देश
सऊदी-UAE-कतर ने खींचे हाथ, ईरान के खिलाफ जंग में किस मुस्लिम देश को मिलेगा अमेरिका का साथ?
संयुक्त राज्य अमेरिका ईरान पर संभावित सैन्य कार्रवाई की तैयारी कर चुका है, लेकिन मिडिल ईस्ट में उसे अपने पारंपरिक सहयोगियों से बड़ा झटका लगा है। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कतर ने साफ कर दिया है कि वे ईरान के खिलाफ किसी भी हमले के लिए न तो अपना एयरस्पेस देंगे और न ही लॉन्चपैड की अनुमति।
यह फैसला ऐसे समय आया है, जब अमेरिका का रुख ईरान के प्रति बेहद आक्रामक नजर आ रहा है। ट्रंप प्रशासन ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई को सत्ता से हटाने तक की धमकियां दे चुका है। ऐसे में सवाल उठ रहा है—जब खाड़ी के बड़े मुस्लिम देश पीछे हट गए हैं, तो ईरान के खिलाफ जंग में अमेरिका का साथ कौन देगा?
जॉर्डन बन सकता है अमेरिका का रणनीतिक सहारा
इन हालात में मिडिल ईस्ट का एक मुस्लिम देश ऐसा है, जो अमेरिका का संभावित रणनीतिक साझेदार बनकर उभर रहा है—जॉर्डन। अब तक जॉर्डन ने सार्वजनिक तौर पर यह नहीं कहा है कि वह अमेरिका को अपना एयरस्पेस इस्तेमाल करने से रोकेगा। इसी वजह से माना जा रहा है कि यदि खाड़ी देश साथ नहीं देते, तो अमेरिका को जॉर्डन से बैक-सपोर्ट मिल सकता है।
मिडिल ईस्ट में अमेरिका के कुल आठ स्थायी सैन्य बेस हैं, जो बहरीन, मिस्र, इराक, कुवैत, कतर, सऊदी अरब, यूएई और जॉर्डन में स्थित हैं। इनमें जॉर्डन एकमात्र ऐसा देश है, जिसने अब तक ईरान के मुद्दे पर खुलकर दूरी नहीं बनाई है।
जॉर्डन में बढ़ी अमेरिकी सैन्य गतिविधियां
हाल के दिनों में जॉर्डन में अमेरिकी F-15 फाइटर जेट्स की गतिविधियों में तेजी देखी गई है। यहां पैट्रियट और THAAD (Terminal High Altitude Area Defense) जैसे एडवांस डिफेंस सिस्टम भी तैनात किए गए हैं। फिलहाल जॉर्डन में करीब 4,000 अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं, जो इस बात के संकेत हैं कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका जॉर्डन को ऑपरेशनल बेस के तौर पर इस्तेमाल कर सकता है।
खाड़ी देशों का इनकार, फिर भी ट्रंप प्रशासन अड़ा
दरअसल, खाड़ी देशों ने अप्रैल 2025 में ही अमेरिका को साफ संदेश दे दिया था कि वे ईरान पर हमले के लिए न तो अपना एयरस्पेस देंगे और न ही रिफ्यूलिंग या रेस्क्यू ऑपरेशन की इजाजत देंगे। यह ट्रंप प्रशासन के लिए बड़ा झटका था।
इसके बावजूद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मई 2025 में खाड़ी देशों के दौरे पर पहुंचे। माना जाता है कि इस दौरान उन्होंने सहयोगियों को मनाने की कोशिश की, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। हालांकि इस यात्रा में कतर, यूएई और सऊदी अरब के साथ हथियारों और रक्षा सौदों पर बड़े समझौते जरूर हुए।
डियागो गार्शिया से हुआ हमला
खाड़ी देशों के सहयोग से इनकार के बाद अमेरिका को अपने दूसरे रणनीतिक एयरबेस डियागो गार्शिया का इस्तेमाल करना पड़ा। यहीं से 22 जून 2025 को ईरान के न्यूक्लियर ठिकानों पर हमला किया गया। इसके बाद से ही ईरान और अमेरिका के बीच टकराव जंग के मुहाने पर खड़ा नजर आने लगा।
ईरान में प्रदर्शन और अमेरिका की रणनीति
इसी दौरान ईरान में आर्थिक और सैन्य दबाव के बीच बड़े पैमाने पर सरकार विरोधी प्रदर्शन शुरू हो गए। अली खामेनेई को सत्ता से हटाने की मांग तेज हो गई। इन प्रदर्शनों को दबाने के लिए ईरानी शासन ने सख्त कदम उठाए, लेकिन अमेरिका और इजरायल ने इसे सत्ता परिवर्तन का एक और मौका माना।
हफ्तों की बयानबाजी और चेतावनियों के बाद ट्रंप प्रशासन हमले के बेहद करीब पहुंच गया था, लेकिन आखिरी वक्त पर कदम पीछे खींच लिया गया। इसकी सबसे बड़ी वजह यही रही कि खाड़ी देशों ने एयरस्पेस इस्तेमाल की अनुमति नहीं दी।
खाड़ी देशों की दूरी से बदला गेम
