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गोल्डन ग्लोब अवार्ड्स: बिना नामांकन के भी बॉलीवुड प्रेमियों के लिए इस पुरस्कार का महत्व, जानें कब हासिल हुई थी भारत की पहली सफलता

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गोल्डन ग्लोब पुरस्कार: एंटरटेनमेंट उद्योग में गोल्डन ग्लोब पुरस्कारों का एक खास स्थान है और ये हर बार किसी न किसी कारण से चर्चा में रहते हैं। पिछली बार 2023 में नाटू नाटू गाने को सम्मानित किया गया था, जबकि इस बार इसके लिए नॉमिनेशन नहीं मिलने के बावजूद लोगों की रुचि बनी रहेगी। भारतीय दर्शकों के लिए गोल्डन ग्लोब पुरस्कारों का महत्व क्या है, यह जानने के लिए हम जनवरी में होने वाले इस कार्यक्रम की पहली उपलब्धि की बात करते हैं और यह क्यों खास है। इस साल कोई नॉमिनेशन नहीं मिला है।

गोल्डन ग्लोब पुरस्कारों में भारत की पहली और आखिरी उपलब्धि

1944 से शुरू हुए गोल्डन ग्लोब पुरस्कारों की बात करें तो भारत की पहली फिल्म “दो आंखें बारह हाथ” को यह सम्मान मिला था। 1957 में वी शांताराम की फिल्म को नॉमिनेशन मिला और सैमुअल गोल्ड ने अंतरराष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार दिया। आखिरी बार आरआरआर के गाने नाटू नाटू को विशेष सम्मान प्राप्त हुआ। उल्लेखनीय है कि एसएस राजामौली की फिल्म आरआरआर को 2 श्रेणियों में नॉमिनेशन मिला था, लेकिन बेस्ट ओरिजिनल सॉन्ग की श्रेणी में नाटू नाटू ने जबरदस्त पहचान बनाई।

प्रियंका चोपड़ा इस खास भूमिका में नज़र आएंगी

गोल्डन ग्लोब पुरस्कार 2026 की बात करें तो 83वें गोल्डन ग्लोब पुरस्कारों में भारत से किसी फिल्म को नॉमिनेशन नहीं मिला है, लेकिन प्रियंका चोपड़ा इस बार प्रेजेंटेटर के रूप में शामिल होंगी। उन्हें विजेताओं को पुरस्कार देने के लिए आमंत्रित किया गया है, जिससे यह भारतीय दर्शकों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।

गोल्डन ग्लोब पुरस्कार 2026 रविवार को प्रसारित होगा, लेकिन भारतीय इसे 12 जनवरी की सुबह 6 बजे देख सकेंगे। यह निश्चित रूप से प्रियंका चोपड़ा के प्रशंसकों के लिए खास मौका है क्योंकि उन्हें एक बार फिर वैश्विक कार्यक्रम का प्रतिनिधित्व करते हुए देखा जाएगा।

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