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रिलिजन

घर में रखा टूटा शीशा कर सकता है बर्बाद! नकारात्मकता और बिमारियों को देता है बुलावा

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घर की सजावट में शीशे (मिरर) का खास महत्व होता है। यह न सिर्फ घर को बड़ा और रोशन दिखाता है, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने का भी प्रतीक माना जाता है। लेकिन अगर वही शीशा टूटा हुआ हो, तो वास्तु और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार यह कई तरह की परेशानियों को जन्म दे सकता है।

क्यों अशुभ माना जाता है टूटा शीशा?

वास्तु शास्त्र के मुताबिक, टूटा हुआ शीशा घर में नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है। कहा जाता है कि इससे परिवार के सदस्यों के बीच तनाव बढ़ सकता है और घर का माहौल बिगड़ सकता है। कई लोग मानते हैं कि टूटे शीशे से मानसिक अशांति और अनचाही बाधाएं भी आती हैं।

सेहत पर भी पड़ सकता है असर

टूटा हुआ कांच सिर्फ ऊर्जा के लिहाज से ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी खतरनाक हो सकता है। इसके नुकीले किनारे चोट का कारण बन सकते हैं। खासकर अगर घर में बच्चे हों, तो यह और भी जोखिम भरा हो जाता है। इसके अलावा, दरारों में धूल और गंदगी जमा होकर एलर्जी या संक्रमण का खतरा बढ़ा सकती है।

आर्थिक नुकसान का संकेत?

कुछ पारंपरिक मान्यताओं में यह भी कहा गया है कि घर में टूटा शीशा रखना आर्थिक हानि का संकेत देता है। इससे घर में धन का प्रवाह रुक सकता है और अनावश्यक खर्च बढ़ सकते हैं। हालांकि यह मान्यता आस्था पर आधारित है, लेकिन बहुत से लोग इसे गंभीरता से लेते हैं।

क्या करें अगर शीशा टूट जाए?

-टूटे हुए शीशे को तुरंत घर से बाहर कर दें।

-उसे अखबार या मोटे कपड़े में लपेटकर सुरक्षित तरीके से फेंकें।

-जहां शीशा लगा था, वहां की जगह को अच्छी तरह साफ करें।

-कोशिश करें कि घर में हमेशा साफ और बिना दरार वाला शीशा ही लगाएं।

सकारात्मक ऊर्जा के लिए क्या ध्यान रखें?

-शीशा हमेशा साफ रखें।

बे-ड के ठीक सामने या दरवाजे के सामने शीशा लगाने से बचें (वास्तु अनुसार)।

-प्राकृतिक रोशनी को बढ़ाने के लिए सही दिशा में शीशा लगाएं।

आखिरकार, चाहे आप वास्तु में विश्वास करते हों या नहीं, टूटा हुआ शीशा घर में रखना सुरक्षा की दृष्टि से ठीक नहीं है। बेहतर है कि इसे तुरंत हटा दिया जाए, ताकि घर में सकारात्मकता और सुरक्षित वातावरण बना रहे।

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रिलिजन

Holi 2026: चंद्र ग्रहण के साए में होगी होली, जानें होलिका दहन का सही मुहूर्त और तिथि

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साल 2026 की होली इस बार खास रहने वाली है, क्योंकि फाल्गुन पूर्णिमा के दिन पूर्ण चंद्र ग्रहण लग रहा है। वाराणसी के प्रचलित हृषीकेश पंचांग और ज्योतिषाचार्य पं. नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार 2 मार्च 2026 (सोमवार) को होलिका दहन, 3 मार्च 2026 (मंगलवार) को पूर्ण चंद्र ग्रहण और 4 मार्च 2026 (बुधवार) को रंगों वाली होली यानी धुलेंडी मनाई जाएगी। भद्रा और सूतक के कारण इस वर्ष मुहूर्त का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी गई है।

2 मार्च 2026: होलिका दहन — भद्रा के ‘पुच्छ काल’ में शुभ समय

शास्त्रों के अनुसार होलिका दहन पूर्णिमा तिथि में और भद्रा रहित समय में करना श्रेष्ठ माना जाता है।

तिथि प्रारंभ: 2 मार्च को शाम 5:18 बजे चतुर्दशी समाप्त होकर पूर्णिमा तिथि शुरू होगी।

भद्रा काल: पूर्णिमा लगते ही भद्रा प्रारंभ होगी और 3 मार्च की सुबह 4:56 बजे तक रहेगी।

जब पूरी रात भद्रा हो, तब शास्त्र ‘भद्रा पुच्छ’ यानी भद्रा के अंतिम भाग में दहन की अनुमति देते हैं। पुच्छ काल को दोषमुक्त और शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त माना गया है।

होलिका दहन का श्रेष्ठ मुहूर्त:

रात 12:50 बजे से 2:02 बजे तक (3 मार्च की भोर) — कुल 1 घंटा 12 मिनट। परंपरा के अनुसार यही समय सबसे उत्तम माना गया है। दिन में या भद्रा के मुख काल में दहन से बचने की सलाह दी जाती है।

3 मार्च 2026: पूर्ण (खग्रास) चंद्र ग्रहण और सूतक काल

3 मार्च 2026 को फाल्गुन पूर्णिमा पर वर्ष का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण लगेगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार यह ग्रहण सिंह राशि में होगा।

-ग्रहण प्रारंभ (भारतीय समय): शाम 6:17 बजे

-मुख्य ग्रहण अवधि: दोपहर लगभग 3:20 बजे से शुरू होकर शाम तक

-दृश्यता: भारत के अधिकांश हिस्सों सहित पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के कुछ क्षेत्रों में दिखाई देने की संभावना

सूतक काल और धार्मिक परंपराएं

परंपरागत मान्यता के अनुसार चंद्र ग्रहण का सूतक लगभग 9 घंटे पहले से प्रभावी माना जाता है। इस आधार पर 3 मार्च की सुबह लगभग 6:20 बजे से सूतक आरंभ होकर ग्रहण समाप्ति (लगभग शाम 6:46 बजे) तक रहेगा। इस अवधि में कई मंदिरों में कपाट बंद रखने और शुभ कार्य टालने की परंपरा है। ग्रहण काल में मंत्र-जाप, ध्यान और मानसिक पूजा को श्रेष्ठ माना जाता है। चूंकि 3 मार्च ग्रहण के प्रभाव में रहेगा, इसलिए रंगों का उत्सव इस दिन नहीं मनाया जाएगा।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण

वैज्ञानिक रूप से चंद्र ग्रहण पृथ्वी की छाया के चंद्रमा पर पड़ने से होता है। इसे एक खगोलीय घटना के रूप में भी देखा जाता है। आस्था और विज्ञान दोनों के संतुलन के साथ इसे समझना उचित है।

4 मार्च 2026: रंगों वाली होली (धुलेंडी)

रंगभरी होली चैत्र मास की कृष्ण प्रतिपदा को मनाई जाती है।

-तिथि स्थिति: 4 मार्च (बुधवार) को सूर्योदय के समय प्रतिपदा तिथि विद्यमान रहेगी।

-उत्सव: ग्रहण समाप्ति और शुद्धिकरण के बाद 4 मार्च को पूरे देश में अबीर-गुलाल के साथ होली खेली जाएगी।

इसी कारण 2026 में रंगों की होली 3 मार्च के बजाय 4 मार्च को मनाई जाएगी।

राशियों पर संभावित प्रभाव

चूंकि ग्रहण सिंह राशि में होगा, इसलिए कुछ राशियों पर इसका प्रभाव अधिक माना गया है।

शुभ संकेत: वृषभ, मिथुन, तुला, मकर

-करियर में उन्नति के अवसर

-धन लाभ और अटके कार्यों में गति

सावधानी: मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक

सिंह: स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें, थकान संभव

मेष/कर्क: अनावश्यक विवाद और खर्च से बचें

वृश्चिक: मानसिक संतुलन और दिनचर्या पर ध्यान दें

मध्यम फल: धनु, कुंभ, मीन

पारिवारिक मामलों में धैर्य और संवाद लाभकारी रहेगा

डिस्क्लेमर

इस लेख में दी गई ज्योतिषीय जानकारियों की पूर्ण सत्यता का दावा नहीं किया जाता। विस्तृत और व्यक्तिगत मार्गदर्शन के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।

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एस्ट्रोलॉजी

घर में ये पौधा रखा तो बारिश की तरह बरसेगा पैसा! बस करनी होगी खास देखभाल

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अक्सर लोग घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा के लिए खास पौधे लगाते हैं। वास्तु और फेंगशुई मान्यताओं के अनुसार कुछ पौधे ऐसे माने जाते हैं जो धन आकर्षित करते हैं। इन्हीं में सबसे लोकप्रिय है मनी प्लांट।

क्यों खास है मनी प्लांट?

मनी प्लांट को घर में आर्थिक समृद्धि और तरक्की का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि सही दिशा और सही देखभाल के साथ रखा गया मनी प्लांट घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाता है और आर्थिक परेशानियां कम करता है। हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह आस्था और परंपरा से जुड़ी मान्यता है, वैज्ञानिक रूप से धनवर्षा का कोई प्रमाण नहीं है। लेकिन हरियाली घर के माहौल को जरूर बेहतर बनाती है।

किस दिशा में रखें?

वास्तु के अनुसार मनी प्लांट को दक्षिण-पूर्व दिशा में रखना शुभ माना जाता है। इसे जमीन पर न रखें, बल्कि स्टैंड या टेबल पर रखें। बाथरूम या बहुत अंधेरी जगह में रखने से बचें।

कैसे करें खास देखभाल?

