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हेल्थ

हाई ब्लड प्रेशर के कारण आपकी किडनी पर बढ़ सकता है खतरा, 3 महीने में सुधार न होने पर समय की बर्बादी से हो सकती है जीवन के लिए समस्या

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उच्च रक्तचाप: क्या आप अभी भी उच्च रक्तचाप के प्रति पुरानी सोच अपनाए हुए हैं? जी हां, वही उच्च रक्तचाप जो गुर्दे की बीमारियों का प्रमुख कारण बनता है। दरअसल, अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन / अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी (ACC/AHA) की 2025 की उच्च रक्तचाप दिशानिर्देश ने 2017 के संस्करण को परिवर्तित कर दिया है। इस दिशानिर्देश में उन सभी पहलुओं का उल्लेख किया गया है जो आपके लिए महत्वपूर्ण हैं। इसमें यह बताया गया है कि किन स्थितियों से ज्यादा जोखिम हो सकता है और कब उच्च लक्ष्य समझा जाएगा।

उच्च रक्तचाप के विभिन्न चरण जो आपको सतर्क करते हैं

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सामान्य रक्तचाप का स्तर क्या होता है

एम्स के चिकित्सक के अनुसार वर्तमान में सामान्य रक्तचाप 120 से कम और 80 से कम होने का बताया गया है। यहां सिस्टोलिक टॉप नंबर 120 और डायस्टोलिक बॉटम नंबर 80 है।

रक्तचाप बढ़ने पर सतर्क रहने की आवश्यकता

बढे़ रक्तचाप की स्थिति में चिकित्सक बताते हैं कि 120 से लेकर 129 सिस्टोलिक टॉप नंबर है और 80 डायस्टोलिक बॉटम नंबर है।

चरण 1 उच्च रक्तचाप का खतरा कब होता है

यदि चरण 1 उच्च रक्तचाप की बात करें तो सिस्टोलिक टॉप नंबर 130 से 139 है और डायस्टोलिक बॉटम नंबर 80 से 89 है।

चरण 2 उच्च रक्तचाप का स्तर जानें

इसके अलावा चरण 2 उच्च रक्तचाप के मामले में सिस्टोलिक टॉप नंबर 140 से कम और डायस्टोलिक बॉटम नंबर 90 होता है।

उच्च रक्तचाप से जुड़े जोखिम

उच्च रक्तचाप के बारे में चिकित्सकों का कहना है कि अब कार्डियोवैस्कुलर, गुर्दे और मेटाबोलिक जोखिम का अनुमान लगाने के साथ आवश्यक दवा समय पर लोगों को उपलब्ध कराई जा सकती है।

किसे है उच्च रक्तचाप से अधिक खतरा

इसी के साथ उच्च रक्तचाप के जोखिम वाले लोगों में गर्भावस्था, CKD, और रेजिस्टेंट उच्च रक्तचाप वाले लोग शामिल हैं। ऐसे में उन्हें हर संभव तरीके से अपनी सेहत का ध्यान रखना आवश्यक है ताकि समय पर उपचार किया जा सके। चिकित्सक के अनुसार यदि आप उच्च रक्तचाप पर नियंत्रण पाना चाहते हैं तो आपको निश्चित रूप से अपने जीवनशैली में बदलाव करने होंगे, लेकिन यदि 3 से 6 महीने तक रक्तचाप में कोई कमी नहीं आती है तो आपको चिकित्सक से परामर्श करने की आवश्यकता है।

रक्तचाप को सही से मापने के साथ-साथ अपने दिल और दिमाग को स्वस्थ रखने पर ध्यान दें। कहीं न कहीं उच्च रक्तचाप के कारण गुर्दे की बीमारियां सहित कई जोखिम हो सकते हैं, इसलिए आपको सतर्क रहने की आवश्यकता है।

अस्वीकृति: यह लेख और इसमें प्रदान की गई चिकित्सीय सलाह केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इस लेख में वर्णित तरीकों और दावों को केवल सुझाव समझा जाना चाहिए; डीएनपी इंडिया हिंदी न तो इनकी पुष्टि करता है और न ही इनका खंडन करता है। किसी भी सुझाव/उपचार/दवा/आहार का पालन करने से पहले हमेशा चिकित्सक से सलाह लें।

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हेल्थ

बार-बार हाथ कांपना किस बीमारी या कमी का है इशारा? न करें इसे नजरअंदाज

बार-बार हाथों में कंपकंपी महसूस होना शरीर में Vitamin B12, B6 और B1 की कमी का संकेत हो सकता है। जानिए इसके लक्षण, कारण और किन चीजों से पूरी होगी यह कमी।

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अगर आपके हाथ अक्सर कांपते हैं या अचानक कोई चीज पकड़ते समय कंपकंपी महसूस होती है, तो इसे हल्के में लेना ठीक नहीं है। हाथों का कांपना कई बार शरीर में पोषक तत्वों की कमी का संकेत हो सकता है। खासतौर पर कुछ जरूरी विटामिन की कमी नर्व्स पर असर डालती है, जिससे हाथों में कंपन महसूस होने लगता है।

