देश
AI से लैस ‘काल भैरव’ बनेगा भारत की नई ताकत, पाकिस्तान-चीन की बढ़ेगी टेंशन
भारत जल्द ही अपना पहला एआई आधारित एयरक्राफ्ट ‘काल भैरव’ तैयार करने जा रहा है। 3000 किलोमीटर रेंज और 30 घंटे तक उड़ान भरने की क्षमता वाला यह एयरक्राफ्ट भारत की रक्षा ताकत को नई ऊंचाई दे सकता है। जानिए इसकी खासियत और क्यों इसे भविष्य की युद्ध तकनीक माना जा रहा है।
भारत अब रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक और बड़ा कदम बढ़ाने जा रहा है। देश का पहला कृत्रिम मेधा यानी एआई आधारित एयरक्राफ्ट ‘काल भैरव’ जल्द ही पुर्तगाल में तैयार किया जाएगा। इस परियोजना पर भारत की एआई वारफेयर कंपनी FWDA और पुर्तगाल की प्रसिद्ध कंपनी SKETCHPIXEL मिलकर काम करेंगी। एडवांस एयरक्राफ्ट और फाइटर जेट सिमुलेशन सिस्टम बनाने में SKETCHPIXEL को काफी अनुभवी माना जाता है।
भारत और पुर्तगाल की साझेदारी
दोनों कंपनियों के बीच हुए समझौते के तहत पुर्तगाली कंपनी एयरक्राफ्ट के सिमुलेशन सिस्टम को विकसित करेगी। वहीं भारत की FWDA कंपनी एयरफ्रेम डिजाइन और मुख्य ऑटोनोमस सिस्टम पर काम करेगी। इस साझेदारी को भारत के रक्षा क्षेत्र में तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
एआई युद्ध की ओर बढ़ती दुनिया
दुनिया भर में अब युद्ध की रणनीति तेजी से बदल रही है। एयरफोर्स और नेवी दोनों ही एआई आधारित युद्ध तकनीकों को प्राथमिकता दे रहे हैं। ड्रोन और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक हथियारों का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। यूक्रेन-रूस युद्ध से लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तक, ड्रोन तकनीक ने युद्ध के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है। इसी को देखते हुए भारत का रक्षा मंत्रालय भी 87 मीडियम एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस ड्रोन (MALE) खरीदने पर विचार कर रहा है।
क्या होगी ‘काल भैरव’ की ताकत
एआई सिस्टम से लैस ‘काल भैरव’ एयरक्राफ्ट की रेंज करीब 3000 किलोमीटर बताई जा रही है। यह लगातार 30 घंटे तक उड़ान भरने में सक्षम होगा। इसमें एआई आधारित टारगेटिंग सिस्टम होगा, जो दुश्मन के लक्ष्यों को पहचानने और हमला करने में मदद करेगा। इसके अलावा इसका कोऑर्डिनेशन सिस्टम भी पूरी तरह एआई तकनीक पर आधारित होगा।
उड़ान और पेलोड क्षमता
जानकारी के मुताबिक इस एयरक्राफ्ट की पेलोड क्षमता 91 किलो होगी। यह 15 हजार फीट की ऊंचाई पर लगभग 25 घंटे तक लगातार उड़ान भर सकता है। युद्ध की स्थिति में यह करीब 11 घंटे तक ऑपरेशन करने में सक्षम रहेगा। इसकी क्रूज स्पीड 42 मीटर प्रति सेकंड बताई जा रही है, जो इसे लंबी दूरी की निगरानी और मिशन के लिए बेहद उपयोगी बनाती है।
कम लागत में बड़ी ताकत
अमेरिका का प्रसिद्ध एमक्यू-9 रीपर प्रीडेटर ड्रोन करीब 1000 करोड़ रुपये की लागत का माना जाता है। वहीं ‘काल भैरव’ की अनुमानित लागत लगभग 100 करोड़ रुपये बताई जा रही है। यानी कम खर्च में भारत को अत्याधुनिक तकनीक वाला युद्धक एयरक्राफ्ट मिल सकता है। अगर भारतीय सेना को ऐसे 10 स्वदेशी यूएवी मिल जाते हैं और वे एक साथ ऑपरेशन करते हैं, तो पाकिस्तान और चीन जैसे देशों के लिए चुनौती और बढ़ सकती है।
आत्मनिर्भर भारत की ओर बड़ा कदम
‘काल भैरव’ केवल एक एयरक्राफ्ट नहीं, बल्कि भारत की रक्षा तकनीक में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में बड़ा संकेत है। यह भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ाने के साथ-साथ रक्षा निर्यात के क्षेत्र में भी भारत को नई पहचान दे सकता है। आने वाले समय में महंगे और बड़े हथियारों की जगह छोटे, तेज और स्वॉर्म तकनीक से लैस एयरक्राफ्ट का प्रभाव बढ़ने की संभावना है। ऐसे में ‘काल भैरव’ भारत के भविष्य की युद्ध रणनीति का अहम हिस्सा बन सकता है।