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Ajit Pawar Plane Crash: ‘दुर्घटना या साजिश?’ CBI जांच की मांग तेज, रोहित पवार के गंभीर सवालों से सियासत हुई गरम

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अजित पवार विमान हादसे को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। Nationalist Congress Party (एनसीपी) ने उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis से मुलाकात कर मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी से कराने की मांग की है। पार्टी ने इस संबंध में सीबीआई जांच की औपचारिक मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा।

‘दुर्घटना या साजिश?’ — रोहित पवार के सवाल

इस बीच एनसीपी (शरद चंद्र पवार गुट) के नेता Rohit Pawar ने ‘दुर्घटना या साजिश?’ शीर्षक से प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने ब्लैक बॉक्स के क्षतिग्रस्त होने, फ्यूल टैंक में विस्फोट और विमान संचालन से जुड़े तकनीकी पहलुओं पर विस्तृत प्रस्तुति दी। रोहित पवार ने कहा कि ब्लैक बॉक्स 1100 डिग्री सेल्सियस तापमान में भी एक घंटे तक सुरक्षित रह सकता है और यह दो परतों में संरक्षित होता है। ऐसे में इसके क्षतिग्रस्त होने की खबर कई शंकाएं पैदा करती है। उन्होंने देश-विदेश के उदाहरणों का हवाला देते हुए कहा कि बड़े हादसों में भी ब्लैक बॉक्स सुरक्षित पाया गया है।

फ्यूल टैंक और विस्फोट पर सवाल

रोहित पवार ने पूछा कि विमान जमीन पर गिरने के बाद इतना बड़ा विस्फोट कैसे हुआ? फ्यूल टैंक पूरी तरह भरा क्यों था और विमान में अतिरिक्त फ्यूल कैन क्यों रखे गए थे? उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि विजिबिलिटी कम होने के बावजूद लैंडिंग की अनुमति कैसे दी गई।

पायलट और उड़ान नियमों पर उठे मुद्दे

उन्होंने आरोप लगाया कि लेयर जेट उड़ाने वाले पायलट को अन्य प्रकार के विमान उड़ाने की अनुमति नहीं होती, फिर भी संबंधित पायलट दोनों विमान उड़ा रहा था। साथ ही उड़ान से पहले होने वाले अनिवार्य अल्कोहल टेस्ट और उसकी वीडियो रिकॉर्डिंग की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए — क्या यह प्रक्रिया पूरी की गई थी?

उड़ान सीमा और रजिस्ट्रेशन पर विवाद

रोहित पवार ने दावा किया कि विमान ने 4,915 घंटे की उड़ान सीमा के करीब पहुंचने के बावजूद उड़ान भरी। उनकी जानकारी के मुताबिक विमान 8,000 घंटे तक उड़ चुका था और मीटर रीडिंग में छेड़छाड़ की आशंका है। उन्होंने पूछा कि यदि विमान वीआईपी के उपयोग में था, तो उसकी तकनीकी स्थिति की पूरी जांच क्यों नहीं की गई? उन्होंने VSR कंपनी की भूमिका पर भी सवाल उठाए और कहा कि यदि लेयर जेट भारत में पंजीकृत नहीं हो सकता, तो उसका रजिस्ट्रेशन कैसे हुआ? साथ ही CVR (कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर) में केवल 30 मिनट की रिकॉर्डिंग होने पर भी सवाल खड़े किए, जबकि भारत में दो घंटे की रिकॉर्डिंग का प्रावधान है।

सरकार का आश्वासन

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार इस मामले में केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah को पत्र लिखेगी और आवश्यक कदम उठाएगी। प्रतिनिधिमंडल में एनसीपी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष Praful Patel, वरिष्ठ नेता सुनील तटकरे और पार्थ पवार भी शामिल थे। रोहित पवार ने नागरिक उड्डयन मंत्री पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यदि कंपनी को क्लीन चिट दी जा रही है, तो क्या विमान मालिक को बचाने की कोशिश हो रही है? उन्होंने आशंका जताई कि जांच रिपोर्ट में देरी और पायलट पर संभावित दबाव जैसे पहलुओं की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। अब यह मामला राजनीतिक और तकनीकी दोनों स्तरों पर गंभीर बहस का विषय बन चुका है।

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देश

‘केजरीवाल भ्रष्ट नहीं है…’, मीडिया के सामने फूट-फूटकर रोए Arvind Kejriwal; क्लीन चिट मिलते ही दिया वायरल बयान

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आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को कथित शराब नीति मामले में बड़ी राहत मिली है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों से बरी कर दिया है। फैसले के बाद मीडिया से बात करते हुए केजरीवाल भावुक हो गए।

भावुक हुए केजरीवाल

उन्होंने कहा, “हमने पहले ही कहा था कि सच्चाई की जीत होगी। आज सच की जीत हुई है। मुझे भारतीय न्याय प्रणाली पर पूरा भरोसा था कि न्याय जरूर मिलेगा।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनकी पार्टी को राजनीतिक रूप से निशाना बनाया गया और झूठे आरोपों के जरिए बड़े नेताओं को जेल भेजा गया।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी, CBI के सबूतों पर सवाल

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि जांच एजेंसी आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त और ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सकी। चार्जशीट में भी कई खामियां पाई गईं और किसी गवाह या दस्तावेज से आरोप पुष्ट नहीं हुए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिना ठोस प्रमाण के केवल आरोपों के आधार पर किसी के खिलाफ मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। निष्पक्ष सुनवाई के लिए निष्पक्ष जांच जरूरी है, लेकिन इस मामले में अभियोजन पक्ष अपना केस साबित करने में विफल रहा।

