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क्या बन रहा है ‘इस्लामिक NATO’? पाकिस्तान के बयान से बढ़ी भारत की चिंता

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के बयान के बाद ‘इस्लामिक NATO’ की चर्चा तेज हो गई है। सऊदी अरब, कतर, तुर्की और पाकिस्तान के संभावित रक्षा गठबंधन को क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। जानिए यह गठबंधन क्या है और भारत के लिए क्यों बढ़ सकती है चिंता।

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पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के हालिया बयान ने वैश्विक कूटनीतिक और सुरक्षा हलकों में नई बहस छेड़ दी है। एक टीवी इंटरव्यू के दौरान उन्होंने संकेत दिया कि मुस्लिम-बहुल देशों के बीच एक बहुपक्षीय रक्षा गठबंधन तैयार किया जा रहा है, जिसे अनौपचारिक रूप से ‘इस्लामिक नाटो’ कहा जा रहा है। माना जा रहा है कि यह पहल अब केवल चर्चा तक सीमित नहीं है, बल्कि धीरे-धीरे एक ठोस रणनीतिक योजना का रूप ले रही है।

सऊदी अरब, पाकिस्तान, कतर और तुर्की की भूमिका

ख्वाजा आसिफ के मुताबिक सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच पहले से मौजूद रक्षा सहयोग समझौते में अब कतर के शामिल होने की संभावना काफी मजबूत है। इसके साथ ही तुर्की के साथ भी बातचीत अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। आसिफ ने कहा कि यह गठबंधन भविष्य की सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है, जिसमें आर्थिक और रक्षा सहयोग दोनों शामिल होंगे। उनका मानना है कि यदि सऊदी अरब, पाकिस्तान, कतर और तुर्की एक मंच पर आते हैं, तो इससे क्षेत्रीय देशों की बाहरी शक्तियों पर निर्भरता कम हो सकती है।

कैसे पड़ी ‘इस्लामिक नाटो’ की जरूरत

इस संभावित सुरक्षा गठबंधन की नींव सितंबर 2025 में मानी जा रही है, जब इजरायल ने कतर में हमास की एक बैठक को निशाना बनाते हुए मिसाइल हमला किया था। हालांकि हमला सीमित और रणनीतिक था, लेकिन इससे खाड़ी देशों की सुरक्षा कमजोरियां उजागर हो गई थीं। इसके बाद कई मुस्लिम देशों ने सामूहिक सुरक्षा ढांचे की जरूरत महसूस की। पिछले वर्ष इस दिशा में संभावित सदस्य देशों के बीच एक समझौते पर हस्ताक्षर भी किए गए थे। माना जा रहा है कि यही समझौता आगे चलकर ‘इस्लामिक नाटो’ का आधार बना। इसमें नाटो के अनुच्छेद 5 जैसी व्यवस्था बताई जा रही है, जिसके तहत एक सदस्य देश पर हमला सभी सदस्य देशों पर हमला माना जाएगा।

तुर्की और कतर क्यों हैं अहम

2026 की शुरुआत में तुर्की ने इस गठबंधन में शामिल होने की इच्छा जाहिर की थी। तुर्की मुस्लिम दुनिया की सबसे मजबूत सेनाओं में से एक रखता है और उसके पास आधुनिक रक्षा तकनीक भी मौजूद है। वहीं कतर के पास विशाल आर्थिक संसाधन, आधुनिक वायुसेना और मजबूत नौसैनिक ढांचा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह गठबंधन अस्तित्व में आता है, तो सदस्य देशों के बीच खुफिया जानकारी साझा करने, संयुक्त सैन्य अभ्यास और सामूहिक रक्षा रणनीति पर तेजी से काम हो सकता है।

ईरान और पश्चिमी प्रभाव को संतुलित करने की कोशिश

विश्लेषकों के अनुसार यह गठबंधन केवल रक्षा सहयोग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका उद्देश्य क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को बदलना भी हो सकता है। इसे ईरान के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने और इजरायल जैसी बाहरी शक्तियों के हस्तक्षेप को रोकने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। इसके अलावा खाड़ी देश लंबे समय से अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिका और यूरोपीय देशों पर निर्भर रहे हैं। अब वे एक ऐसा ढांचा बनाना चाहते हैं, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद संभाली जा सके।

भारत के लिए क्यों बढ़ सकती है चिंता

भारत के लिए यह संभावित गठबंधन नई रणनीतिक चुनौतियां पैदा कर सकता है। पाकिस्तान का इसमें केंद्रीय भूमिका निभाना भारत की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा सकता है। परमाणु शक्ति संपन्न पाकिस्तान इस मंच का इस्तेमाल कश्मीर और दक्षिण एशिया से जुड़े मुद्दों पर अधिक आक्रामक रुख अपनाने के लिए कर सकता है। इसके अलावा सऊदी अरब, कतर और तुर्की भारत के महत्वपूर्ण व्यापारिक और ऊर्जा साझेदार हैं। ऐसे में भारत को अपने आर्थिक हितों और सुरक्षा रणनीति के बीच संतुलन बनाकर चलना होगा।

