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ताज की गाथा: 11 करोड़ रुपये में बनी ‘द ताज गाथा’ ने स्थापित किया एक नया मील का पत्थर, बॉक्स ऑफिस और विश्व भर में 6 हफ्तों तक छाई रही।
ताज की कहानी: 31 अक्टूबर 2025 को प्रदर्शित हुई फिल्म ‘ताज की कहानी’ ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि विषय आकर्षक हो, तो सीमित बजट भी जबरदस्त सफलता दिला सकता है। केवल 11 करोड़ रुपये के खर्च में बनी इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर ऐसा प्रदर्शन किया है, जिसकी उम्मीद निर्माताओं को भी नहीं थी। छह सप्ताह तक सिनेमा में टिके रहना और 30 करोड़ रुपये से अधिक का वैश्विक संग्रह करना, अपने आप में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
6 हफ्ते तक स्थिर रही फिल्म
‘ताज की कहानी’ की सबसे बड़ी विशेषता इसकी विषयवस्तु है। यह फिल्म ताजमहल से जुड़े उन तथ्यों को सामने लाती है, जिन पर कम चर्चा होती है। ताजमहल को प्रेम का प्रतीक माना जाता है, लेकिन फिल्म एक नए दृष्टिकोण से इतिहास को देखने की कोशिश करती है। यही कारण है कि दर्शक इसे केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि एक विचारशीलता पर मजबूर करने वाले अनुभव के रूप में देख रहे हैं। आज के युग में, जब बड़े बजट और सितारों वाली फिल्में भी कुछ हफ्तों में सिनेमा से उतर जाती हैं, वहीं ‘ताज की कहानी’ का लगातार छह हफ्तों तक रहना प्रशंसनीय है। यह फिल्म बाहुबली जैसे भव्य प्रोजेक्ट्स या बड़े नामों के बीच अपनी पहचान बनाए रखने में सफल रही।
परेश रावल का उत्कृष्ट अभिनय
फिल्म में परेश रावल ने अपने पात्र को इतनी गंभीरता और सच्चाई के साथ निभाया है कि दर्शक उनसे जुड़ने लगते हैं। कई लोगों का मानना है कि यह उनके करियर की सबसे प्रभावी अदाकारी में से एक है। उनकी प्रतिभा ने कहानी को और भी गहराई दी और फिल्म के संदेश को मजबूती प्रदान की। तुषार अमरीश गोयल ने फिल्म में हर दृश्य का चुनाव सोच-समझकर किया है, जिससे फिल्म की गति बनी रहती है। निर्माता सीए सुरेश झा की विचारधारा और साहस भी सराहनीय है, जिन्होंने इस तरह के विषय पर फिल्म बनाने का खतरा उठाया।