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तेल संकट से कांपा रुपया! रिकॉर्ड लो पर पहुंचा… बढ़ सकती है महंगाई

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भारत की अर्थव्यवस्था के लिए आज का दिन किसी अलार्म बेल से कम नहीं है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में अचानक आई तेजी ने भारतीय रुपये को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले उसके अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंचा दिया है। गुरुवार सुबह बाजार खुलते ही निवेशकों की चिंता साफ दिखाई दी, क्योंकि रुपया 92 के अहम और संवेदनशील स्तर को पार कर चुका था। एक तरफ कच्चे तेल की कीमतों में करीब 10 प्रतिशत का उछाल है, वहीं विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली ने बाजार पर अतिरिक्त दबाव बना दिया है।

रुपया पहुंचा रिकॉर्ड निचले स्तर पर

आज बाजार खुलते ही रुपया 92.25 प्रति डॉलर के स्तर पर था। हालांकि कुछ ही समय में यह और फिसलकर 92.36 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया। यह गिरावट पिछले कारोबारी दिन के मुकाबले करीब 31 पैसे की है, जो बाजार में बढ़ती अनिश्चितता को साफ दिखाती है।

कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल

अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें लगभग 10 प्रतिशत उछलकर 101 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। भारत अपनी लगभग 80 प्रतिशत तेल जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है। ऐसे में तेल महंगा होने से डॉलर की मांग तेजी से बढ़ जाती है, जिससे रुपये पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली से बढ़ा दबाव

वैश्विक अनिश्चितता के माहौल में विदेशी निवेशकों ने भी भारतीय बाजार से दूरी बनानी शुरू कर दी है। बुधवार को ही विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय शेयर बाजार से करीब 6267 करोड़ रुपये की बिकवाली की। जब विदेशी निवेशक बाजार से पैसा निकालते हैं, तो रुपये की कीमत पर और अधिक दबाव बढ़ जाता है।

इराक में हमले से बढ़ी ऊर्जा संकट की आशंका

रुपये की कमजोरी के पीछे एक अहम कारण इराक के तेल टैंकर पर हुआ हमला भी माना जा रहा है। इस घटना के बाद वैश्विक ऊर्जा सप्लाई बाधित होने की आशंका बढ़ गई है। क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की खरीद डॉलर में होती है, इसलिए जब तेल कंपनियां ज्यादा तेल खरीदने के लिए डॉलर की मांग बढ़ाती हैं, तो डॉलर मजबूत और रुपया कमजोर होता जाता है।

आम आदमी की जेब पर क्या पड़ेगा असर?

रुपये के कमजोर होने का असर सीधे आम आदमी की जेब पर पड़ सकता है। कच्चे तेल का आयात महंगा होने से आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ सकते हैं। विदेशों से आने वाले मोबाइल, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान महंगे हो सकते हैं। विदेश में पढ़ाई या घूमने की योजना बनाने वालों को अब हर डॉलर के लिए ज्यादा रुपये खर्च करने पड़ेंगे।

क्या आगे भी जारी रहेगा दबाव?

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक मिडिल ईस्ट में तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतें स्थिर नहीं होतीं, तब तक रुपये पर दबाव बना रह सकता है। सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) इस स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए हैं, लेकिन फिलहाल वैश्विक अनिश्चितता के कारण बाजार अस्थिर बना हुआ है।

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