ऊर्जा सुरक्षा और सैन्य रणनीति पर असर

यदि यह गठबंधन खाड़ी क्षेत्र के समुद्री मार्गों पर प्रभाव डालता है, तो इसका असर भारत की ऊर्जा आपूर्ति और तेल की कीमतों पर भी पड़ सकता है। भारत की बड़ी तेल जरूरतें खाड़ी देशों से पूरी होती हैं, इसलिए किसी भी रणनीतिक बदलाव का सीधा प्रभाव भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते हालात को देखते हुए भारत को अपनी सैन्य आधुनिकीकरण की प्रक्रिया और तेज करनी होगी। साथ ही इजरायल, अमेरिका और यूरोपीय सहयोगियों के साथ खुफिया और सुरक्षा समन्वय को और मजबूत करने की जरूरत पड़ सकती है।

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रॉबर्ट वाड्रा को शिकोहपुर मनी लॉन्ड्रिंग केस में मिली जमानत, राहत मिलते ही ED जांच पर किया राजनीतिक हमला

शिकोहपुर भूमि सौदा मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रॉबर्ट वाड्रा को राउज एवेन्यू कोर्ट से जमानत मिल गई है। राहत मिलने के बाद उन्होंने ED और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला।

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Priyanka Gandhi के पति और कारोबारी Robert Vadra को शिकोहपुर भूमि सौदा मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी राहत मिली है। Rouse Avenue Court ने उन्हें 50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दे दी है। मामले की अगली सुनवाई अब 10 जुलाई को होगी।

कोर्ट से राहत के बाद ED पर साधा निशाना

जमानत मिलने के बाद रॉबर्ट वाड्रा ने मीडिया से बातचीत में Enforcement Directorate और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “मुझे देश की न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है। मैं जानता हूं कि ईडी को सरकार चला रही है और वह सरकार के इशारों पर काम करती है। इसके बावजूद मुझे न्यायपालिका पर विश्वास है।”

‘मेरे पास छिपाने के लिए कुछ नहीं’

अदालत परिसर के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए वाड्रा ने खुद को पूरी तरह निडर बताया। उन्होंने कहा कि उनके पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है और वे हर परिस्थिति का सामना करने के लिए तैयार हैं। वाड्रा ने कहा कि वह कानूनी प्रक्रियाओं से भागने वाले नहीं हैं और जांच में पूरा सहयोग करेंगे।

परिवार के प्रदर्शन से जोड़ा मामला

रॉबर्ट वाड्रा ने जांच एजेंसियों की कार्रवाई को राजनीतिक संदर्भ से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि जब उनका परिवार चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करता है या जनता का समर्थन मिलता है, तब इस तरह की जांचों का सामना करना पड़ता है। उनका कहना था कि अगर लोग अब भी उनके परिवार को पसंद करते हैं, तो उन्हें इस तरह की परिस्थितियों का सामना करना ही पड़ेगा।

क्या है शिकोहपुर भूमि सौदा मामला?

यह मामला हरियाणा के शिकोहपुर इलाके में हुए कथित भूमि सौदे और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग आरोपों से संबंधित है। इस पूरे मामले की जांच Enforcement Directorate कर रही है। फिलहाल कोर्ट से मिली जमानत को रॉबर्ट वाड्रा के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।

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पेट्रोल-डीजल के दामों ने बढ़ाई डिलीवरी-कैब ड्राइवरों पर परेशानी, Ola-Uber से लेकर Blinkit तक हड़ताल पर वर्कर्स

पेट्रोल-डीजल की बढ़ी कीमतों और LPG संकट से गिग वर्कर्स की मुश्किलें बढ़ गई हैं। विरोध में डिलीवरी और ऐप आधारित ड्राइवरों ने 5 घंटे सेवाएं बंद रखने का एलान किया है।

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देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी ने ऐप आधारित टैक्सी और ऑनलाइन डिलीवरी सेवाओं से जुड़े गिग वर्कर्स की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पिछले लगभग चार वर्षों में यह पहली बड़ी ईंधन वृद्धि मानी जा रही है, जिसका सीधा असर लाखों डिलीवरी एजेंट और ड्राइवरों की कमाई पर पड़ रहा है।

5 घंटे ऐप सेवाएं बंद रखने का एलान

ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी के विरोध में गिग एंड प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन (GIPSWU) ने रविवार दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक ऐप आधारित सेवाओं को बंद रखने की घोषणा की है। यूनियन का कहना है कि कंपनियों को तुरंत प्रति किलोमीटर सर्विस रेट बढ़ाना चाहिए ताकि बढ़ते खर्च का बोझ वर्कर्स पर न पड़े।