विटामिन B12 की कमी से कांप सकते हैं हाथ

विशेषज्ञों के अनुसार, Vitamin B12 की कमी हाथों में कंपकंपी की बड़ी वजह बन सकती है। यह विटामिन शरीर में नर्व सेल्स और DNA बनाने में अहम भूमिका निभाता है। जब शरीर में विटामिन B12 की कमी होने लगती है, तो पेरिफेरल न्यूरोपैथी का खतरा बढ़ जाता है। इससे हाथों और पैरों की नसों पर असर पड़ता है और कंपकंपी जैसी समस्याएं शुरू हो सकती हैं।

क्यों होती है विटामिन B12 की कमी?

विटामिन B12 की कमी के पीछे कई कारण हो सकते हैं। खराब खानपान इसकी सबसे बड़ी वजह मानी जाती है। खासकर शाकाहारी लोगों में यह कमी ज्यादा देखने को मिलती है क्योंकि यह विटामिन मुख्य रूप से एनिमल बेस्ड फूड में पाया जाता है। इसके अलावा शरीर द्वारा विटामिन B12 को सही तरीके से अवशोषित न कर पाना, लंबे समय तक कुछ दवाओं का सेवन और कमजोर पाचन तंत्र भी इस कमी का कारण बन सकते हैं।

शरीर में दिख सकते हैं ये लक्षण

Vitamin B12 की कमी होने पर शरीर में कई तरह के संकेत नजर आ सकते हैं, जैसे:

  • हाथ-पैरों में झनझनाहट
  • सुन्नपन महसूस होना
  • बैलेंस बिगड़ना
  • नसों से जुड़ी समस्याएं
  • हाथों में कंपकंपी या कंपन

अगर ये लक्षण लगातार दिखाई दें, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो सकता है।

किन चीजों से पूरी होगी कमी?

विटामिन B12 की कमी पूरी करने के लिए खानपान में ऐसे फूड्स शामिल किए जा सकते हैं जिनमें यह विटामिन भरपूर मात्रा में मौजूद हो। दूध,दही, चीज, अंडे, मीट और अन्य एनिमल बेस्ड प्रोडक्ट्स इसके अच्छे स्रोत हैं। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर सप्लीमेंट्स लेने की सलाह भी दे सकते हैं।

विटामिन B6 और B1 की कमी भी बन सकती है वजह

सिर्फ विटामिन B12 ही नहीं, बल्कि Vitamin B6 और Vitamin B1 की कमी भी हाथों की कंपकंपी का कारण बन सकती है। इन विटामिन्स की कमी से शरीर की नसों और न्यूरोलॉजिकल सिस्टम पर असर पड़ता है, जिससे हाथ कांपने जैसी दिक्कतें सामने आ सकती हैं।

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हेल्थ

माइक्रोवेव में भूलकर भी दोबारा गर्म न करें ये चीजें, सेहत को हो सकता है नुकसान

माइक्रोवेव में हर चीज को दोबारा गर्म करना सुरक्षित नहीं होता। चावल, अंडा, पालक, चिकन और विटामिन-C वाली चीजों को बार-बार गर्म करने से उनका केमिकल स्ट्रक्चर बदल सकता है, जिससे फूड पॉइजनिंग और पाचन संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।

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आजकल लगभग हर घर में माइक्रोवेव का इस्तेमाल तेजी से बढ़ गया है। लोग इसमें खाना गर्म करने से लेकर कई दूसरे काम भी करते हैं। हालांकि, ज्यादातर लोग बचा हुआ खाना दोबारा गर्म करके खा लेते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि कुछ चीजों को माइक्रोवेव में बार-बार गर्म करना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है।विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ फूड्स को दोबारा गर्म करने पर उनका न्यूट्रिशन और केमिकल स्ट्रक्चर बदल जाता है। इससे फूड पॉइजनिंग, पेट दर्द, गैस, उल्टी और पाचन से जुड़ी कई समस्याएं हो सकती हैं।

चावल को दोबारा गर्म करना पड़ सकता है भारी

बहुत से लोग बचा हुआ चावल माइक्रोवेव में गर्म करके खा लेते हैं, लेकिन ऐसा करना स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा हो सकता है। अगर चावल लंबे समय तक कमरे के तापमान पर रखा रहे, तो उसमें बैक्टीरिया पनप सकते हैं। ऐसे चावल को दोबारा गर्म करके खाने से फूड पॉइजनिंग का खतरा बढ़ जाता है।

अंडा गर्म करने से बदल सकता है प्रोटीन स्ट्रक्चर

उबले हुए अंडे को दोबारा माइक्रोवेव में गर्म करने से बचना चाहिए। बार-बार गर्म करने पर अंडे में मौजूद प्रोटीन का स्ट्रक्चर बदल सकता है, जिससे पेट में जलन, गैस और पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। कई बार माइक्रोवेव में अंडा फट भी सकता है, जिससे दुर्घटना का खतरा रहता है।