अमेरिका चाहता था कि यमन में हूती विद्रोहियों पर किए गए हमलों को ताकत के प्रदर्शन के तौर पर इस्तेमाल कर ईरान को परमाणु समझौते पर बातचीत के लिए मजबूर किया जाए। लेकिन जब ईरान को यह साफ संदेश मिला कि अरब देश अमेरिका के साथ नहीं हैं, तो उसने बातचीत को और लंबा खींचने की रणनीति अपनाई।
कुल मिलाकर, सऊदी-UAE-कतर की दूरी ने मिडिल ईस्ट की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या जॉर्डन अमेरिका का खुलकर साथ देता है, या फिर वॉशिंगटन इस बार भी मिडिल ईस्ट में लगभग अकेला पड़ जाता है।
एंटरटेनमेंट
50,000 फैंस के साथ दिल्ली में होगा Karan Aujla का लाइव कॉन्सर्ट, ट्रैफिक पुलिस ने जारी की एडवाइजरी
होली से पहले दिल्ली में पंजाबी पॉप सुपरस्टार करण औजला का बड़ा लाइव म्यूजिक कॉन्सर्ट होने जा रहा है। यह कॉन्सर्ट 28 फरवरी को जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम (JLN Stadium) में आयोजित होगा, जिसमें हजारों फैंस के पहुंचने की उम्मीद है। इस वजह से दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने स्टेडियम के आसपास विशेष ट्रैफिक एडवाइजरी जारी की है। ट्रैफिक प्लान शाम 4 बजे से रात 10 बजे तक लागू रहेगा।
करण औजला का लाइव कॉन्सर्ट
कॉन्सर्ट “P-POP CULTURE INDIA TOUR 2026” का हिस्सा है और इसमें करीब 50,000 फैंस के पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है। बड़े इवेंट को देखते हुए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने स्टेडियम के आसपास ट्रैफिक जाम और अव्यवस्था से बचने के लिए संपूर्ण ट्रैफिक प्लान बनाया है।
ट्रैफिक रूट और रोड क्लोजर
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने बताया कि विशेष रूप से BP मार्ग (बिश्मा पितामह मार्ग), लोधी रोड और JLN स्टेडियम के आसपास की सड़कों पर शाम 4 बजे से रात 11 बजे तक भारी वाहनों की एंट्री प्रतिबंधित रहेगी।
इसके अलावा, इन स्थानों पर रूट डायवर्ट लागू रहेगा:
-JLN रेड लाइट
-सेवा नगर बस डिपो रेड लाइट
-5th एवेन्यू रोड (डबल स्टोरी मार्केट/धोबी घाट)
-प्रगति विहार रेड लाइट
-लाला लाजपत राय मार्ग टी-पॉइंट
-JLN गेट नंबर 5 के पास बारापुल्लाह कट
-जंगपुरा मेट्रो स्टेशन/सूचना भवन टी-पॉइंट
फैंस और आम नागरिकों के लिए सलाह
ट्रैफिक पुलिस ने लोगों से कहा है कि 28 फरवरी की शाम BP मार्ग, लोधी रोड और स्टेडियम के आसपास की सड़कों पर जाने से बचें। एयरपोर्ट या रेलवे स्टेशन जाने के लिए अतिरिक्त समय लेकर निकलें। कॉन्सर्ट में शामिल होने वाले फैंस को मेट्रो का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है।JLN स्टेडियम मेट्रो स्टेशन (वायलेट लाइन) सबसे सुविधाजनक विकल्प है।
देश
Q3 में 7.8% की रफ्तार से दौड़ी भारतीय अर्थव्यवस्था, नए बेस ईयर से जारी हुए आंकड़े
भारत की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूती दिखा रही है। सरकार द्वारा जारी ताजा जीडीपी आंकड़ों के अनुसार चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही (Q3) में देश की ग्रोथ रेट 7.8 प्रतिशत रही है। यह पिछले साल की समान अवधि के 7.4 प्रतिशत से अधिक है, हालांकि सितंबर तिमाही के 8.4 प्रतिशत के मुकाबले थोड़ी कम दर्ज की गई है।
वित्त वर्ष 2026 के लिए जीडीपी अनुमान पहले ही संशोधित किए जा चुके हैं। पहले 7.1 प्रतिशत का अनुमान था, जिसे बढ़ाकर 7.6 प्रतिशत कर दिया गया है।
GDP आंकड़ों की प्रमुख बातें
इस बार जीडीपी के आंकड़े नई सीरीज के तहत जारी किए गए हैं। बेस ईयर को 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर दिया गया है। जनवरी 2026 तक के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक देश का राजकोषीय घाटा 9.81 लाख करोड़ रुपये रहा, जबकि चालू वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों में कुल सरकारी खर्च 36.90 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
क्या होता है बेस ईयर?
