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Israel-Iran War: खामेनेई को मारने की साजिश पहले से थी तैयार! इजरायली रक्षा मंत्री का बड़ा दावा

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इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक बड़ी रिपोर्ट सामने आई है। बताया जा रहा है कि इजरायल ने ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई को निशाना बनाने की योजना पिछले साल नवंबर में ही बना ली थी। इजरायल के रक्षा मंत्री इस्राइल काट्ज ने इस बात का खुलासा किया है।

नवंबर 2025 में बनी थी योजना

रक्षा मंत्री इस्राइल काट्ज ने एक इंटरव्यू में बताया कि नवंबर 2025 में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ हुई एक बेहद गोपनीय सुरक्षा बैठक में यह फैसला लिया गया था। उस बैठक में खामेनेई को खत्म करना इजरायल का रणनीतिक लक्ष्य तय किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, इस मिशन को शुरू में लगभग छह महीने बाद यानी 2026 के मध्य तक अंजाम देने की योजना थी। लेकिन ईरान के भीतर बढ़ती घरेलू अशांति और क्षेत्रीय हालात को देखते हुए ऑपरेशन की समयसीमा में बदलाव किया गया।

अमेरिका के साथ साझा की गई रणनीति

इजरायल ने अपनी इस रणनीति की जानकारी अमेरिका को भी दी थी। रिपोर्ट के अनुसार, मिशन को जनवरी के आसपास आगे बढ़ाने का फैसला लिया गया। इजरायली नेतृत्व को आशंका थी कि तेहरान की दबाव में चल रही सरकार पश्चिम एशिया में इजरायल और अमेरिका के हितों के खिलाफ आक्रामक कदम उठा सकती है।

‘ऑपरेशन रोरिंग लायन’ के दौरान हुआ हमला

बताया जा रहा है कि खामेनेई की हत्या ‘ऑपरेशन रोरिंग लायन’ और ‘एपिक फ्यूरी’ के शुरुआती चरण में की गई। शनिवार को शुरू हुए इस सैन्य अभियान में इजरायल ने ईरान के कई अहम ठिकानों को निशाना बनाया। यह पहली बार माना जा रहा है जब किसी संप्रभु देश के शीर्ष नेता को हवाई हमले में मारा गया है। इजरायल का कहना है कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम और परमाणु गतिविधियों से पैदा होने वाले खतरे को खत्म करना है। इसके साथ ही वह ईरान में शासन परिवर्तन की दिशा में भी दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है।

तेहरान में हमलों की 12वीं लहर

इस बड़े हमले के बाद इजरायल रक्षा बल (IDF) ने अपने हवाई अभियान को और तेज कर दिया है। गुरुवार को आईडीएफ ने जानकारी दी कि तेहरान में हमलों की 12वीं लहर पूरी कर ली गई है। इन हमलों में ईरान की सुरक्षा और सैन्य ढांचे से जुड़े कई अहम ठिकानों को निशाना बनाया गया। अलबरज प्रांत में स्थित एक विशेष इकाई का मुख्यालय भी हमले का लक्ष्य बना, जो ईरान की आंतरिक सुरक्षा बलों का संचालन करता है।

IRGC और बासिज ठिकानों पर भी हमला

आईडीएफ के मुताबिक, इस अभियान के तहत इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और बासिज अर्धसैनिक बल से जुड़े कई ठिकानों को भी निशाना बनाया गया। इसके अलावा हथियारों के भंडारण और उत्पादन से जुड़ी कई अन्य साइटों पर भी हवाई हमले किए गए। इजरायली वायु सेना का कहना है कि तेहरान में ईरानी शासन से जुड़े सैन्य और सुरक्षा ढांचे पर लगातार दबाव बढ़ाया जा रहा है और यह अभियान आगे भी जारी रह सकता है।

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