रांची में रैली, धरना और जुलूस को लेकर नए नियम लागू किए गए हैं। अब किसी भी प्रदर्शन से पहले प्रशासन की अनुमति लेनी जरुरी होगी। जुलूस भी प्रशासन के बताए रास्ते से ही निकलेगा। प्रशासन इसे सुरक्षा और ट्रैफिक के लिए जरुरी बता रहा है, लेकिन अब सवाल यह है कि पेपर लीक के खिलाफ छात्रों के आंदोलन के बीच ही यह सख्ती क्यों? क्या सरकार आंदोलन के दबाव में है? आखिर इस फैसले की असली वजह क्या है?
सुरक्षा और आम लोगों का रखें ध्यान
रांची में राजनितिक दलों और छात्र संगठनों की ओर से लगातार धरना, प्रदर्शन और रैलियां हो रही हैं। कई बार इन कार्यक्रमों की जानकारी प्रशासन को पहले नहीं मिलती। ऐसे में सड़क पर जाम लगता है और आम लोगों को परेशानी होती है। इसी को देखते हुए जिला प्रशासन ने प्रदर्शन को लेकर नए निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना लोगों का अधिकार है, लेकिन प्रदर्शन के साथ सुरक्षा, कानून और आम लोगों की सुविधा का भी ध्यान रखना जरुरी है। इसलिए अब सार्वजनिक जगहों पर होने वाले कार्यक्रमों के लिए पहले से अनुमति लेना जरुरी होगा।
रैली और जुलूस से पहले लेनी होगी प्रशासन की अनुमति
रांची सदर और बुंडू के एसडीओ से पहले अनुमति लेनी होगी। कार्यक्रम कब और कितने समय का होगा, कितने लोग आएंगे और जुलूस किस रास्ते से निकलेगा इसकी जानकारी पहले देनी होगी। जरुरत पड़ने पर कार्यक्रम में शामिल होने वाले खास लोगों के बारे में भी बताना होगा। प्रशासन ने साफ कह दिया है कि जुलूस उसी रास्ते से निकलेगा, जो तय किया जाएगा। सड़क रोकने या ऐसा कोई काम करने की इजाजत नहीं होगी, जिससे आम लोगों को परेशानी हो।
सरकार के फैसले पर उठ रहे सवाल
प्रशासन का कहना है कि ये कदम सुरक्षा व्यवस्था और ट्रैफिक ठीक रखने के लिए उठाया गया है। हालांकि, पेपर लीक के खिलाफ छात्रों का आंदोलन चल रहा है, ऐसे में सवाल यह है कि क्या ये सिर्फ व्यवस्था संभालने की तयारी है, या सरकार आंदोलन को लेकर दबाव में है? आखिर सरकार ने ये कदम क्यों उठाया? ये सवाल सभी के मन में उठ रहे हैं।