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दिग्विजय सिंह: शशि थरूर के पदचिह्नों पर चलने वाले दिग्गी राजा! आरएसएस-बीजेपी की प्रशंसा ने आलाकमान के समक्ष खड़ी की चुनौतियाँ, क्या राहुल गांधी दे रहे हैं सलाह?

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दिग्विजय सिंह: चुनाव में निरंतर असफल हो रही कांग्रेस की स्थिति और अधिक गंभीर होती जा रही है। अंदरखाने उठ रही विरोध की बातें अब सार्वजनिक रूप से सामने आने लगी हैं। हालिया मामला मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के एक बयान से संबंधित है। सोनिया गांधी के समय में प्रभावशाली रहे दिग्विजय सिंह ने खुलकर आरएसएस और बीजेपी संगठन की सराहना की है।

दिग्गी राजा के इस रुख से पहले शशि थरूर भी कांग्रेस नेतृत्व और संगठन पर सवाल उठाते हुए पीएम मोदी और बीजेपी की प्रशंसा कर चुके हैं। यही कारण है कि दिग्विजय सिंह के शशि थरूर के मार्ग पर चलने की बात की जा रही है। बीजेपी और आरएसएस संगठन की सराहना कर पूर्व मुख्यमंत्री ने कांग्रेस आलाकमान की चुनौतियों को बढ़ा दिया है। सवाल उठ रहा है कि क्या वे राहुल गांधी को सुझाव दे रहे हैं?

आरएसएस-बीजेपी की सराहना कर दिग्विजय सिंह ने बढ़ाई आलाकमान की समस्याएँ!

वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने अपने एक्स पोस्ट के माध्यम से पार्टी नेतृत्व की कठिनाइयाँ बढ़ा दी हैं।

दिग्विजय सिंह के आधिकारिक एक्स अकाउंट से एक पोस्ट साझा की गई जिसमें लिखा गया है, “Quora साइट पर मुझे यह चित्र मिला। यह अत्यंत प्रभावशाली है। किस प्रकार RSS का ज़मीनी स्वयं सेवक और जनसंघ बीजेपी का कार्यकर्ता नेताओं की चरणों में फर्श पर बैठकर प्रदेश का मुख्यमंत्री और देश का प्रधानमंत्री बना। यह संगठन की ताकत है। जय सिया राम।” इस पोस्ट में एक वरिष्ठ कांग्रेसी द्वारा बीजेपी-आरएसएस संगठन की सराहना करना कांग्रेस आलाकमान की समस्याएँ बढ़ा रहा है।

हालांकि, दिग्विजय सिंह आज इंदिरा भवन में आयोजित कांग्रेस की प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल हुए। उन्होंने इस दौरान कहा, “मैंने संगठन की सराहना की है। मैं RSS और पीएम मोदी की नीतियों का घोर विरोधी था, हूं और रहूंगा। जो मुझे कहना था, मैंने CWC बैठक में कह दिया। संगठन को मजबूत करना या उसकी सराहना करना क्या बुरी बात है?”

शशि थरूर की राह पर दिग्गी राजा!

कांग्रेस बागी नेताओं के बयानों से परेशान है। एक तरफ शशि थरूर का बगावती सुर अभी भी जारी था, तब तक दिग्विजय सिंह ने बीजेपी-आरएसएस संगठन की सराहना करके पार्टी आलाकमान की मुश्किलें बढ़ा दी। दरअसल, शशि थरूर को कई अवसरों पर कांग्रेस के अंदर संगठन, नेतृत्व और सुधारों के बारे में खुलकर राय व्यक्त करते हुए देखा जा चुका है। वे कई मौकों पर भाजपा और पीएम मोदी की सराहना कर चुके हैं। ऐसे में दिग्विजय सिंह के आरएसएस और बीजेपी संगठन की सराहना को उसी श्रेणी में देखा जा रहा है। इसी कारण दिग्विजय सिंह की शशि थरूर के रास्ते पर आगे बढ़ने की चर्चा हो रही है।

क्या राहुल गांधी को दे रहे हैं सुझाव?

बीजेपी और आरएसएस संगठन की सराहना कर क्या दिग्विजय सिंह राहुल गांधी को सुझाव दे रहे हैं? दरअसल, यह सवाल तेजी से उठ रहा है। एक सप्ताह पहले भी दिग्विजय सिंह ने एक पोस्ट जारी कर राहुल गांधी को संगठन पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी थी। और फिर आज आरएसएस-बीजेपी के संगठन की सराहना कर रहे हैं। यह स्पष्ट रूप से दिग्विजय सिंह द्वारा पार्टी आलाकमान को सुझाव देने का प्रयास है। अब उस आलाकमान में सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, जयराम रमेश, केसी वेणुगोपाल समेत कई नेता शामिल हैं।

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देश

‘केजरीवाल भ्रष्ट नहीं है…’, मीडिया के सामने फूट-फूटकर रोए Arvind Kejriwal; क्लीन चिट मिलते ही दिया वायरल बयान

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आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को कथित शराब नीति मामले में बड़ी राहत मिली है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों से बरी कर दिया है। फैसले के बाद मीडिया से बात करते हुए केजरीवाल भावुक हो गए।

भावुक हुए केजरीवाल

उन्होंने कहा, “हमने पहले ही कहा था कि सच्चाई की जीत होगी। आज सच की जीत हुई है। मुझे भारतीय न्याय प्रणाली पर पूरा भरोसा था कि न्याय जरूर मिलेगा।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनकी पार्टी को राजनीतिक रूप से निशाना बनाया गया और झूठे आरोपों के जरिए बड़े नेताओं को जेल भेजा गया।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी, CBI के सबूतों पर सवाल

