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पॉलिटिक्स

कर्नाटक की राजनीति में उठापटक तेज! डीके शिवकुमार की कप्तानी के खिलाफ विधायक क्या सिद्धारमैया गुट को पीछे छोड़ पाएंगे? समीकरण को जानें।

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कर्नाटक राजनीतिक स्थिति: बंगलूरू से लेकर बेलगावी और धारवाड़ तक राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसका प्रमुख कारण नेतृत्व परिवर्तन के संबंध में चल रहीं चर्चाएं हैं। डीके शिवकुमार के समर्थक विधायक अपने नेता की नियुक्ति के लिए डटे हुए हैं। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया किसी भी स्थिति में अपनी पदवी छोडऩे को तैयार नहीं हैं। इस बीच, विधायकों का एक समूह अपनी मांगों पर अड़ा हुआ है।

कर्नाटक पॉलिटिक्स में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चल रही यह राजनीतिक जंग अब दो गुटों के बीच टकराव का कारण बन रही है। हालांकि, डीके शिवकुमार के पास विधायकों की कम संख्या होने की सूचना है, जिसके कारण वे आलाकमान पर प्रभावशाली ढंग से दबाव नहीं बना पा रहे हैं। अब सवाल यह है कि क्या डिप्टी सीएम का समूह सिद्धारमैया को पराजित कर पाएगा? आइए, वर्तमान समीकरण पर चर्चा करते हुए आपके सवालों का समाधान ढूंढने का प्रयास करते हैं।

नेतृत्व परिवर्तन को लेकर कर्नाटक राजनीति में चर्चाएं गर्म!

कांग्रेस एक बार फिर कर्नाटक में राजनीतिक संकट का सामना कर रही है। दरअसल, सत्ता परिवर्तन के सूत्र को लेकर कई विधायक डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाने की मांग कर रहे हैं। कहा जा रहा है कि 2023 में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद 2.5-2.5 वर्ष के मुख्यमंत्री बनाने का निर्णय लिया गया था। हालांकि, इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसी संदर्भ में विधायकों का एक समूह दिल्ली जाकर आलाकमान को संदेश पहुँचाने का प्रयास कर रहा है। इन सभी घटनाक्रमों के चलते कर्नाटक पॉलिटिक्स का तापमान बढ़ता नजर आ रहा है और चर्चाएं तेज हो गई हैं।

क्या डीके शिवकुमार की नियुक्ति पर अड़े विधायक सिद्धारमैया के दल को मात देंगे?

इस सवाल का उत्तर भविष्य में छिपा है। ऐसे में इस पर स्पष्ट रूप से कुछ कह पाना अभी संभव नहीं है। लेकिन यह जरूर है कि डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाने की मांग तेज हो चुकी है। विधायकों का एक समूह आलाकमान को सीधा नेतृत्व परिवर्तन का संदेश भेज रहा है। वहीं, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया किसी भी प्रकार के प्रस्ताव को ठुकराते हुए अपना कार्यकाल पूरा करने की बात कर रहे हैं। इससे पहले राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भी कांग्रेस के सामने नेतृत्व परिवर्तन की मांग उठ चुकी है।

हालांकि, दोनों स्थानों पर गहलोत और भूपेश बघेल अपनी पदवी बनाए रखने में सफल रहे थे। यही कारण है कि डीके शिवकुमार की नियुक्ति फिलहाल कमजोर पड़ती नज़र आती है। संभावना कम है कि उनके समूह के विधायक मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को पराजित कर पाएंगे। लेकिन राजनीति में किसी भी संभावना को नकारा नहीं जा सकता। ऐसे में कब क्या हो जाए, यह किसी को नहीं पता। फिलहाल सभी की नजर आलाकमान की स्थिति पर टिकी हुई है, जिसके बाद नेतृत्व परिवर्तन की राजनीतिक लड़ाई की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

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पॉलिटिक्स

‘दोषी कोई भी हो बख्शा नहीं जाएगा…’, CM भगवंत मान का बड़ा एक्शन! मंत्री लालजीत भुल्लर का इस्तीफा

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पंजाब की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कैबिनेट मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर से इस्तीफा ले लिया है, जिसे तुरंत स्वीकार भी कर लिया गया। सीएम मान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस फैसले की जानकारी दी। लालजीत सिंह भुल्लर, जो ट्रांसपोर्ट और जेल मंत्री थे, पर गंभीर आरोप लगे थे। बताया जा रहा है कि उन्होंने वेयरहाउस के जिला प्रबंधक (DM) गगनदीप सिंह को अपने घर बुलाकर मारपीट की। इस घटना से आहत होकर अधिकारी ने कथित तौर पर वीडियो बनाकर आत्महत्या कर ली। हालांकि, पूरे मामले की जांच अभी जारी है।

जांच के आदेश

मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने जांच की जिम्मेदारी चीफ सेक्रेटरी को सौंप दी है। सीएम ने स्पष्ट किया कि निष्पक्ष जांच के लिए मंत्री का पद से हटना जरूरी था, ताकि किसी भी तरह का दबाव न बने।

