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भारत पीछे हटा तो चीन ने मारी बाजी, रूस और ईरान से सस्ते तेल की बड़ी खरीदारी; जानिए पूरा गणित
Bloomberg की रिपोर्ट के अनुसार जनवरी की तुलना में भारत द्वारा रूस से कच्चे तेल की खरीद में करीब 40 प्रतिशत तक कमी आ सकती है। वहीं ईरान से आयात पहले ही घटाया जा चुका है। ऐसे में रूस और ईरान के लिए चीन सबसे बड़ा खरीदार बनकर उभरा है। माना जा रहा है कि अमेरिका के साथ ट्रेड डील को ध्यान में रखते हुए भारत ने रूस और ईरान से तेल आयात कम किया है। इस मौके का फायदा उठाते हुए दोनों देशों ने चीन को भारी छूट पर कच्चा तेल ऑफर किया है।
रिपोर्ट के मुताबिक रूस चीन को करीब 12 डॉलर प्रति बैरल की छूट पर तेल दे रहा है, जो पिछले महीने के मुकाबले लगभग 10 डॉलर प्रति बैरल कम है। वहीं ईरानी लाइट क्रूड भी करीब 11 डॉलर प्रति बैरल के डिस्काउंट पर बेचा जा रहा है। कम कीमतों का लाभ उठाते हुए चीन तेजी से अपनी स्टोरेज क्षमता भरने में जुटा है। विश्लेषक जियानान सुन का कहना है कि चीन की निजी रिफाइनिंग कंपनियां अपनी अधिकतम क्षमता तक खरीद कर चुकी हैं, इसलिए अब तेल को देश के भीतर और विदेशों में मौजूद स्टोरेज सुविधाओं में जमा किया जा रहा है।
स्टोरेज की चुनौती भी बढ़ी
स्थिति यह है कि चीन को अतिरिक्त तेल भंडारण के लिए सीमित जगह का सामना करना पड़ रहा है। ‘टीपॉट’ रिफाइनरियों में भी स्टोरेज किया जा रहा है, लेकिन वहां कुल रिफाइनिंग क्षमता के लगभग एक चौथाई तक ही भंडारण संभव है। आंकड़ों के अनुसार फरवरी के पहले 18 दिनों में चीन को रूसी तेल का निर्यात रोजाना लगभग 20 लाख बैरल तक बढ़ गया, जो जनवरी के मुकाबले करीब 20 प्रतिशत और दिसंबर की तुलना में लगभग 50 प्रतिशत अधिक है।
ईरान से कम, रूस से ज्यादा खरीद
हालांकि चीन ने ईरान से तेल आयात में कमी की है। बीते साल की तुलना में ईरानी तेल की खरीद लगभग 12 प्रतिशत घट गई है। इसकी एक वजह जोखिम भी माना जा रहा है, क्योंकि ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंध और संभावित सैन्य कार्रवाई की आशंका बनी रहती है। खासतौर पर ईरान की तेल सुविधाएं निशाने पर आ सकती हैं। ऐसे में चीन के लिए रूस से तेल खरीद अपेक्षाकृत सुरक्षित विकल्प माना जा रहा है। वहीं यूक्रेन युद्ध की रफ्तार धीमी पड़ने से रूस के साथ व्यापारिक जोखिम भी कुछ कम हुआ है।