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सोना गिरा, बाजार हिला! चांदी की कीमतों में भी आई भारी गिरावट

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मिडिल-ईस्ट में जारी तनाव के बीच सोने की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिल रही है। आमतौर पर सुरक्षित निवेश माने जाने वाला सोना इस बार दबाव में है और अपनी इस साल की लगभग पूरी बढ़त गंवाने के करीब पहुंच गया है। ब्लूमबर्ग के अनुसार, हालिया कारोबार में सोना करीब 3.8% गिरकर 4,320 डॉलर प्रति औंस तक आ गया, जो पिछले साल के स्तर के आसपास है। लगातार आठ सत्रों की गिरावट ने बाजार को चौंका दिया है—यह 1983 के बाद की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट मानी जा रही है।

घरेलू बाजार में भी दबाव

वैश्विक कमजोरी का असर भारतीय बाजार पर भी साफ दिखा।

MCX पर सोना करीब 5% गिरकर 1,37,377 रुपये प्रति 10 ग्राम
MCX पर चांदी करीब 6% टूटकर 2,13,166 रुपये प्रति किलोग्राम

यह गिरावट बताती है कि कीमती धातुओं का पूरा बाजार दबाव में है।

ग्लोबल मार्केट में भी कमजोरी

सिंगापुर बाजार में भी सोना और चांदी दोनों फिसले:

स्पॉट गोल्ड: 3.3% गिरकर 4,343 डॉलर प्रति औंस
चांदी: 3.4% गिरकर 65.61 डॉलर प्रति औंस

इसके साथ ही प्लैटिनम और पैलेडियम में भी गिरावट दर्ज हुई, जो व्यापक कमजोरी का संकेत है।

क्यों गिर रहा है सोना?

इस गिरावट के पीछे कई बड़े कारण हैं:

  1. ब्याज दरों का दबाव
    फेडरल रिजर्व समेत कई केंद्रीय बैंकों ने संकेत दिया है कि फिलहाल ब्याज दरों में कटौती जल्द संभव नहीं है। ऊंची ब्याज दरें सोने के लिए नकारात्मक होती हैं क्योंकि सोना कोई ब्याज नहीं देता।
  2. महंगाई और कच्चे तेल की कीमतें
    मिडिल-ईस्ट संघर्ष के चलते कच्चे तेल की कीमतें बढ़ी हैं, जिससे महंगाई का खतरा बढ़ गया है। इससे ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं।
  3. Forced Selling (मजबूरी में बिकवाली)
    शेयर बाजार और अन्य एसेट्स में नुकसान होने पर निवेशक घाटा कवर करने के लिए सोना बेचते हैं। 28 फरवरी के बाद यही ट्रेंड देखने को मिला, जिसने सोने पर दबाव बढ़ा दिया।

ईरान-अमेरिका तनाव से बढ़ी अनिश्चितता

ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है। होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बयानबाजी और चेतावनियों ने निवेशकों की चिंता और गहरा दी है, जिसका असर सोने की कीमतों पर साफ नजर आ रहा है।

क्या “ओवरसोल्ड” हो चुका है सोना?

विशेषज्ञों के मुताबिक, सोना अब “ओवरसोल्ड” जोन में पहुंच गया है। 14-दिवसीय RSI इंडिकेटर 30 से नीचे आ चुका है, जो आमतौर पर ज्यादा बिकवाली का संकेत होता है। ऐसे में शॉर्ट टर्म में हल्की रिकवरी की संभावना बन सकती है।

निवेशकों के लिए क्या रणनीति?

-बाजार में फिलहाल अनिश्चितता बेहद ज्यादा है
-युद्ध और तेल की कीमतों पर नजर रखना जरूरी है
-शॉर्ट टर्म में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है
-लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए गिरावट खरीदारी का मौका बन सकती है
कुल मिलाकर, सोने में आई यह गिरावट जोखिम भी है और अवसर भी—फैसला आपकी निवेश रणनीति और धैर्य पर निर्भर करेगा।

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