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भारत के कोने-कोने में मौजूद हैं चमत्कारी मंदिर, जाते ही पूरी होती है हर मुराद; क्या आपको पता हैं इनके नाम?

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भारत को यूं ही मंदिरों की भूमि नहीं कहा जाता। यहां ऐसे कई प्राचीन मंदिर हैं, जिन्हें चमत्कारिक, रहस्यमय और जाग्रत माना जाता है। मान्यता है कि इन मंदिरों में सच्चे मन से की गई प्रार्थना जरूर पूरी होती है। खास बात यह है कि इनमें से कुछ मंदिर ऐसे भी हैं, जिनके रहस्यों और शक्तियों को समझने की कोशिश आज भी वैज्ञानिक कर रहे हैं। इस श्रृंखला में हम आपको ऐसे ही कुछ खास मंदिरों के बारे में बता रहे हैं, जहां शायद आप पहले कभी नहीं गए होंगे।

कसारदेवी मंदिर, अल्मोड़ा (उत्तराखंड)

उत्तराखंड के अल्मोड़ा से लगभग 10 किलोमीटर दूर अल्मोड़ा-बिंसर मार्ग पर स्थित कसारदेवी मंदिर अपनी आध्यात्मिक ऊर्जा और अद्भुत शांति के लिए जाना जाता है। मान्यता है कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं की मुरादें जल्दी पूरी होती हैं। इस स्थान पर पहुंचते ही एक अलग तरह की मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है। इस क्षेत्र में पाषाण युग के अवशेष भी मिले हैं, जिससे इसकी प्राचीनता का अंदाजा लगाया जा सकता है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह स्थान एक शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र में स्थित है। कहा जाता है कि नासा के वैज्ञानिकों ने कसारदेवी को दक्षिण अमेरिका के माचू-पिच्चू और इंग्लैंड के स्टोनहेंज के साथ विशेष चुंबकीय शक्ति केंद्र के रूप में चिन्हित किया है।

कहा जाता है कि कसारदेवी क्षेत्र वैन एलेन बेल्ट का हिस्सा है, जहां पृथ्वी के भीतर विशाल भू-चुंबकीय पिंड मौजूद है। यही कारण है कि यहां ध्यान और साधना करने वालों को गहरी मानसिक शांति मिलती है। स्वामी विवेकानंद भी 1890 में यहां ध्यान के लिए आए थे। आज भी देश-विदेश से लोग यहां आध्यात्मिक शांति की तलाश में पहुंचते हैं।

जगन्नाथ मंदिर, पुरी (ओडिशा)

ओडिशा के समुद्री तट पर स्थित पुरी हिंदुओं की सात पवित्र नगरियों में से एक है। यहां स्थित जगन्नाथ मंदिर भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण को समर्पित है और चार धामों में से एक माना जाता है। इसे धरती का वैकुंठ भी कहा जाता है। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है। मंदिर से जुड़े कई चमत्कार आज भी लोगों को आश्चर्यचकित करते हैं। रथ यात्रा, महाप्रसाद और मंदिर की रहस्यमयी परंपराएं इसे विश्वभर में खास बनाती हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि यहां दर्शन मात्र से मन को अपार शांति मिलती है।

बालाजी हनुमान मंदिर, मेहंदीपुर (राजस्थान)

राजस्थान के दौसा जिले में स्थित मेहंदीपुर बालाजी मंदिर पूरे देश में अपनी चमत्कारी शक्तियों के लिए प्रसिद्ध है। यहां हनुमानजी का बाल स्वरूप पूजित है, जिसकी आकृति एक विशाल चट्टान में स्वतः प्रकट हुई मानी जाती है। मान्यता है कि यहां आने से नकारात्मक शक्तियों, बाधाओं और मानसिक कष्टों से मुक्ति मिलती है। मंदिर में हनुमानजी के साथ शिव और भैरव की भी पूजा होती है। कहा जाता है कि यह मंदिर करीब एक हजार साल पुराना है और यहां की शक्ति अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है।

