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वंदे मातरम्’ के 150 साल: 77वें गणतंत्र दिवस में दिखेगा नया भारत, परंपरा से प्रगति तक; हर झाँकी में छुपी है भारत की कहानी
देश इस बार 77वां गणतंत्र दिवस मनाने जा रहा है जिसमे हर साल कि तरह इस बार भी कई राज्यों की खास झाँकियाँ दिखाई देंगी। इन झाँकियों में अलग-अलग राज्यों की भाषा, संस्कृति और वेशभूषा का प्रदर्शन किया जाता है। ये झाँकियाँ एक परंपरा मात्र न होकर भारत की सांस्कृतिक विभिन्नताओं का परिचय देती हैं। आईए जानते है कि क्यों खास है गणतंत्र दिवस की झाँकियाँ
वंदे मातरम् के 150 साल : मुख्य थीम
इस वर्ष गणतंत्र दिवस 2026 की थीम “वंदे मातरम् के 150 वर्ष” रखी गई है। सूत्रों के मुताबिक भारत पर्व मे झाँकियों के जरिए भारत की सांस्कृतिक परिदृश्य, राष्ट्रभक्ति और आत्मनिर्भर भारत की तस्वीर पेश की जाएगी। इस बार गणतंत्र दिवस की झाँकियाँ परेड मे तो नहीं दिखेंगी लेकिन 26 जनवरी से 31 जनवरी तक लाल किला मैदान मे देखी जा सकती है। सूत्रों के अनुसार गणतंत्र दिवस के परेड में इस बार 17 राज्यों और केंद्र सरकार के 13 विभागों की 30 झाँकियाँ देखी जा सकती है इन झाँकियों की चयन प्रक्रिया काफी सख्त रखी गई थी जिसके कारण कई राज्यों की झाँकियों का चयन नहीं हो सका।
हर राज्य की अपनी अनूठी थीम
इस बार ये झाँकियाँ सिर्फ वेशभूषा या लोकनृत्य तक सीमित नहीं होंगी बल्कि इस बार हर राज्य एक अनूठे थीम के साथ उतरेंगे । कर्नाटक की झाँकी का थीम ‘Millets to Microchips जब कि बिहार की झाँकी में मखाना जैसे स्थानीय उत्पाद एवं मध्य प्रदेश की झाँकी में अहिल्याबाई होलकर की 300वीं जयंती दिखाई देंगी । हर झाँकी एक अलग और नई कहानी कहती नज़र आएगी।
नारी शक्ति पर बड़ा फोकस
गणतंत्र दिवस 2026 की झाँकियों में महिला सशक्तिकरण को केंद्र बनाया गया है, महिला सैनिक, वैज्ञानिक और महिला सेना की भागीदारी को बढ़ाया गया है साथ ही बिहार की झाँकी में मखाना जैसे उत्पाद की थीम भारत के हर क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है। कई झाँकियों में हरित भारत और आत्मनिर्भरता जैसे विषयों पर भी जोर दिया गया है वहीं कई राज्यों और विभागों ने जल संरक्षण, सौर ऊर्जा और प्राकृतिक खेती जैसे थीम को जगह दी है। रक्षा मंत्रालय ने झाँकी में स्वदेशी हथियार और तकनीकों को अनूठे ढंग में पेश किया है
सिनमेटिक टच और तकनीकों को प्रयोग
गणतंत्र दिवस 2026 परेड और झाँकियों में इस बार सिनमेटिक टच भी दिखाई देगा, साथ ही इस बार LED स्क्रीन, 3D एलिमेंट, लाइव परफॉर्मेंस, कोरियोग्राफी का इस्तेमाल करके डॉक्यूमेंट्री भी तैयार की जाएगी। खास बात ये भी है कि पहली बार भारतीय सिनेमा को समर्पित झाँकी ने भी लोगों का ध्यान खींचा। इस झाँकी का प्रतिनिधित्व फिल्म-मेकर संजय लीला भंसाली करेंगे।
ये झाँकियाँ भारत की पहचान नहीं, भारत को नई दिशा दिखायेंगी। गणतंत्र दिवस 2026 की झाँकियाँ यह साफ करती हैं कि भारत अब सिर्फ अपनी विरासत पर गर्व नहीं करता, बल्कि भविष्य की तस्वीर भी दुनिया को दिखा रहा है।