नेपाल के रासुवा में विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है, जिसमें सैकड़ों जिंदगियां खतरे में पड़ गई हैं। इस भयानक त्रासदी के बीच अब सफाई सामने आई है। नेपाल में चीनी राजदूत झांग माओमिंग ने कहा है कि नेपाल की तरफ आए एक भूकंप ने 'आइस एवलांच' यानी तूफान को जन्म दिया जो बाद में मौत के कीचड़ और बाढ़ में बदल गया। इस संकट की घड़ी में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के डायरेक्ट निर्देश पर चीन ने नेपाल की तरफ मदद का हाथ बढ़ाया है। भारी नुकसान झेलने के बावजूद चीन कैश और इमरजेंसी सप्लाई भेज रहा है।  

नेपाल त्रासदी पर चीनी राजदूत की सफाई 

चीनी राजदूत ने उन सवालों पर सफाई देने की कोशिश की है जिनमें आरोप लग रहे हैं कि चीन ने वक्त रहते इस त्रासदी को लेकर कोई अलर्ट जारी नहीं किया था। उन्होंने कहा- 'चीन इस दुर्भाग्यपूर्ण आपदा से बहुत दुखी है। हम उन लोगों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं, जिनकी जान चली गई।' उन्होंने शोक में डूबे परिवारों के साथ-साथ नेपाल की सरकार और लोगों के प्रति भी अपनी सच्ची सहानुभूति प्रकट की है। 

बाढ़ में अब तक 162 लोगों की मौत 

बता दें कि नेपाल में अब तक 162 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि चीन के तिब्बत क्षेत्र में कम से कम तीन लोगों की मौत और 558 लोगों के लापता होने की खबर है। इस तरह दोनों देशों में मृतकों की संख्या कम से कम 160 तक पहुंच गई है। राहत और बचाव अभियान के बीच लापता लोगों के बढ़ने की आशंका है। 

नेपाल को कितना नुकसान हुआ?

चीन की तरफ से आए इस पानी के सैलाब से नेपाल के कई जिलों, खासकर रासुवा में भारी नुकसान पहुंचाया है। इस बाढ़ में नेपाल और चीन को जोड़ने वाला मुख्य मितेरी पुल पूरी तरह पानी में बह गया है। इसके अलावा पासंग ल्हामु हाईवे का करीब 40 किलोमीटर हिस्सा और कई छोटे-बड़े पुल भी बाढ़ में तबाह हो गए हैं। बाढ़ का असर नेपाल की करीब 15 हाइड्रोपावर परियोजनाओं पर भी पड़ा है। इससे देश की बिजली सप्लाई का एक बड़ा हिस्सा प्रभावित हुआ है।