अमरनाथ गुफा, जम्मू और कश्मीर

हिमालय की गोद में स्थित अमरनाथ गुफा भगवान शिव को समर्पित है। यहां प्राकृतिक रूप से बनने वाला बर्फ का शिवलिंग इसे दुनिया के सबसे रहस्यमय तीर्थस्थलों में से एक बनाता है। खास बात यह है कि यहां शिवलिंग के साथ गणेश और पार्वती की हिम आकृतियां भी स्वयं निर्मित होती हैं। मान्यता है कि इसी गुफा में भगवान शिव ने माता पार्वती को अमरकथा सुनाई थी, जिससे इस स्थान का नाम अमरनाथ पड़ा। इसे मोक्ष और अमरत्व का प्रतीक माना जाता है। यहां दर्शन करना अत्यंत पुण्यदायक माना जाता है।

शिर्डी साईं मंदिर, महाराष्ट्र

महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में स्थित शिर्डी साईं बाबा का मंदिर विश्व के सबसे प्रसिद्ध तीर्थस्थलों में से एक है। साईं बाबा की शिक्षाएं जाति-धर्म से ऊपर हैं, यही वजह है कि यहां हर वर्ग और हर देश के लोग आते हैं। मान्यता है कि साईं बाबा अपने भक्तों की हर पुकार सुनते हैं। यहां रोज़ाना हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं, जबकि त्योहारों पर यह संख्या लाखों में पहुंच जाती है। शिर्डी आस्था, विश्वास और चमत्कारों का प्रतीक है।

कालभैरव मंदिर, उज्जैन (मध्यप्रदेश)

उज्जैन स्थित कालभैरव मंदिर अपने अनोखे स्वरूप के लिए जाना जाता है। यहां भगवान कालभैरव को मदिरा का भोग लगाया जाता है और मान्यता है कि मूर्ति स्वयं मदिरा ग्रहण करती है। यह मंदिर वाम मार्गी परंपरा से जुड़ा हुआ है और इसे लगभग 6,000 साल पुराना माना जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां आने से शनि दोष और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।

वैष्णो देवी, जम्मू और कश्मीर

त्रिकुटा पर्वत पर स्थित माता वैष्णो देवी का मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। मान्यता है कि माता अपने भक्तों को कभी खाली हाथ नहीं लौटातीं। सदियों से यह गुफा शक्ति, भक्ति और विश्वास का प्रतीक रही है। आज न केवल भारत, बल्कि विदेशों से भी भक्त माता के दर्शन के लिए आते हैं।

रामेश्वरम, तमिलनाडु

चार धामों में से एक रामेश्वरम भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में शामिल है। मान्यता है कि यहां भगवान राम ने शिवलिंग की स्थापना की थी। इस शिवलिंग के दर्शन से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।यह स्थान धार्मिक महत्व के साथ-साथ ऐतिहासिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

तिरुपति बालाजी मंदिर, आंध्र प्रदेश

तिरुमाला पर्वत पर स्थित भगवान वेंकटेश्वर का मंदिर दुनिया के सबसे अधिक दर्शन किए जाने वाले मंदिरों में से एक है। यहां हर साल करोड़ों श्रद्धालु आते हैं। मान्यता है कि भगवान बालाजी भक्तों की हर मनोकामना पूरी करते हैं। सप्तगिरी की सातवीं पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर आस्था, समर्पण और विश्वास का अद्भुत केंद्र है।

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ब्रेन-डेड मरीज की पत्नी बनना चाहती है मां, HC का ऐतिहासिक कदम; दी खास अनुमति

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केरल हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश देते हुए अस्पताल को निर्देश दिया है कि वह ‘ब्रेन-डेड’ घोषित व्यक्ति के स्पर्म को निकालकर सुरक्षित रखे। इस फैसले से पत्नी को भविष्य में सहायक प्रजनन तकनीक (ART) के जरिए मां बनने का रास्ता मिल सकता है।

क्या है क्रायोप्रिजर्वेशन?

