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बाढ़ में 1.40 करोड़ रुपये की सरकारी योजना पर उठे सवाल, पुल निर्माण में घटिया सामग्री का आरोप

प्रकाशित: 15-07-2026 | 05:05 AM
बाढ़ में 1.40 करोड़ रुपये की सरकारी योजना पर उठे सवाल, पुल निर्माण में घटिया सामग्री का आरोप
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बाढ़ अनुमंडल के पंडारक प्रखंड अंतर्गत परसावां पंचायत में बिहार सरकार के लघु सिंचाई विभाग द्वारा करीब 1 करोड़ 40 लाख रुपये की लागत से 12 किलोमीटर लंबी पैन उड़ाही (नहर सफाई एवं खुदाई) का कार्य कराया जा रहा है। इस योजना में ग्रामीणों ने ठेकेदार पर मनमानी और भारी अनियमितता बरतने का आरोप लगाया है।

मानक से कम खुदाई का आरोप

ग्रामीणों का कहना है कि पैन उड़ाही के दौरान सरकार द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप खुदाई नहीं की गई। कई स्थानों पर निर्धारित गहराई और चौड़ाई से काफी कम कार्य किया गया है। उनका दावा है कि यदि पूरे कार्य की तकनीकी जांच कराई जाए तो बड़े पैमाने पर अनियमितता सामने आएगी।

शिकायत के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई

ग्रामीणों के अनुसार, इस मामले की शिकायत ठेकेदार और उसके मुंशी से कई बार की गई, लेकिन किसी ने कोई ध्यान नहीं दिया। इसके बाद मामले की जानकारी बाढ़ अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) और पंडारक अंचल अधिकारी (सीओ) को दी गई।

मुख्य जल निकासी मार्ग बंद होने से बढ़ी परेशानी

ग्रामीणों का कहना है कि परसावां गांव के पानी की मुख्य निकासी का रास्ता बंद होने से बरसात के दिनों में जलजमाव की समस्या गंभीर हो गई है। सूचना मिलने पर पंडारक अंचल अधिकारी मौके पर पहुंचे और निरीक्षण किया। जांच के बाद उन्होंने गांव के मुख्य जल निकासी मार्ग पर पैन उड़ाही का कार्य जल्द पूरा कराने का निर्देश भी दिया।

आदेश के बावजूद काम बंद होने का आरोप

ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासनिक निर्देश मिलने के बावजूद ठेकेदार ने कुछ लोगों के बहकावे में आकर उस हिस्से में काम बंद कर दिया। उनका यह भी कहना है कि योजना की निर्धारित समय-सीमा भी समाप्त हो चुकी है, फिर भी कार्य अधूरा पड़ा हुआ है।

पुल निर्माण में भी भ्रष्टाचार का आरोप

ग्रामीणों के मुताबिक, इस योजना के तहत 12 स्थानों पर पुल निर्माण होना था। उनका आरोप है कि अब तक बने पुलों के निर्माण में भी व्यापक अनियमितता हुई है। वर्तमान में जिन पुलों का निर्माण चल रहा है, उनमें चार नंबर ईंट और बेहद निम्न गुणवत्ता की निर्माण सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है।

घटिया सामग्री से ढलाई करने का आरोप

ग्रामीणों का कहना है कि पुल के निचले स्ट्रक्चर में अच्छी गुणवत्ता वाली सीमेंट और मानक के अनुरूप सरिया का उपयोग किया जाना चाहिए था, लेकिन इसके बजाय घटिया सीमेंट और निम्न स्तर की सामग्री से ढलाई की गई है। उनका दावा है कि यदि गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो निर्माण कार्य की वास्तविक स्थिति सामने आ जाएगी।

एक साल भी नहीं टिकेगा पुल: ग्रामीण

ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि घटिया निर्माण सामग्री के कारण ये पुल एक वर्ष के भीतर ही क्षतिग्रस्त हो सकते हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते जांच और कार्रवाई नहीं हुई तो बिहार सरकार की करोड़ों रुपये की राशि व्यर्थ चली जाएगी।

ठेकेदार से संपर्क नहीं हो सका

इस संबंध में ठेकेदार से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।

 
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