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जंग की आहट से बदला दुबई का चेहरा… खाली पड़े बीच और मॉल, देश छोड़ रहे अमीर विदेशी; मजदूर वर्ग फंसा

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ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी युद्ध ने खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ा दी है, जिसका असर दुबई पर भी साफ दिखाई दे रहा है। कभी दुनिया के सबसे सुरक्षित और चमकदार शहरों में गिने जाने वाले दुबई की रफ्तार अब धीमी पड़ गई है। विदेशी निवासी और पर्यटक बड़ी संख्या में शहर छोड़ चुके हैं, जिसके कारण बीच, पार्टी पूल, बीच क्लब और रेस्तरां सूने नजर आ रहे हैं। जहां पहले पर्यटकों और इन्फ्लुएंसर्स की भीड़ रहती थी, वहां अब सन्नाटा पसरा है। शहर में फिलहाल मुख्य रूप से स्थानीय मजदूर वर्ग और कुछ निवासी ही दिखाई दे रहे हैं, जो सामान्य कामकाज जारी रखने की कोशिश कर रहे हैं।

ईरान के पलटवार से खाड़ी में बढ़ा तनाव

रिपोर्ट्स के अनुसार 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले किए जाने के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। इसके तहत खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। यूएई के अबू धाबी और अन्य इलाकों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों की मौजूदगी के कारण ईरान ने यहां ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इन हमलों ने पूरे क्षेत्र में डर और अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है।

एयर डिफेंस ने कई हमले रोके

सूत्रों के मुताबिक, पिछले दो हफ्तों में ईरान ने यूएई और दुबई की ओर बड़ी संख्या में ड्रोन और मिसाइलें दागीं। यूएई की एयर डिफेंस प्रणाली ने अधिकांश हमलों को रोक लिया, लेकिन कुछ जगहों पर गिरते मलबे से नुकसान की खबरें सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि दुबई के कुछ प्रतिष्ठित इलाकों और इमारतों को भी नुकसान पहुंचा। दुबई एयरपोर्ट के पास ड्रोन गिरने से कुछ लोग घायल हुए और कुछ समय के लिए उड़ानों को रोकना पड़ा।

अमीर विदेशी निवासी शहर छोड़ रहे

अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार दुबई में रहने वाले हजारों विदेशी नागरिक और पर्यटक शहर छोड़ चुके हैं। स्प्रिंग ब्रेक के बावजूद पश्चिमी देशों के कई परिवार अपने बच्चों के साथ वापस लौट गए हैं। बीच क्लब, होटल और रेस्तरां में अब खाली सन लाउंजर्स दिखाई दे रहे हैं, जबकि पहले इन जगहों पर भीड़ रहती थी। कई लोगों का कहना है कि रोजमर्रा का जीवन सामान्य दिखता है, लेकिन आसमान में फ्लैश, शेल्टर अलर्ट और गिरते मलबे की खबरें माहौल बदल देती हैं।

चार्टर फ्लाइट से पलायन, एयरपोर्ट पर भीड़

रिपोर्ट्स के अनुसार कई अमीर विदेशी निवासी भारी रकम देकर चार्टर फ्लाइट्स के जरिए दुबई छोड़ रहे हैं। अचानक शहर छोड़ने की जल्दबाजी में कुछ लोग अपने पालतू जानवरों तक को पीछे छोड़ गए। उड़ानों की संख्या सीमित होने के कारण एयरपोर्ट पर भी भीड़ देखने को मिली। अमेरिका ने अपने नागरिकों को निकालने के लिए विशेष चार्टर उड़ानें भी शुरू की हैं।

पर्यटन उद्योग को भारी नुकसान

मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध का असर पर्यटन उद्योग पर भी पड़ा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक क्षेत्र के पर्यटन सेक्टर को रोजाना करोड़ों डॉलर का नुकसान हो रहा है। जुमेराह बीच रेजीडेंस, दुबई मॉल और अन्य लोकप्रिय पर्यटन स्थल, जहां पहले भारी भीड़ रहती थी, अब काफी हद तक खाली नजर आ रहे हैं। दुनिया का सबसे बड़ा फेरिस व्हील ऐन दुबई भी फिलहाल बंद पड़ा है।

मजदूर वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित

इस पूरे संकट का सबसे बड़ा असर दक्षिण एशियाई देशों से आए मजदूरों पर पड़ा है। भारत, पाकिस्तान, नेपाल और बांग्लादेश से आए लाखों ब्लू-कॉलर वर्कर, टैक्सी ड्राइवर और होटल कर्मचारी दुबई में ही फंसे हुए हैं। कामकाज धीमा पड़ने से उनकी आय प्रभावित हुई है और उड़ानों के किराये बढ़ जाने से अपने देश लौटना भी मुश्किल हो गया है।

भारतीय नागरिकों की वापसी

इन हालात के बीच भारत सरकार और एयरलाइंस की मदद से बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों को सुरक्षित वापस लाया गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार 1 से 7 मार्च के बीच 52,000 से अधिक भारतीय नागरिक यूएई और खाड़ी देशों से भारत लौट चुके हैं।

अफवाह फैलाने पर सख्त कार्रवाई

यूएई सरकार ने एयर डिफेंस सिस्टम को मजबूत करते हुए नागरिकों को सुरक्षा का भरोसा दिया है। साथ ही प्रशासन ने चेतावनी दी है कि हमलों से जुड़ी तस्वीरें या वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई हो सकती है। अब तक अफवाह फैलाने के आरोप में कई लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया जा चुका है, जिनमें एक ब्रिटिश पर्यटक भी शामिल है। ब्रिटिश दूतावास ने भी अपने नागरिकों को यूएई के सख्त कानूनों का पालन करने की सलाह दी है।

हालात पूरी तरह सामान्य नहीं

फिलहाल दुबई की स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं मानी जा रही है, हालांकि बड़े पैमाने पर जनहानि की खबर नहीं है। शहर की रफ्तार जरूर धीमी हुई है, लेकिन स्थानीय निवासी और मजदूर वर्ग के साथ जीवन किसी तरह आगे बढ़ रहा है। इस पूरे घटनाक्रम का असर केवल खाड़ी क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि तेल की कीमतों, उड़ानों और वैश्विक पर्यटन उद्योग पर भी इसका असर देखने को मिल रहा है।

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