पॉलिटिक्स
सोनाली खातुन के मामले में बंगाल से दिल्ली तक की हलचल के बीच सुप्रीम कोर्ट की धारणा! गर्भवती महिला को बांग्लादेश से भारत लाने पर केंद्र का बयान क्या है? जानिए।
सोनाली खातून: यह मामला अंतर्राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया है। यहाँ 9 महीने की गर्भवती महिला सोनाली खातून की चर्चा हो रही है, जिन्हें जून में दिल्ली से बांग्लादेश भेजा गया। सोनाली के साथ उसके पति दानिश शेख और 8 साल के बेटे को भी सीमा पार किया गया। इन सभी का दावा है कि वे बांग्लादेशी नागरिक हैं, जिसके चलते यह कार्रवाई की गई।
अंत में मामला न्यायालय में है, जहां जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जयमाल्य बागची की बेंच ने सोनाली को भारत लाने और उसे मुफ्त चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का आदेश दिया है। केंद्र ने मानवीय आधार पर सोनाली को सहायता प्रदान करने का आश्वासन दिया है। यह ज्ञात हुआ है कि सोनाली और अन्य कई को दिल्ली के रोहिणी क्षेत्र के सेक्टर 26 से बांग्लादेश भेजने का आरोप लगाया गया है, जिससे राष्ट्रीय राजधानी से बंगाल तक काफी चर्चा हो रही है।
गर्भवती महिला सोनाली खातून को बांग्लादेश से भारत लाने पर केंद्र का कथन।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद केंद्र सरकार बांग्लादेश भेजी गई सोनाली खातून को भारत लाने के लिए सहमत हुई है। इस संदर्भ में केंद्र की ओर से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि मानवीय आधार पर गर्भवती महिला और उसके बच्चे को देश में प्रवेश दिया जाएगा और उन पर निगरानी रखी जाएगी।
तुषार मेहता ने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्र सोनाली खातून के भारतीय नागरिक होने के दावे को चुनौती देगा और उन्हें बांग्लादेशी नागरिक ही मानते हैं। सरकार केवल मानवीय आधार पर उस महिला और उसके बच्चे को भारत में आने की अनुमति दे रही है। इस प्रकार, यह स्पष्ट है कि सोनाली खातून का नागरिकता के लिए संघर्ष अभी भी अनिश्चित है।
सोनाली खातून पर दिल्ली से बंगाल तक का हंगामा!
पूरा घटनाक्रम जून के अंत का है, जब दिल्ली के रोहिणी क्षेत्र के सेक्टर 26 से अवैध नागरिकता के आरोप में कई लोगों को बांग्लादेश निर्वासित किया गया। इसमें सोनाली खातून को उसके पति दानिश शेख और 8 साल के बच्चे के साथ भेजा गया। सोनाली खातून उस भोदू शेख की बेटी हैं जो भारतीय नागरिक हैं। इसी वजह से बंगाल से लेकर दिल्ली तक बवाल मचा।
ममता बनर्जी भी इस मामले में सक्रिय रहीं और केंद्र से सवाल उठाया कि क्या सोनाली खातून को बंगाली होने की सजा दी जा रही है? ममता ने अंतिम क्षण तक सोनाली और उन अन्य बंगाली लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करने का आह्वान किया है, जिन्हें बांग्लादेश भेजा गया है। इस मामले को लेकर बंगाल से दिल्ली तक काफी गहमागहमी देखने को मिली। अंत में, यह देखना दिलचस्प होगा कि सोनाली खातून का भविष्य कैसा होता है और उन्हें कहां रहना पड़ता है।