सीएम मान का सख्त संदेश

प्रेस वार्ता में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि कानून-व्यवस्था और ड्रग्स के मामलों में कोई समझौता नहीं होगा। दोषी चाहे कोई भी हो, सख्त कार्रवाई की जाएगी। किसी भी व्यक्ति की जान बेहद कीमती है और ऐसे मामलों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

विपक्ष ने भी उठाए सवाल

मंत्री के इस्तीफे से पहले ही विपक्ष ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया था। अकाली दल के नेता बिक्रम मजीठिया ने सोशल मीडिया पर भुल्लर के इस्तीफे की मांग की थी और उनके खिलाफ कार्रवाई की बात कही थी। वहीं, गगनदीप सिंह को अमृतसर के अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनके परिवार ने मारपीट के आरोप लगाए। अब इस पूरे मामले में जांच रिपोर्ट का इंतजार है। यह देखना अहम होगा कि जांच में क्या सामने आता है और आगे क्या कार्रवाई होती है।

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एंटरटेनमेंट

‘महिलाएं असहज महसूस करती हैं…’, कंगना का राहुल गांधी पर हमला; व्यवहार पर सवाल उठाते हुए कह डाला ‘टपोरी’

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अदाकारा और सांसद Kangana Ranaut ने Rahul Gandhi के संसद में आचरण को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। समाचार एजेंसी के मुताबिक, कंगना का कहना है कि राहुल गांधी के व्यवहार से महिला सांसद असहज महसूस करती हैं।

‘टपोरी जैसा व्यवहार’- कंगना का आरोप

कंगना से जब पूछा गया कि कुछ ब्यूरोक्रेट्स ने राहुल गांधी के व्यवहार पर सवाल उठाए हैं, तो उन्होंने कहा कि संसद जैसे गरिमामय स्थान पर ऐसा रवैया ठीक नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी बातचीत के दौरान बीच में टोकते हैं और अनुचित टिप्पणियां करते हैं, जिससे माहौल असहज हो जाता है।

प्रियंका गांधी की तारीफ

कंगना रनौत ने Priyanka Gandhi Vadra के व्यवहार की सराहना करते हुए कहा कि उनका आचरण संतुलित और शिष्ट है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को अपनी बहन से सीख लेनी चाहिए कि सार्वजनिक जीवन में कैसे व्यवहार किया जाता है।

सनातन पर भी रखा अपना पक्ष

इस दौरान कंगना रनौत ने सनातन धर्म को लेकर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि सनातन का अर्थ है—जिसका न कोई आदि है, न अंत। उनके अनुसार, सनातन शाश्वत सत्य है और बाकी धर्म अपेक्षाकृत नए हैं। कंगना रनौत के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर बहस तेज होने की संभावना है।

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पॉलिटिक्स

‘संसद से नरेंद्र, देश से सिलेंडर गायब…’, LPG संकट पर राहुल गांधी का PM Modi पर निशाना

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ईरान-इजरायल युद्ध के चलते देश में गहराते LPG संकट को लेकर गुरुवार को संसद भवन के बाहर विपक्षी दलों ने विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, द्रमुक सहित कई विपक्षी दलों के सांसद संसद के मकर द्वार के पास इकट्ठा हुए और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी प्रदर्शन में हिस्सा लिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला।

संसद के बाहर ‘मोदी जी एलपीजी’ के नारे

विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर के बाहर ‘मोदी जी एलपीजी’ के नारे लगाए। प्रदर्शन के दौरान कई सांसदों के हाथों में गैस सिलेंडर की आकृति वाली तख्तियां भी नजर आईं। विपक्ष का आरोप है कि सरकार अंतरराष्ट्रीय हालात के बीच देश में गैस संकट से निपटने में विफल रही है।

राहुल गांधी का पीएम मोदी पर तंज

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रदर्शन की तस्वीरें साझा करते हुए प्रधानमंत्री पर कटाक्ष किया। उन्होंने लिखा, “संसद से नरेंद्र गायब, देश से सिलेंडर गायब।”

मीडिया से बातचीत में क्या बोले राहुल गांधी?

संसद के बाहर मौजूद मीडिया से बात करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोगों से घबराने की जरूरत न होने की बात कह रहे हैं, लेकिन खुद अलग कारणों से चिंतित नजर आ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि पीएम मोदी अदाणी मामले और एप्सटीन फाइल को लेकर दबाव में हैं और इसी वजह से सदन के भीतर आने से बच रहे हैं।

LPG संकट पर पीएम मोदी की अपील

उधर, पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण देश में LPG की किल्लत की खबरों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को लोगों से घबराने की जरूरत न होने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि सरकार जनहित की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और लोगों से केवल सही और सत्यापित जानकारी साझा करने का आग्रह किया था।

युद्ध के असर से बढ़ी चिंता

मिडिल ईस्ट में चल रहे ईरान-इजरायल संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। इसी को लेकर देश में LPG सप्लाई और कीमतों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।

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