1.2 करोड़ गिग वर्कर्स प्रभावित

यूनियन के मुताबिक, देशभर में करीब 1.2 करोड़ गिग वर्कर्स इस बढ़ोतरी से प्रभावित होंगे। इनमें डिलीवरी पार्टनर्स, बाइक टैक्सी ड्राइवर और ऐप आधारित कैब ड्राइवर शामिल हैं, जिनकी रोजी-रोटी पूरी तरह दोपहिया वाहनों पर निर्भर है। बताया जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और मिडिल ईस्ट में जारी तनाव इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह हैं।

LPG संकट ने बढ़ाई परेशानी

ईंधन महंगा होने के साथ-साथ एलपीजी संकट ने भी गिग वर्कर्स की मुश्किलें दोगुनी कर दी हैं। गैस की कमी के कारण कई रेस्तरां और क्लाउड किचन ने अपनी सेवाएं सीमित कर दी हैं या अस्थायी रूप से बंद कर दिया है।इसका सीधा असर फूड डिलीवरी सेक्टर पर पड़ा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ऑर्डर वॉल्यूम में 50 से 70 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है। इससे उन डिलीवरी एजेंटों की कमाई प्रभावित हुई है, जिनकी आय इंसेंटिव और ज्यादा ऑर्डर पर निर्भर करती है।

20 रुपये प्रति किलोमीटर न्यूनतम रेट की मांग

GIPSWU की अध्यक्ष सीमा सिंह ने कहा कि बढ़ती महंगाई और भीषण गर्मी के बीच यह ईंधन वृद्धि श्रमिकों पर सीधा आर्थिक प्रहार है। उन्होंने कहा कि Swiggy, Zomato, Blinkit और अन्य प्लेटफॉर्म्स से जुड़े वर्कर्स अब अतिरिक्त खर्च उठाने की स्थिति में नहीं हैं। यूनियन ने मांग की है कि कम से कम 20 रुपये प्रति किलोमीटर का न्यूनतम सर्विस रेट तय किया जाए।

महिला वर्कर्स पर सबसे ज्यादा असर

रिपोर्ट के मुताबिक, इस संकट का सबसे ज्यादा असर महिला गिग वर्कर्स और डिलीवरी एजेंटों पर पड़ रहा है। कई कर्मचारी रोजाना 10 से 14 घंटे तक भारी ट्रैफिक और खराब मौसम में काम करने को मजबूर हैं। यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि कमाई नहीं बढ़ी तो बड़ी संख्या में लोग इस सेक्टर को छोड़ सकते हैं।

इन सेवाओं पर दिख सकता है असर

रविवार को होने वाले 5 घंटे के शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में कई बड़े प्लेटफॉर्म्स से जुड़े वर्कर्स के शामिल होने की संभावना है। इसका असर Swiggy, Zomato, Blinkit, Zepto, Ola, Uber और Rapido जैसी सेवाओं पर देखने को मिल सकता है।

आने वाले वर्षों में तेजी से बढ़ेगा सेक्टर

NITI Aayog के अनुमान के अनुसार, चुनौतियों के बावजूद भारत में गिग इकॉनमी का विस्तार लगातार जारी रहेगा। वर्ष 2020-21 में देश में गिग वर्कर्स की संख्या करीब 77 लाख थी, जो 2029-30 तक बढ़कर 2.3 करोड़ से अधिक हो सकती है।

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‘मजबूत परिवार से ही मजबूत समाज…’, मंत्री श्रवण कुमार का संदेश

Shravan Kumar ने परिवार दिवस पर कहा कि परिवार केवल रिश्तों का समूह नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास, संस्कार और सहयोग की मजबूत नींव है। उन्होंने समाज में शांति, सद्भाव और नैतिकता के लिए मजबूत और संस्कारी परिवारों के निर्माण पर जोर दिया।

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श्रवण कुमार ने परिवार दिवस के अवसर पर कहा कि परिवार केवल रक्त संबंधों का समूह नहीं है, बल्कि यह प्रेम, विश्वास, संस्कार और सहयोग की सबसे मजबूत नींव होता है। उन्होंने कहा कि एक मजबूत परिवार ही समाज और राष्ट्र की असली ताकत बनता है।

“सशक्त परिवार से मजबूत समाज का निर्माण”

मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि समाज की मजबूती सशक्त और संस्कारी परिवारों पर आधारित होती है। जब परिवारों में आपसी प्रेम, सम्मान और एकता बनी रहती है, तब समाज में शांति, सद्भाव और नैतिकता का वातावरण विकसित होता है।

परिवार की एकजुटता को बताया राष्ट्र की शक्ति

उन्होंने कहा कि परिवार की एकजुटता ही समाज और राष्ट्र की वास्तविक शक्ति है। परिवारों में अच्छे संस्कार और सहयोग की भावना आने वाली पीढ़ियों को सही दिशा देने का काम करती है।

प्रेमपूर्ण परिवार बनाने का लिया जाए संकल्प

परिवार दिवस के मौके पर मंत्री ने लोगों से मजबूत, संस्कारी और प्रेमपूर्ण परिवारों के निर्माण का संकल्प लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि परिवारों में आपसी विश्वास और सम्मान बनाए रखना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है।

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