धूप और रोशनी: मनी प्लांट को सीधी धूप की जरूरत नहीं होती। हल्की या अप्रत्यक्ष रोशनी में यह अच्छी तरह बढ़ता है।

पानी की मात्रा: मिट्टी हल्की नम रहे, लेकिन ज्यादा पानी भरकर न रखें। जड़ों में पानी जमा होने से पौधा खराब हो सकता है।

पत्तियों की सफाई: हफ्ते में एक बार पत्तियों को हल्के गीले कपड़े से साफ करें। इससे पौधा ताजा दिखेगा और तेजी से बढ़ेगा।

सूखी पत्तियां हटाएं: अगर पत्तियां पीली या सूखी दिखें तो उन्हें तुरंत काट दें।

बोतल में उगाना: मनी प्लांट को पानी से भरी कांच की बोतल में भी उगाया जा सकता है। ऐसे में हर 7–10 दिन में पानी बदलना जरूरी है।

इन बातों का रखें ध्यान

-पौधा मुरझाया या सूखा न रहने दें।

-किसी से मनी प्लांट चुराकर लाने की बजाय खुद खरीदें या उपहार में लें।

-पौधे को प्यार और नियमित देखभाल दें, तभी वह अच्छी तरह बढ़ेगा।

निष्कर्ष

घर में मनी प्लांट लगाने से भले ही सीधे पैसे न बरसें, लेकिन यह सकारात्मक माहौल, शांति और हरियाली जरूर लाता है। अच्छी ऊर्जा और सुकून भरा वातावरण ही तरक्की की राह खोलता है।

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रिलिजन

रात में नाखून काटने से क्या घर की सुख-समृद्धि होती है नष्ट? बुजुर्ग बताते हैं अशुभ

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घर के बड़े-बुजुर्ग अक्सर रात में नाखून काटने से मना करते हैं। उनके अनुसार सूर्यास्त के बाद नाखून काटना अशुभ माना जाता है। पारंपरिक मान्यता है कि ऐसा करने से घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और मां लक्ष्मी नाराज हो जाती हैं, जिससे आर्थिक तंगी या दरिद्रता आ सकती है। कई लोग यह भी मानते हैं कि रात में नाखून काटने से घर की सुख-समृद्धि प्रभावित होती है। लेकिन क्या इसके पीछे सिर्फ धार्मिक मान्यता है, या कोई व्यावहारिक कारण भी छिपा है? आइए इसे विस्तार से समझते हैं।

धार्मिक मान्यताएं क्या कहती हैं?

-सूर्यास्त के बाद नाखून काटना अशुभ माना जाता है।

-मान्यता है कि इससे मां लक्ष्मी नाराज होकर घर छोड़ देती हैं।

-कुछ लोग इसे वास्तु और ज्योतिष से जोड़कर दरिद्रता का संकेत मानते हैं।

-रात को शरीर के अंग काटना या नुकसान पहुंचाना नकारात्मक ऊर्जा से जुड़ा माना गया है। ये मान्यताएं पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही हैं और आज भी कई परिवारों में इनका पालन किया जाता है।

क्या है इसका वैज्ञानिक या व्यावहारिक कारण?

-असल में, पुराने समय में बिजली की व्यवस्था नहीं होती थी, इसलिए रात में रोशनी कम होती थी।

-नेल कटर उपलब्ध नहीं थे, लोग ब्लेड या धारदार औजार से नाखून काटते थे।

-कम रोशनी में उंगलियां कटने या चोट लगने का खतरा ज्यादा रहता था।

-कटे हुए नाखून अंधेरे में बिखर सकते थे, जो बाद में पैरों में चुभ सकते थे। इन्हीं व्यावहारिक कारणों से रात में नाखून काटने से मना किया जाता था। समय के साथ यह सावधानी एक धार्मिक मान्यता का रूप ले गई।

स्वच्छता से जुड़ा पहलू

रात में काटे गए नाखून घर में इधर-उधर गिर सकते हैं। अगर ठीक से साफ न किए जाएं, तो:

-पैर में चुभ सकते हैं

-घर में गंदगी फैल सकती है

-संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए साफ-सफाई के लिहाज से भी दिन के उजाले में नाखून काटना बेहतर माना गया।

हालांकि, आज के समय में पर्याप्त रोशनी उपलब्ध है। सुरक्षित नेल कटर इस्तेमाल किए जाते हैं। साथ ही सफाई की सुविधाएं बेहतर हैं। ऐसे में वैज्ञानिक दृष्टि से रात में नाखून काटना हानिकारक नहीं माना जाता। हालांकि, यदि कोई व्यक्ति पारंपरिक मान्यताओं का सम्मान करते हुए दिन में ही नाखून काटना पसंद करता है, तो यह उसकी व्यक्तिगत आस्था का विषय है।

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