पालक जैसी हरी सब्जियां भी हो सकती हैं नुकसानदायक

पालक और दूसरी हरी सब्जियों में नाइट्रेट्स पाए जाते हैं। जब इन्हें बार-बार गर्म किया जाता है, तो ये नाइट्राइट्स में बदल सकते हैं, जिन्हें शरीर के लिए नुकसानदायक माना जाता है। इससे पाचन संबंधी परेशानियां बढ़ सकती हैं और स्वास्थ्य पर भी असर पड़ सकता है।

चिकन को सही तरीके से गर्म करना जरूरी

चिकन को दोबारा गर्म करते समय खास सावधानी बरतनी चाहिए। अगर चिकन अंदर तक सही तरीके से गर्म नहीं होता, तो उसमें बैक्टीरिया जीवित रह सकते हैं। ऐसे चिकन को खाने से पेट खराब होने और फूड इंफेक्शन का खतरा बढ़ सकता है।

खट्टी चीजों को गर्म करने से बचें

विटामिन-C से भरपूर खट्टी चीजों को माइक्रोवेव में बार-बार गर्म नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से उनका पोषण कम हो सकता है और कुछ मामलों में यह शरीर के लिए नुकसानदायक भी साबित हो सकता है।

खाना गर्म करते समय किन बातों का रखें ध्यान

अगर आपको खाना दोबारा गर्म करना है, तो उसे लंबे समय तक कमरे के तापमान पर बिल्कुल न छोड़ें। माइक्रोवेव में खाना हमेशा ढककर गर्म करें, ताकि बैक्टीरिया पनपने का खतरा कम हो। इसके अलावा एक ही चीज को बार-बार गर्म करने से बचें। अगर दोबारा गर्म करना जरूरी हो, तो उसमें थोड़ा पानी डालकर गर्म करें, ताकि खाना सूखे नहीं और सही तरीके से गर्म हो सके।

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हेल्थ

इन छोटे बीजों में छुपा है बड़ा राज… खाने का सही तरीका जान लें, ये गलती पड़ सकती है भारी!

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चिया और सब्जा (तुकमारिया/बेसिल) सीड्स आकार में भले ही छोटे होते हैं, लेकिन ये पोषक तत्वों का खजाना हैं। खासकर गर्मियों में इनका सेवन शरीर को ठंडक देता है और कई हेल्थ बेनिफिट्स प्रदान करता है। ये सीड्स डाइजेशन, हार्ट हेल्थ और बॉडी को डिटॉक्स करने में मददगार माने जाते हैं।

चिया और सब्जा सीड्स के पोषक तत्व

चिया सीड्स में पाए जाते हैं:

-प्रोटीन
-फाइबर
-कैल्शियम
-आयरन
-मैग्नीशियम
-जिंक

सब्जा सीड्स में मौजूद हैं:

-फाइबर की भरपूर मात्रा
-ओमेगा-3 फैटी एसिड (अल्फा-लिनोलेनिक एसिड)
दोनों ही बीज शरीर को ऊर्जा देने के साथ-साथ पाचन को बेहतर बनाते हैं।

कैसे करें सेवन? (सही तरीका)

चिया और सब्जा सीड्स को डाइट में शामिल करने का सबसे सही तरीका:

-रात में पानी में भिगो दें (जेल जैसा बन जाता है)
-सुबह पानी में मिलाकर पिएं
-स्वाद के लिए नींबू का रस मिला सकते हैं

इसके अलावा आप इन्हें दही में मिलाकर, स्मूदी या पुडिंग में या नारियल पानी के साथ भी ले सकते हैं।

ये गलती न करें

-कभी भी सूखे (बिना भिगोए) सीड्स न खाएं, इससे गले में फंसने या डाइजेशन की समस्या हो सकती है।
-रोजाना 2 चम्मच (भीगे हुए) से ज्यादा सेवन न करें।
-अगर आपको कोई हेल्थ प्रॉब्लम है या आप दवाइयां ले रहे हैं, तो इन्हें डाइट में शामिल करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें। खासतौर पर किडनी की समस्या (स्टेज 3) वाले मरीज या फूड एलर्जी वाले लोग डॉक्टर की सलाह के बिना सेवन न करें।

एलर्जी का खतरा भी संभव

अगर आपको तिल, मूंगफली जैसी चीजों से एलर्जी है, तो चिया या सब्जा से भी एलर्जी हो सकती है। इसलिए नए फूड को डाइट में शामिल करने से पहले एक्सपर्ट से सलाह लेना जरूरी है। चिया और सब्जा सीड्स गर्मियों में सेहत के लिए बेहद फायदेमंद हैं, लेकिन सही तरीके और सीमित मात्रा में सेवन करना जरूरी है।

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