क्रायोप्रिजर्वेशन एक वैज्ञानिक तकनीक है, जिसमें स्पर्म, कोशिकाएं या भ्रूण को माइनस 196 डिग्री सेल्सियस या उससे भी कम तापमान पर लिक्विड नाइट्रोजन में संरक्षित किया जाता है। इससे जैविक नमूनों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

पत्नी की याचिका पर मिली राहत

यह मामला ब्रेन-डेड व्यक्ति की पत्नी द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। जस्टिस एम.बी. स्नेहलता ने सुनवाई के दौरान कोझिकोड के बेबी मेमोरियल अस्पताल को निर्देश दिया कि वह किसी मान्यता प्राप्त ART क्लिनिक के जरिए स्पर्म निकालकर उसे सुरक्षित रखे।

कोर्ट की सख्त शर्त

अदालत ने स्पष्ट किया कि असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (रेगुलेशन) एक्ट, 2021 के तहत फिलहाल सिर्फ स्पर्म निकालने और सुरक्षित रखने की अनुमति दी गई है। बिना कोर्ट की मंजूरी के आगे कोई प्रजनन प्रक्रिया नहीं की जा सकेगी।

बीमारी के बाद हुई गंभीर हालत

पत्नी के मुताबिक, उनके पति को पहले दो हफ्तों तक चिकनपॉक्स रहा, जिसके बाद उन्हें ‘सेरेब्रल वेनस थ्रोम्बोसिस’ (दिमाग की नसों में खून का थक्का) हो गया। हालत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां वे ब्रेन-डेड घोषित कर दिए गए और फिलहाल वेंटिलेटर पर हैं।

सहमति पर उठे कानूनी सवाल

ART कानून की धारा 22 के अनुसार, स्पर्म उपयोग के लिए संबंधित व्यक्ति की लिखित सहमति जरूरी होती है। लेकिन पत्नी ने अदालत को बताया कि मौजूदा स्थिति में पति से सहमति लेना संभव नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर देरी हुई तो स्पर्म सुरक्षित रखने का मौका हमेशा के लिए खत्म हो सकता है, जिससे उन्हें अपूरणीय नुकसान होगा।

अगली सुनवाई

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अदालत ने पत्नी को अंतरिम राहत दी है। अब इस केस की अगली सुनवाई 7 अप्रैल को होगी। यह फैसला सिर्फ एक केस नहीं, बल्कि कानून, नैतिकता और आधुनिक चिकित्सा के बीच संतुलन का एक अहम उदाहरण बन सकता है।

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संसद परिसर में अचानक बजा सुरक्षा अलार्म, CISF अलर्ट; क्या है हड़कंप का कारण?

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सोमवार को संसद भवन परिसर में अचानक सुरक्षा अलार्म बजने से कुछ समय के लिए स्थिति चिंताजनक हो गई। अलार्म बजते ही वहां तैनात सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड में आ गईं और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की क्विक रिएक्शन टीम (QRT) तुरंत मौके पर पहुंच गई।

तेज हवा से गिरा बूम बैरियर

सूत्रों के मुताबिक, तेज हवाओं के कारण संसद परिसर के एक प्रवेश द्वार पर लगा बूम बैरियर अचानक नीचे गिर गया। इससे सुरक्षा सेंसर सक्रिय हो गए और ऑटोमेटिक अलार्म बजने लगा। सुरक्षा व्यवस्था के तहत सिस्टम को ऐसा लगा कि कोई संदिग्ध वाहन या वस्तु परिसर में प्रवेश करने की कोशिश कर रही है, जिसके कारण अलार्म एक्टिव हो गया।

विजय चौक के पास हुआ घटनाक्रम

यह घटना संसद भवन परिसर के उस गेट पर हुई जो विजय चौक के पास स्थित है। अलार्म बजने के बाद कुछ समय के लिए वहां वाहनों की आवाजाही रोक दी गई थी। हालांकि शुरुआती जांच में किसी भी तरह के सुरक्षा खतरे की पुष्टि नहीं हुई और स्थिति स्पष्ट होने के बाद वाहनों की आवाजाही फिर से सामान्य कर दी गई।

तकनीकी गड़बड़ी की भी जांच

प्रारंभिक जांच में माना जा रहा है कि तेज हवा के कारण बूम बैरियर गिरा। हालांकि सुरक्षा एजेंसियां यह भी जांच कर रही हैं कि कहीं ऐसा इसलिए तो नहीं हुआ कि उस समय प्रवेश कर रही किसी गाड़ी के स्टिकर को सुरक्षा प्रणाली पढ़ नहीं पाई हो।

