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कर्नाटका राजनीति: ‘मुख्यमंत्री पद’ को लेकर चल रही साज़िश का हुआ खुलासा! डीके शिवकुमार के बाद सिद्धारमैया का सक्रिय मोर्चा, अगला कदम क्या होगा?

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कर्नाटका राजनीति: कांग्रेस के शासन वाले एक राज्य में नेता परिवर्तन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। यहां कर्नाटका का जिक्र है, जहां सीएम सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच कुर्सी की लड़ाई अब सार्वजनिक हो चुकी है। स्थिति यह है कि दोनों गुट खुलेआम मोर्चा संभाल रहे हैं।

डीके शिवकुमार के बयान के बाद सीएम सिद्धारमैया ने और भी तीखे शब्द कहकर इस खेल को और भी दिलचस्प बना दिया है। कुर्सी के लिए चल रही राजनीतिक लड़ाई के बीच सबकी नज़र अब आलाकमान पर है। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे लगातार बेंगलुरु में चल रही इस राजनीतिक उथल-पुथल को संभालने में जुटे हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कर्नाटका राजनीति में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर छिड़ी यह लड़ाई कब और कैसे खत्म होती है।

कर्नाटका में ‘सीएम कुर्सी’ को लेकर चल रहा राजनीतिक खेल अब खुलकर आ गया है!

पर्दे के पीछे चल रहे इस राजनीतिक खेल ने अब पूरी तरह से अपनी असलियत सामने ला दी है। कर्नाटका में नेतृत्व परिवर्तन की मांग अब तेजी से उठ रही है। डीके शिवकुमार ने अपने एक्स हैंडल से एक पोस्ट जारी किया, जिसमें कहा गया था कि “शब्द की शक्ति विश्व शक्ति है। दुनिया में सबसे बड़ी ताकत अपने वचन का पालन करना है।” यह सीएम कुर्सी के संदर्भ में किए गए वादे के पालन की ओर इशारा करता है।

इसके तुरंत बाद सीएम सिद्धारमैया ने एक जवाबी पोस्ट किया, जिसमें लिखा गया कि “एक शब्द तब तक शक्ति नहीं है जब तक वह लोगों के लिए दुनिया को बेहतर न बनाए।” इसे डीके शिवकुमार के लिए एक जवाब माना जा रहा था। इस पोस्ट में सिद्धारमैया ने अपने नेतृत्व में किए गए कार्यों को साझा करते हुए उपलब्धियों का उल्लेख किया है। दोनों नेताओं के इस आदान-प्रदान ने पर्दे के पीछे ‘सीएम कुर्सी’ को लेकर चल रहे खेल को उजागर किया है।

कांग्रेस शासित कर्नाटका राजनीति में आगे क्या होगा?

यह स्पष्ट है कि कर्नाटका में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चली यह राजनीतिक लड़ाई अब पूरी तरह से सामने आ चुकी है। नवंबर की 20 तारीख को सीएम सिद्धारमैया ने अपने कार्यकाल के दो साल पूरे कर लिए हैं। कथित तौर पर किए गए वादे के अनुसार, अब सीएम कुर्सी डीके शिवकुमार को सौंपी जानी चाहिए। हालाँकि, सिद्धारमैया अभी पद छोड़ने को राजी नहीं हैं।

स्थिति यह है कि डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया का सदस्यता एक-दूसरे के खिलाफ खुलकर कैम्पेन कर रहे हैं। इस सबके बीच पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे डैमेज कंट्रोल की परिस्थिति में नजर आ रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि राज्य में भ्रम दूर करने के लिए डीके शिवकुमार, सिद्धारमैया और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के बीच बैठक होगी। ऐसे में इस बैठक के परिणामस्वरूप ही यह पता चलेगा कि कांग्रेस शासित इस राज्य में क्या होने वाला है।

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