‘कोई आपराधिक साजिश साबित नहीं’

अदालत ने यह भी कहा कि सीबीआई द्वारा लगाए गए आरोपों में आपराधिक साजिश का कोई ठोस आधार नहीं मिला। न तो केजरीवाल और न ही सिसोदिया के खिलाफ प्रत्यक्ष सबूत पेश किए जा सके। इन्हीं कारणों से कोर्ट ने दोनों नेताओं को बरी करने का आदेश दिया। फैसले के बाद ‘आप’ कार्यकर्ताओं ने इसे न्याय और सच्चाई की जीत बताया।

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देश

शराब घोटाले में AAP को राहत, केजरीवाल-सिसोदिया पर आरोप साबित करने में नाकाम रही CBI

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दिल्ली के कथित आबकारी नीति मामले में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को बड़ी राहत मिली है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने दोनों नेताओं को आरोपों से मुक्त कर दिया है। अदालत ने कहा कि जांच एजेंसियां उनके खिलाफ मुकदमा चलाने लायक पर्याप्त और ठोस सबूत पेश करने में विफल रहीं। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सीबीआई द्वारा लगाए गए आरोपों में आपराधिक षड्यंत्र का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला। फैसले के साथ ही मामले में नामजद अन्य कई आरोपियों को भी राहत मिली। केजरीवाल और सिसोदिया व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित हुए, जबकि कुछ अन्य आरोपी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए।

कोर्ट ने जांच पर उठाए सवाल

सुनवाई के दौरान अदालत ने अभियोजन पक्ष के तर्कों की विस्तार से समीक्षा की। कोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसियां नेताओं को सीधे तौर पर कथित घोटाले से जोड़ने वाले साक्ष्य पेश नहीं कर सकीं। केवल आरोपों के आधार पर किसी के खिलाफ मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि निष्पक्ष सुनवाई के लिए निष्पक्ष जांच अनिवार्य है और इस मामले में प्रॉसिक्यूशन अपना पक्ष साबित करने में असफल रहा।

2021-22 की आबकारी नीति से जुड़ा था मामला

यह पूरा मामला दिल्ली सरकार की 2021-22 की नई आबकारी नीति से संबंधित था। विपक्षी दलों और जांच एजेंसियों का आरोप था कि इस नीति में भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और कार्टेलाइजेशन हुआ, जिससे सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचा। जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा की गई थी। आरोप था कि नीति कुछ चुनिंदा शराब कारोबारियों को लाभ पहुंचाने के लिए बनाई गई और इसके बदले कथित तौर पर रिश्वत ली गई। यह मामला आम आदमी पार्टी के लिए बड़ा राजनीतिक संकट बना था और कई नेताओं को जेल भी जाना पड़ा था। हालांकि, अब अदालत के फैसले के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं ने इसे ‘सत्य की जीत’ बताया है।

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देश

PM Modi बने डिजिटल दुनिया के ‘बादशाह’, इंस्टाग्राम पर 100M का आंकड़ा पार कर रचा इतिहास

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को सोशल मीडिया पर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। उन्होंने इंस्टाग्राम पर 100 मिलियन (10 करोड़) फॉलोअर्स का आंकड़ा पार कर लिया है। इसके साथ ही वे दुनिया के पहले ऐसे नेता बन गए हैं, जिनके इंस्टाग्राम पर 100 मिलियन से अधिक फॉलोअर्स हैं। साल 2014 में इंस्टाग्राम से जुड़ने वाले प्रधानमंत्री मोदी के फॉलोअर्स की संख्या कई वैश्विक नेताओं से कहीं आगे निकल चुकी है।

वैश्विक नेताओं से आगे पीएम मोदी

इंस्टाग्राम फॉलोअर्स के मामले में पीएम मोदी, Donald Trump से भी काफी आगे हैं। ट्रंप के 43.2 मिलियन फॉलोअर्स हैं, जो मोदी के मुकाबले आधे से भी कम हैं।

सूची में अन्य नेताओं की स्थिति इस प्रकार है:

Prabowo Subianto – 15 मिलियन

Luiz Inácio Lula da Silva – 14.4 मिलियन

Recep Tayyip Erdoğan – 11.6 मिलियन

Javier Milei – 6.4 मिलियन

भारत में भी सबसे आगे

देश के भीतर भी इंस्टाग्राम पर पीएम मोदी का दबदबा कायम है। दूसरे स्थान पर Yogi Adityanath हैं, जिनके 16.1 मिलियन फॉलोअर्स हैं।तीसरे नंबर पर Rahul Gandhi हैं, जिनके 12.6 मिलियन फॉलोअर्स हैं। बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी के इजरायल के दो दिवसीय आधिकारिक दौरे के दौरान उनके फॉलोअर्स की संख्या में और तेजी से वृद्धि हुई।

इजरायल की संसद में मिला सर्वोच्च सम्मान

अपने इजरायल दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी को वहां की संसद ने सर्वोच्च सम्मान से नवाजा। यह सम्मान भारत और इजरायल के रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने में उनके योगदान के लिए दिया गया। भाषण के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सांसदों से बातचीत की। इस दौरान इजरायली सांसदों ने उनके साथ सेल्फी और तस्वीरें भी लीं। उनके संबोधन के दौरान संसद में उन्हें स्टैंडिंग ओवेशन भी मिला।

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