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‘द राजा साब’ की समीक्षा: श्राप, डर और भावनाओं का मिश्रण, प्रभास और संजय दत्त का प्रभावशाली प्रदर्शन
- फिल्म समीक्षा: द राजा साब
- कलाकार: प्रभास, संजय दत्त, बोमन ईरानी, मालविका मोहनन, निधि अग्रवाल, रिद्धि कुमार, ज़रीना वहाब, समुथिरकानी
- निर्देशक: मारुति दासारी
- निर्माता: टी. जी. विश्वा प्रसाद
- प्रोडक्शन हाउस: पीपल मीडिया फ़ैक्ट्री
- अवधि: 3 घंटे 06 मिनट
- रेटिंग: 3.5
द राजा साब समीक्षा: प्रभास की नई फिल्म ‘द राजा साब’ बड़े पर्दे पर रिलीज हो चुकी है। फिल्म की कहानी राजू (प्रभास) के इर्द-गिर्द घूमती है। राजू की जिंदगी उसकी दादी गंगा देवी (जरीना वहाब) के पास केन्द्रित है, जो बीमारी और अकेलेपन से जूझ रही हैं। उनकी स्थिति तब और बिगड़ जाती है जब एक पवित्र देवी का हार चोरी हो जाता है और उसके लिए उनके पति कनकराजू (संजय दत्त) घर से निकलते हैं, लेकिन वह लौटकर नहीं आते। डॉक्टरों का मानना है कि यदि गंगा देवी एक बार अपने पति को फिर से देख लें, तो उनकी याददाश्त और स्वास्थ्य में सुधार हो सकता है। इसी आशा को लेकर राजू अपने लापता दादा की खोज में हैदराबाद की ओर बढ़ता है।
राजू के सामने अतीत का सामना
इस यात्रा में राजू को अपने परिवार के छिपे हुए अतीत और अधूरे सच का सामना करना पड़ता है। इस सफर में अनीता (रिद्धि कुमार) और भैरवी (मालविका मोहनन) उसकी जिंदगी में नई चीजें लाती हैं, जो उसके निर्णय को नया दिशा देती हैं। जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, संजय दत्त का फ्लैशबैक फिल्म में गंभीरता लाता है, जहां संघर्ष केवल बाहरी नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक स्तर पर भी गहरा होता है।
प्रभास और जरीना वहाब के दृश्य होते हैं भावुक
प्रभास अपने अभिनय के जरिए राजू के पात्र में गहरा प्रभाव छोड़ते हैं। जरीना वहाब के साथ अस्पताल में फिल्माए गए उनके दृश्य फिल्म के सबसे भावुक क्षणों में से हैं, जहां खामोशी अपने आप में सबसे प्रभावशाली संवाद बनकर उभरती है। वहीं, संजय दत्त का किरदार केवल पारंपरिक खलनायक नहीं है, बल्कि भूतकाल के जख्मों को भी दर्शाता है। बोमन ईरानी भी कहानी में महत्वपूर्ण मोड़ पर अपने पात्र के साथ संतुलन बनाए रखते हैं। मारुति दासारी ने फिल्म में हॉरर, फैंटेसी और इमोशन को बेहतरीन ढंग से प्रस्तुत किया है।