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आजाद भारत समीक्षा: स्त्री क्रांतिकारियों के संघर्ष को कुशलता से प्रस्तुत करती फिल्म, निर्देशिका रूपा अय्यर का शानदार प्रयास
फिल्म समीक्षा: स्वतंत्र भारत
- अभिनेता: श्रेयस तलपड़े, सुरेश ओबेरॉय, रूपा अय्यर, इंदिरा तिवारी, डॉ. सुभाष चंद्र, प्रियांशु चटर्जी, सुचेंद्र प्रसाद
- निर्देशक: रूपा अय्यर
- निर्माता: रूपा अय्यर, जया गोपाल एबी, राजेंद्र राजन
- बैनर: इंडिया क्लासिक आर्ट्स, जी स्टूडियो
- शैली: देशभक्ति
- अवधि: 2 घंटे
- भाषा: हिंदी
- सेंसर: U/A
- रेटिंग: 3.5 स्टार्स
नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के अवसर पर रूपा अय्यर द्वारा निर्देशित ‘स्वतंत्र भारत’ एक ऐतिहासिक ड्रामा है, जो आजाद हिंद फौज की कहानी पर केंद्रित है। इस फिल्म में विशेष रूप से रानी झांसी रेजिमेंट की महिला इकाई पर ध्यान दिया गया है, और भारत की पहली महिला क्रांतिकारी नीरा आर्या की वास्तविक जीवन यात्रा को दर्शाया गया है, जिन्होंने स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया। फिल्म में दिखाया गया है कि नीरा आर्या आजाद हिंद फौज के साथ नेताजी सुभाष चंद्र बोस के सहयोगी थीं। नीरा ने अपने पति श्रीकांत को भी अंग्रेजों के कारनामों से बचाने के लिए मार डाला। यह फिल्म नेताजी की रणनीतियों और नीरा आर्या के साहसिक और भावुक सफर को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करती है।
रूपा अय्यर- श्रेयस तलपड़े ने दिए बेहतरीन प्रदर्शन
नीरा आर्या के किरदार में रूपा अय्यर ने शानदार एक्टिंग की है। उनके चेहरे के भाव, गुस्सा और दृढ़ता ने भूमिका को सशक्त बना दिया है। वह अंग्रेजों के अन्याय को सहकर भी हार नहीं मानतीं। हर दृश्य में रूपा पूरी तरह से अपने व्यक्तित्व में रंगी हुई नजर आती हैं। नेताजी सुभाष चंद्र बोस के रूप में श्रेयस तलपड़े का अभिनय भी उल्लेखनीय है। इस गंभीर भूमिका में उनकी बॉडी लैंग्वेज और चेहरे के भाव प्रभावी हैं। सरस्वती राजामणि के रूप में इंदिरा तिवारी का प्रदर्शन भी प्रशंसा योग्य है। वहीं छज्जूराम के किरदार में सुरेश ओबेरॉय ने अपने रोल को बखूबी निभाया है।
रूपा अय्यर की विस्तृत शोध
निर्देशन के क्षेत्र में रूपा अय्यर ने सफलता हासिल की है। एक अनजाने क्रांतिकारी पर फिल्म बनाना चुनौतीपूर्ण था, मगर उन्होंने गहरी परख और मेहनत के साथ इसे प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है। यह फिल्म वास्तविक घटनाओं पर आधारित है, फिर भी इसमें ऐसे रुख हैं जो दर्शकों को प्रभावित करते हैं। यह फिल्म देशभक्ति की भावना को जगाती है और कई दृश्य दिल को छू लेने वाले हैं। बैकग्राउंड म्यूजिक कहानी में गुंजायमान रहता है और संवाद भी दर्शकों के मन को छू जाते हैं।