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कटिहार ट्रेन हत्याकांड का खुलासा: पत्नी, उसके कथित प्रेमी और एक आरोपी गिरफ्तार, 34 दिन बाद सुलझी मर्डर मिस्ट्री

प्रकाशित: 15-07-2026 | 11:12 AM
कटिहार ट्रेन हत्याकांड का खुलासा: पत्नी, उसके कथित प्रेमी और एक आरोपी गिरफ्तार, 34 दिन बाद सुलझी मर्डर मिस्ट्री
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कटिहार में सामने आए चर्चित ट्रेन हत्याकांड का पुलिस ने 34 दिनों बाद खुलासा करने का दावा किया है। जम्मू में तैनात विद्युतकर्मी देवकुमार गुंजन की 11 जून को मानसी रेल थाना क्षेत्र के बदलाघाट के पास चलती ट्रेन में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। गंभीर रूप से घायल देवकुमार की इलाज के दौरान मौत हो गई थी।

शुरुआत में अज्ञात अपराधियों के खिलाफ दर्ज हुआ था मामला

घटना के बाद रेल पुलिस ने अज्ञात अपराधियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। शुरुआती दौर में यह एक ब्लाइंड मर्डर केस था। इसके बाद पुलिस ने तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्यों, मोबाइल लोकेशन तथा कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया।

जांच में पत्नी और कथित प्रेमी पर साजिश का आरोप

रेल पुलिस के अनुसार, जांच के दौरान मृतक की पत्नी समिता कुमारी, जो सुपौल में मोटर वाहन निरीक्षक (MVI) के पद पर कार्यरत हैं, और जहानाबाद निवासी अजीत कुमार के बीच कथित प्रेम संबंध की जानकारी सामने आई। पुलिस का दावा है कि दोनों ने मिलकर देवकुमार की हत्या की साजिश रची।

सुपारी देकर हत्या कराने का आरोप

पुलिस के मुताबिक, हत्या को अंजाम देने के लिए राजू कुमार उर्फ धीरज को कथित रूप से सुपारी दी गई। आरोप है कि उसने चलती ट्रेन में देवकुमार को बेहद करीब से गोली मारकर वारदात को अंजाम दिया।

एसआईटी और एसटीएफ की संयुक्त कार्रवाई

रेल एसपी के नेतृत्व में गठित एसआईटी और एसटीएफ की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए समिता कुमारी, अजीत कुमार और राजू कुमार उर्फ धीरज को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस का कहना है कि पूछताछ के दौरान आरोपियों से महत्वपूर्ण जानकारी मिली है। मामले से जुड़े मोबाइल फोन और सिम कार्ड भी बरामद किए गए हैं।

अन्य आरोपियों की तलाश जारी

पुलिस ने बताया कि इस मामले में अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। फरार लोगों की तलाश जारी है और जांच अभी भी चल रही है।

जांच पूरी होने के बाद होगा आगे का कानूनी निर्णय

पुलिस का कहना है कि मामले में एकत्र किए गए साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। आरोपियों के खिलाफ अदालत में मामला विचाराधीन होगा और अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।

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