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तू मेरी मैं तेरा मैं तेरा तू मेरी: आध्यात्मिक अनुभव और समकालीन प्रेम कहानी का बेहतरीन संगम, कार्तिक और अनन्या की अदाकारी ने जीते दर्शकों के दिल
- फिल्म: तुम मेरी, मैं तुम्हारा
- कलाकार: कार्तिक आर्यन, अनन्या पांडे, नीना गुप्ता, जैकी श्रॉफ
- निर्देशक: समीर विद्वांस
- रेटिंग: 3.5
तुम मेरी, मैं तुम्हारा X समीक्षा: समीर विद्वांस की फिल्म ‘तुम मेरी, मैं तुम्हारा’ रिलीज के साथ ही सोशल मीडिया में छा गई। फिल्म के ट्रेलर को दर्शकों ने खूब सराहा था। कार्तिक आर्यन और अनन्या पांडे की केमिस्ट्री बहुत अच्छी लगती है। इसमें नीना गुप्ता और जैकी श्रॉफ भी हैं।
फिल्म की कहानी
‘तुम मेरी, मैं तुम्हारा’ की कहानी रे (कार्तिक आर्यन) और रूमी (अनन्या पांडे) के इर्द-गिर्द घूमती है। रे एक उदार एनआरआई शादी का आयोजक है, जो जिंदगी को हर पल जश्न मानता है। दूसरी ओर, रूमी एक गंभीर लेखिका है। क्रोएशिया की अद्भुत वादियों में उनकी मुलाकात कब दोस्ती से प्यार के रंग में रंग जाती है, ये उन्हें खुद भी पता नहीं चलता। असली संघर्ष तब सामने आता है, जब प्यार की परीक्षा जिंदगी की सच्चाइयों, पारिवारिक जिम्मेदारियों और एक-दूसरे की अपेक्षाओं से होती है।
कार्तिक का प्रभावी अभिनय, अनन्या की बारीकियों को समझने वाली उपस्थिति
कार्तिक आर्यन ने इस फिल्म में यह साबित किया है कि वे केवल कॉमेडी में ही नहीं अभिव्यक्त होते, बल्कि गहराई में भावनाओं को महसूस करने की कला भी अच्छी तरह जानते हैं। वहीं, रूमी के किरदार में अनन्या पांडे ने प्रशंसा योग्य ठहराव और परिपक्वता दिखाई है। इसके अलावा, नीना गुप्ता और जैकी श्रॉफ जैसे अनुभवी कलाकार फिल्म के भावनात्मक तत्व को और गहरा बनाते हैं। निर्देशक समीर विद्वांस ने इस बड़े प्रोजेक्ट को भी एक शांत स्वरूप में प्रस्तुत किया है। करण शर्मा की पटकथा छोटे-छोटे दृश्यों में गहरा संदेश पहुंचाने में सफल रहती है। अनिल मेहता की सिनेमैटोग्राफी क्रोएशिया की खूबसूरती को और आकर्षक बना देती है।
मजबूत पहलु और कमजोरियां
इस फिल्म का सबसे बड़ा बल इसका ताजा और सकारात्मक दृष्टिकोण है, जो रिश्तों को एक नए नजरिए से देखने की कोशिश करता है। कहानी में पुरुष पात्र को अपनी गलतियों को स्वीकारते हुए उनसे सीखने और संबंधों के लिए खुद में बदलाव लाने के लिए तैयार दिखाया गया है, जो हिंदी सिनेमा में एक सकारात्मक एवं सराहनीय पहल माना जा सकता है। हालांकि, फिल्म की शुरुआत कुछ धीमी रहती है और पटकथा को अपनी लय बनाने में थोड़ा समय लगता है।