राष्ट्रीय आय के वार्षिक और तिमाही अनुमान अब न्यू नेशनल इनकम सीरीज के तहत जारी किए जा रहे हैं। पहले 2011-12 को आधार वर्ष माना जाता था, लेकिन अब 2022-23 को नया बेस ईयर बनाया गया है। आधार वर्ष वह समय अवधि होती है, जिसके मूल्य और उत्पादन स्तर को मानक मानकर आगे की वृद्धि दर की तुलना की जाती है।
तिमाही आंकड़ों में संशोधन
जुलाई-सितंबर 2025-26 तिमाही की ग्रोथ रेट को संशोधित कर 8.4 प्रतिशत कर दिया गया है, जो पहले 8.2 प्रतिशत आंकी गई थी। वहीं अप्रैल-जून तिमाही की ग्रोथ रेट को 7.8 प्रतिशत से घटाकर 6.7 प्रतिशत कर दिया गया है।
आधार वर्ष में बदलाव से आर्थिक गतिविधियों के आकलन का दायरा व्यापक होता है। इससे नई आर्थिक संरचना के अनुरूप आंकड़ों को अपडेट किया जाता है और अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति को ज्यादा सटीक तरीके से समझा जा सकता है।
देश
‘केजरीवाल भ्रष्ट नहीं है…’, मीडिया के सामने फूट-फूटकर रोए Arvind Kejriwal; क्लीन चिट मिलते ही दिया वायरल बयान
आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को कथित शराब नीति मामले में बड़ी राहत मिली है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों से बरी कर दिया है। फैसले के बाद मीडिया से बात करते हुए केजरीवाल भावुक हो गए।
भावुक हुए केजरीवाल
उन्होंने कहा, “हमने पहले ही कहा था कि सच्चाई की जीत होगी। आज सच की जीत हुई है। मुझे भारतीय न्याय प्रणाली पर पूरा भरोसा था कि न्याय जरूर मिलेगा।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनकी पार्टी को राजनीतिक रूप से निशाना बनाया गया और झूठे आरोपों के जरिए बड़े नेताओं को जेल भेजा गया।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी, CBI के सबूतों पर सवाल
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि जांच एजेंसी आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त और ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सकी। चार्जशीट में भी कई खामियां पाई गईं और किसी गवाह या दस्तावेज से आरोप पुष्ट नहीं हुए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिना ठोस प्रमाण के केवल आरोपों के आधार पर किसी के खिलाफ मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। निष्पक्ष सुनवाई के लिए निष्पक्ष जांच जरूरी है, लेकिन इस मामले में अभियोजन पक्ष अपना केस साबित करने में विफल रहा।
‘कोई आपराधिक साजिश साबित नहीं’
अदालत ने यह भी कहा कि सीबीआई द्वारा लगाए गए आरोपों में आपराधिक साजिश का कोई ठोस आधार नहीं मिला। न तो केजरीवाल और न ही सिसोदिया के खिलाफ प्रत्यक्ष सबूत पेश किए जा सके। इन्हीं कारणों से कोर्ट ने दोनों नेताओं को बरी करने का आदेश दिया। फैसले के बाद ‘आप’ कार्यकर्ताओं ने इसे न्याय और सच्चाई की जीत बताया।
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