और इजरायल के खिलाफ एकजुट रहने की अपील की थी। उन्होंने इस संघर्ष को “अमेरिका-इजरायल बनाम ईरान और रेजिस्टेंस फोर्सेज” की लड़ाई बताया था।

मिडिल ईस्ट में बढ़ा खतरा

हालांकि, ईरान ने अब तक इन हमलों या लारिजानी की मौत की पुष्टि नहीं की है। लेकिन इन दावों के बाद पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ गया है और हालात युद्ध जैसे बनते नजर आ रहे हैं। अब सबकी नजर ईरान की प्रतिक्रिया पर टिकी है—क्या यह टकराव बड़े युद्ध का रूप लेगा या कूटनीति से हालात संभल पाएंगे?

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दुबई एयरपोर्ट पर ड्रोन हमला! उड़ानें बंद, 19 भारतीयों समेत 35 गिरफ्तार

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ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते युद्ध के बीच संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में भी तनाव बढ़ गया है। सोमवार को दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास ड्रोन हमले की घटना सामने आने के बाद एहतियातन उड़ानों का संचालन अस्थायी रूप से रोक दिया गया। अधिकारियों के अनुसार ड्रोन हमले के कारण एयरपोर्ट की सीमा के पास आग लग गई थी, जिसे आपातकालीन सेवाओं ने तुरंत बुझा दिया। यात्रियों और कर्मचारियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हवाई अड्डे के परिचालन को कुछ समय के लिए निलंबित कर दिया गया।

भ्रामक वीडियो फैलाने पर 35 लोगों पर कार्रवाई

क्षेत्रीय तनाव के बीच यूएई प्रशासन ने सोशल मीडिया पर भ्रामक और मनगढ़ंत वीडियो क्लिप साझा करने के आरोप में 19 भारतीय नागरिकों समेत कुल 35 लोगों के खिलाफ गिरफ्तारी के आदेश जारी किए हैं। यूएई की आधिकारिक समाचार एजेंसी अमीरात समाचार एजेंसी (डब्ल्यूएएम) के मुताबिक इन सभी आरोपियों को त्वरित सुनवाई के लिए अदालत में पेश किया जाएगा।

नई सूची में 17 भारतीय शामिल

जारी की गई ताजा सूची में विभिन्न देशों के 25 लोग शामिल हैं, जिनमें 17 भारतीय नागरिक बताए गए हैं। यह सूची शनिवार को घोषित किए गए 10 आरोपियों से अलग है, जिनमें दो भारतीय पहले ही शामिल थे।

डिजिटल निगरानी के बाद हुई कार्रवाई

यूएई के अटॉर्नी जनरल डॉ. हमाद सैफ अल शम्सी के अनुसार यह कार्रवाई डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कड़ी निगरानी के बाद की गई है। जांच में पाया गया कि आरोपी तीन अलग-अलग समूहों में काम कर रहे थे। इनमें से कुछ लोग मौजूदा घटनाओं से जुड़े वास्तविक वीडियो पोस्ट कर रहे थे, कुछ एआई की मदद से नकली वीडियो बना रहे थे, जबकि कुछ ऐसे देश के सैन्य अभियान का प्रचार कर रहे थे जो इस संघर्ष में शामिल है।

यात्रियों को एयरलाइनों से अपडेट लेने की सलाह

दुबई नागरिक उड्डयन प्राधिकरण ने बयान जारी कर कहा कि उड़ानों का निलंबन पूरी तरह सुरक्षा के मद्देनजर किया गया है। प्राधिकरण ने यात्रियों को सलाह दी है कि वे अपनी उड़ानों से जुड़ी ताजा जानकारी के लिए संबंधित एयरलाइनों से संपर्क करें और आधिकारिक चैनलों से जारी अपडेट पर नजर रखें।

क्षेत्रीय तनाव से विमान सेवाएं प्रभावित

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण क्षेत्रीय विमान सेवाओं पर पहले से ही असर पड़ रहा है। इससे पहले भी दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और अल मकतूम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उड़ानों का संचालन प्रभावित हुआ था। उस दौरान पूरे क्षेत्र में 1,800 से अधिक उड़ानें रद्द करनी पड़ी थीं। दुबई से होकर यात्रा करने वाले भारतीय यात्रियों समेत सभी यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे एयरलाइन की वेबसाइट या मोबाइल एप के जरिए अपनी उड़ान की अद्यतन जानकारी जरूर जांच लें।

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जंग की आहट से बदला दुबई का चेहरा… खाली पड़े बीच और मॉल, देश छोड़ रहे अमीर विदेशी; मजदूर वर्ग फंसा