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि जांच एजेंसी आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त और ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सकी। चार्जशीट में भी कई खामियां पाई गईं और किसी गवाह या दस्तावेज से आरोप पुष्ट नहीं हुए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिना ठोस प्रमाण के केवल आरोपों के आधार पर किसी के खिलाफ मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। निष्पक्ष सुनवाई के लिए निष्पक्ष जांच जरूरी है, लेकिन इस मामले में अभियोजन पक्ष अपना केस साबित करने में विफल रहा।

‘कोई आपराधिक साजिश साबित नहीं’

अदालत ने यह भी कहा कि सीबीआई द्वारा लगाए गए आरोपों में आपराधिक साजिश का कोई ठोस आधार नहीं मिला। न तो केजरीवाल और न ही सिसोदिया के खिलाफ प्रत्यक्ष सबूत पेश किए जा सके। इन्हीं कारणों से कोर्ट ने दोनों नेताओं को बरी करने का आदेश दिया। फैसले के बाद ‘आप’ कार्यकर्ताओं ने इसे न्याय और सच्चाई की जीत बताया।

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देश

शराब घोटाले में AAP को राहत, केजरीवाल-सिसोदिया पर आरोप साबित करने में नाकाम रही CBI

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दिल्ली के कथित आबकारी नीति मामले में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को बड़ी राहत मिली है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने दोनों नेताओं को आरोपों से मुक्त कर दिया है। अदालत ने कहा कि जांच एजेंसियां उनके खिलाफ मुकदमा चलाने लायक पर्याप्त और ठोस सबूत पेश करने में विफल रहीं। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सीबीआई द्वारा लगाए गए आरोपों में आपराधिक षड्यंत्र का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला। फैसले के साथ ही मामले में नामजद अन्य कई आरोपियों को भी राहत मिली। केजरीवाल और सिसोदिया व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित हुए, जबकि कुछ अन्य आरोपी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए।

कोर्ट ने जांच पर उठाए सवाल

सुनवाई के दौरान अदालत ने अभियोजन पक्ष के तर्कों की विस्तार से समीक्षा की। कोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसियां नेताओं को सीधे तौर पर कथित घोटाले से जोड़ने वाले साक्ष्य पेश नहीं कर सकीं। केवल आरोपों के आधार पर किसी के खिलाफ मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि निष्पक्ष सुनवाई के लिए निष्पक्ष जांच अनिवार्य है और इस मामले में प्रॉसिक्यूशन अपना पक्ष साबित करने में असफल रहा।

2021-22 की आबकारी नीति से जुड़ा था मामला

यह पूरा मामला दिल्ली सरकार की 2021-22 की नई आबकारी नीति से संबंधित था। विपक्षी दलों और जांच एजेंसियों का आरोप था कि इस नीति में भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और कार्टेलाइजेशन हुआ, जिससे सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचा। जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा की गई थी। आरोप था कि नीति कुछ चुनिंदा शराब कारोबारियों को लाभ पहुंचाने के लिए बनाई गई और इसके बदले कथित तौर पर रिश्वत ली गई। यह मामला आम आदमी पार्टी के लिए बड़ा राजनीतिक संकट बना था और कई नेताओं को जेल भी जाना पड़ा था। हालांकि, अब अदालत के फैसले के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं ने इसे ‘सत्य की जीत’ बताया है।

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देश

PM Modi बने डिजिटल दुनिया के ‘बादशाह’, इंस्टाग्राम पर 100M का आंकड़ा पार कर रचा इतिहास

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को सोशल मीडिया पर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। उन्होंने इंस्टाग्राम पर 100 मिलियन (10 करोड़) फॉलोअर्स का आंकड़ा पार कर लिया है। इसके साथ ही वे दुनिया के पहले ऐसे नेता बन गए हैं, जिनके इंस्टाग्राम पर 100 मिलियन से अधिक फॉलोअर्स हैं। साल 2014 में इंस्टाग्राम से जुड़ने वाले प्रधानमंत्री मोदी के फॉलोअर्स की संख्या कई वैश्विक नेताओं से कहीं आगे निकल चुकी है।

वैश्विक नेताओं से आगे पीएम मोदी

इंस्टाग्राम फॉलोअर्स के मामले में पीएम मोदी, Donald Trump से भी काफी आगे हैं। ट्रंप के 43.2 मिलियन फॉलोअर्स हैं, जो मोदी के मुकाबले आधे से भी कम हैं।

सूची में अन्य नेताओं की स्थिति इस प्रकार है:

Prabowo Subianto – 15 मिलियन

Luiz Inácio Lula da Silva – 14.4 मिलियन

Recep Tayyip Erdoğan – 11.6 मिलियन

Javier Milei – 6.4 मिलियन

भारत में भी सबसे आगे

देश के भीतर भी इंस्टाग्राम पर पीएम मोदी का दबदबा कायम है। दूसरे स्थान पर Yogi Adityanath हैं, जिनके 16.1 मिलियन फॉलोअर्स हैं।तीसरे नंबर पर Rahul Gandhi हैं, जिनके 12.6 मिलियन फॉलोअर्स हैं। बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी के इजरायल के दो दिवसीय आधिकारिक दौरे के दौरान उनके फॉलोअर्स की संख्या में और तेजी से वृद्धि हुई।

इजरायल की संसद में मिला सर्वोच्च सम्मान

अपने इजरायल दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी को वहां की संसद ने सर्वोच्च सम्मान से नवाजा। यह सम्मान भारत और इजरायल के रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने में उनके योगदान के लिए दिया गया। भाषण के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सांसदों से बातचीत की। इस दौरान इजरायली सांसदों ने उनके साथ सेल्फी और तस्वीरें भी लीं। उनके संबोधन के दौरान संसद में उन्हें स्टैंडिंग ओवेशन भी मिला।

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