CISF के जिम्मे है संसद की सुरक्षा

गौरतलब है कि मई 2024 से संसद भवन परिसर की सुरक्षा केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के जिम्मे है। दिसंबर 2023 में हुए सुरक्षा उल्लंघन के बाद यह जिम्मेदारी CISF को सौंपी गई थी। गृह मंत्रालय के अधीन काम करने वाली इस अर्धसैनिक बल के करीब 3,300 जवान संसद परिसर की सुरक्षा में तैनात हैं, जिनमें फायर फाइटर्स और डिजास्टर रिस्पॉन्स टीम भी शामिल हैं।

2023 में भी हुई थी बड़ी सुरक्षा चूक

13 दिसंबर 2023 को संसद की सुरक्षा में बड़ी सेंध लगी थी। उस दिन लोकसभा की विजिटर गैलरी से सागर शर्मा और मनोरंजन डी सदन के अंदर कूद गए थे। उन्होंने पीले रंग का धुआं फैलाने के लिए स्मोक कैन का इस्तेमाल किया और नारे लगाते हुए सदन में अफरा-तफरी मचा दी थी। वहीं संसद भवन के बाहर भी उनके कुछ साथियों ने स्मोक गन से धुआं फैलाने की कोशिश की थी। सुरक्षा बलों ने तुरंत सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। इस मामले में यूएपीए (UAPA) जैसे कड़े आतंकवाद विरोधी कानून के तहत केस दर्ज किया गया था।

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एंटरटेनमेंट

Saand Ki Aankh वाली शूटर दादी प्रकाशी तोमर की फटी नाक की नस, नोएडा के अस्पताल में हुईं भर्ती

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उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के जौहड़ी गांव की विश्वविख्यात शूटर दादी प्रकाशी तोमर की तबीयत अचानक बिगड़ गई है। बताया जा रहा है कि उनकी नाक की नस फटने के कारण काफी देर तक खून बहता रहा, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। परिवार के लोगों ने उन्हें नोएडा के कैलाश अस्पताल में भर्ती कराया है, जहां डॉक्टर उनकी देखरेख कर रहे हैं।

रात में अचानक नाक से बहने लगा खून

शूटर दादी के बेटे रामबीर सिंह ने बताया कि शनिवार रात करीब दो बजे अचानक उनकी नाक से खून बहना शुरू हो गया। काफी देर तक खून नहीं रुका और वह बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ीं। इसके बाद परिवार वाले उन्हें तुरंत बड़ौत के एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक इलाज किया। कुछ समय के लिए आराम मिलने के बाद उन्हें घर ले आया गया।

सुबह फिर बिगड़ी हालत

रविवार सुबह उनकी नाक से दोबारा खून बहने लगा। इसके बाद परिवार के लोग उन्हें फिर से बड़ौत के अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन इस बार भी खून रुक नहीं रहा था। डॉक्टरों ने स्थिति को देखते हुए उन्हें बेहतर इलाज के लिए दिल्ली-एनसीआर रेफर कर दिया। इसके बाद उनकी बेटी और अंतरराष्ट्रीय शूटर सीमा तोमर उन्हें नोएडा के कैलाश अस्पताल लेकर पहुंचीं, जहां उनका इलाज जारी है।

फिलहाल हालत स्थिर

सीमा तोमर ने बताया कि डॉक्टर लगातार उनकी निगरानी कर रहे हैं और फिलहाल शूटर दादी की हालत स्थिर बताई जा रही है।

‘सांड की आंख’ से मिली थी नई पहचान

गौरतलब है कि शूटर दादी प्रकाशी तोमर के जीवन संघर्ष पर बॉलीवुड फिल्म ‘सांड की आंख’ भी बन चुकी है। इस फिल्म में अभिनेत्री तापसी पन्नू ने उनका किरदार निभाया था। दादी की तबीयत खराब होने की खबर सामने आने के बाद उनके प्रशंसक और शुभचिंतक उनकी सलामती की दुआ कर रहे हैं।

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