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ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी युद्ध ने खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ा दी है, जिसका असर दुबई पर भी साफ दिखाई दे रहा है। कभी दुनिया के सबसे सुरक्षित और चमकदार शहरों में गिने जाने वाले दुबई की रफ्तार अब धीमी पड़ गई है। विदेशी निवासी और पर्यटक बड़ी संख्या में शहर छोड़ चुके हैं, जिसके कारण बीच, पार्टी पूल, बीच क्लब और रेस्तरां सूने नजर आ रहे हैं। जहां पहले पर्यटकों और इन्फ्लुएंसर्स की भीड़ रहती थी, वहां अब सन्नाटा पसरा है। शहर में फिलहाल मुख्य रूप से स्थानीय मजदूर वर्ग और कुछ निवासी ही दिखाई दे रहे हैं, जो सामान्य कामकाज जारी रखने की कोशिश कर रहे हैं।

ईरान के पलटवार से खाड़ी में बढ़ा तनाव

रिपोर्ट्स के अनुसार 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले किए जाने के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। इसके तहत खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। यूएई के अबू धाबी और अन्य इलाकों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों की मौजूदगी के कारण ईरान ने यहां ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इन हमलों ने पूरे क्षेत्र में डर और अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है।

एयर डिफेंस ने कई हमले रोके

सूत्रों के मुताबिक, पिछले दो हफ्तों में ईरान ने यूएई और दुबई की ओर बड़ी संख्या में ड्रोन और मिसाइलें दागीं। यूएई की एयर डिफेंस प्रणाली ने अधिकांश हमलों को रोक लिया, लेकिन कुछ जगहों पर गिरते मलबे से नुकसान की खबरें सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि दुबई के कुछ प्रतिष्ठित इलाकों और इमारतों को भी नुकसान पहुंचा। दुबई एयरपोर्ट के पास ड्रोन गिरने से कुछ लोग घायल हुए और कुछ समय के लिए उड़ानों को रोकना पड़ा।

अमीर विदेशी निवासी शहर छोड़ रहे

अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार दुबई में रहने वाले हजारों विदेशी नागरिक और पर्यटक शहर छोड़ चुके हैं। स्प्रिंग ब्रेक के बावजूद पश्चिमी देशों के कई परिवार अपने बच्चों के साथ वापस लौट गए हैं। बीच क्लब, होटल और रेस्तरां में अब खाली सन लाउंजर्स दिखाई दे रहे हैं, जबकि पहले इन जगहों पर भीड़ रहती थी। कई लोगों का कहना है कि रोजमर्रा का जीवन सामान्य दिखता है, लेकिन आसमान में फ्लैश, शेल्टर अलर्ट और गिरते मलबे की खबरें माहौल बदल देती हैं।

चार्टर फ्लाइट से पलायन, एयरपोर्ट पर भीड़

रिपोर्ट्स के अनुसार कई अमीर विदेशी निवासी भारी रकम देकर चार्टर फ्लाइट्स के जरिए दुबई छोड़ रहे हैं। अचानक शहर छोड़ने की जल्दबाजी में कुछ लोग अपने पालतू जानवरों तक को पीछे छोड़ गए। उड़ानों की संख्या सीमित होने के कारण एयरपोर्ट पर भी भीड़ देखने को मिली। अमेरिका ने अपने नागरिकों को निकालने के लिए विशेष चार्टर उड़ानें भी शुरू की हैं।

पर्यटन उद्योग को भारी नुकसान

मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध का असर पर्यटन उद्योग पर भी पड़ा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक क्षेत्र के पर्यटन सेक्टर को रोजाना करोड़ों डॉलर का नुकसान हो रहा है। जुमेराह बीच रेजीडेंस, दुबई मॉल और अन्य लोकप्रिय पर्यटन स्थल, जहां पहले भारी भीड़ रहती थी, अब काफी हद तक खाली नजर आ रहे हैं। दुनिया का सबसे बड़ा फेरिस व्हील ऐन दुबई भी फिलहाल बंद पड़ा है।

मजदूर वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित

इस पूरे संकट का सबसे बड़ा असर दक्षिण एशियाई देशों से आए मजदूरों पर पड़ा है। भारत, पाकिस्तान, नेपाल और बांग्लादेश से आए लाखों ब्लू-कॉलर वर्कर, टैक्सी ड्राइवर और होटल कर्मचारी दुबई में ही फंसे हुए हैं। कामकाज धीमा पड़ने से उनकी आय प्रभावित हुई है और उड़ानों के किराये बढ़ जाने से अपने देश लौटना भी मुश्किल हो गया है।

भारतीय नागरिकों की वापसी

इन हालात के बीच भारत सरकार और एयरलाइंस की मदद से बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों को सुरक्षित वापस लाया गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार 1 से 7 मार्च के बीच 52,000 से अधिक भारतीय नागरिक यूएई और खाड़ी देशों से भारत लौट चुके हैं।

अफवाह फैलाने पर सख्त कार्रवाई

यूएई सरकार ने एयर डिफेंस सिस्टम को मजबूत करते हुए नागरिकों को सुरक्षा का भरोसा दिया है। साथ ही प्रशासन ने चेतावनी दी है कि हमलों से जुड़ी तस्वीरें या वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई हो सकती है। अब तक अफवाह फैलाने के आरोप में कई लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया जा चुका है, जिनमें एक ब्रिटिश पर्यटक भी शामिल है। ब्रिटिश दूतावास ने भी अपने नागरिकों को यूएई के सख्त कानूनों का पालन करने की सलाह दी है।

हालात पूरी तरह सामान्य नहीं

फिलहाल दुबई की स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं मानी जा रही है, हालांकि बड़े पैमाने पर जनहानि की खबर नहीं है। शहर की रफ्तार जरूर धीमी हुई है, लेकिन स्थानीय निवासी और मजदूर वर्ग के साथ जीवन किसी तरह आगे बढ़ रहा है। इस पूरे घटनाक्रम का असर केवल खाड़ी क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि तेल की कीमतों, उड़ानों और वैश्विक पर्यटन उद्योग पर भी इसका असर देखने को मिल रहा है।

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ईरान संकट से पाकिस्तान में आर्थिक झटका, पेट्रोल 321 रुपये लीटर; स्कूल बंद और ऑफिस सीमित

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ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद शुरू हुए अमेरिका-इजराइल-ईरान संघर्ष का असर अब पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में भी दिखाई देने लगा है। इलाके में आर्थिक हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं और आम लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

पेट्रोल 321 रुपये प्रति लीटर के पार

युद्ध के कारण तेल की आपूर्ति प्रभावित होने से गिलगित-बाल्टिस्तान में पेट्रोल की कीमतों में भारी उछाल आया है। हाल ही में पेट्रोल के दाम में करीब 55 रुपये की बढ़ोतरी हुई है, जिसके बाद इसकी कीमत 321 रुपये प्रति लीटर से भी अधिक हो गई है। पेट्रोल महंगा होने से माल ढुलाई की लागत तेजी से बढ़ गई है। इसका सीधा असर रोजमर्रा की जरूरत की चीजों पर पड़ रहा है और आटा, चीनी तथा सब्जियों जैसी बुनियादी वस्तुओं के दाम भी तेजी से बढ़ गए हैं। सामाजिक कार्यकर्ता शफका अली इंकलाबी का कहना है कि यह स्थिति गरीब और मध्यम वर्ग के लिए लगभग “आर्थिक मौत” जैसी बनती जा रही है।

सरकार ने लागू किया ‘वॉर ऑस्टेरिटी प्लान’

ईंधन की भारी कमी और बढ़ती कीमतों को देखते हुए पाकिस्तान सरकार ने ‘वॉर ऑस्टेरिटी प्लान’ लागू कर दिया है। इसके तहत पूरे पाकिस्तान और गिलगित-बाल्टिस्तान में स्कूलों को दो सप्ताह के लिए बंद कर दिया गया है। शिक्षा को ऑनलाइन माध्यम से जारी रखने की कोशिश की जा रही है, लेकिन क्षेत्र में कमजोर इंटरनेट कनेक्टिविटी इसके रास्ते में बड़ी बाधा बन रही है। इसके अलावा ईंधन बचाने के लिए सरकारी दफ्तरों में कर्मचारियों को सिर्फ चार दिन ही कार्यालय आने के निर्देश दिए गए हैं, जबकि कई जगह वर्क फ्रॉम होम (WFH) की व्यवस्था लागू की गई है।

खामेनेई की मौत के बाद विरोध प्रदर्शन

आयतुल्लाह खामेनेई की मृत्यु के बाद पाकिस्तान के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन भी देखने को मिले हैं। कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पें हुई हैं। स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए प्रशासन ने गिलगित और स्कर्दू जैसे प्रमुख शहरों में समय-समय पर कर्फ्यू लगाया है और कई इलाकों में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी गई हैं।

खाद्य संकट का खतरा

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि युद्ध जल्द खत्म नहीं हुआ तो गिलगित-बाल्टिस्तान में खाद्य संकट पैदा हो सकता है। क्षेत्र की दुर्गम भौगोलिक स्थिति के कारण यहां आवश्यक सामान मुख्य रूप से ट्रकों के जरिए पहुंचता है। पेट्रोल की कीमतों में तेज वृद्धि इस आपूर्ति प्रणाली को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है और इससे खाद्य आपूर्ति बाधित होने का खतरा बढ़ गया है।

सऊदी अरब दौरे पर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री

इन हालात के बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ गुरुवार को सऊदी अरब की एक संक्षिप्त आधिकारिक यात्रा पर रवाना हुए। पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच पिछले साल सितंबर में पारस्परिक रक्षा समझौता हुआ था, जिसके तहत किसी तीसरे देश के हमले की स्थिति में दोनों देशों ने एक-दूसरे की रक्षा करने की प्रतिबद्धता जताई थी। हालांकि अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमले शुरू किए जाने और ईरान द्वारा खाड़ी देशों में जवाबी कार्रवाई के बाद क्षेत्रीय समीकरण बदल गए हैं। ईरान के साथ पाकिस्तान के करीबी संबंध और भौगोलिक निकटता को देखते हुए अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या पाकिस्तान सऊदी अरब के प्रति अपने रक्षा दायित्वों को निभा पाएगा, या फिर वह इस जटिल भू-राजनीतिक स्थिति में संतुलन बनाने की कोशिश करेगा।

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