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बंगाल में 300 करोड़ रुपए में तैयार होगी बाबरी जैसी मस्जिद, निर्माण की शुरआत देखने पहुंचे सैंकड़ों मौलवी

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पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद जैसी संरचना के निर्माण की घोषणा के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। जनता उन्नयन पार्टी के प्रमुख और पूर्व टीएमसी नेता हुमायूं कबीर ने ऐलान किया है कि अयोध्या की तर्ज पर यहां मस्जिद निर्माण का कार्य शुरू किया जाएगा। जानकारी के मुताबिक, दोपहर 12 बजे करीब 1200 मौलाना और धर्मगुरुओं की मौजूदगी में कुरान की तिलावत के साथ इस परियोजना की नींव रखी जानी है। करीब 300 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली इस मस्जिद को दो वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, हालांकि अब तक लगभग 6 करोड़ रुपये ही चंदे के रूप में जुटाए जाने की बात कही जा रही है।

2 वर्षों में पूरा करने का रखा गया लक्ष्य

इस घोषणा के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कड़ा रुख अपनाया है। बाराबंकी में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि बाबरी ढांचे के पुनर्निर्माण का सपना देखने वालों की मंशा कभी पूरी नहीं होगी। उन्होंने यह भी कहा कि देश में कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के लिए कोई स्थान नहीं है। साथ ही विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि अयोध्या में मंदिर निर्माण का संकल्प पूरा हो चुका है और इस पर कोई समझौता नहीं होगा।

राज्य प्रशासन पर दबाव बनाने का आरोप

मस्जिद निर्माण की पहल करने वाले हुमायूं कबीर ने राज्य प्रशासन पर दबाव बनाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि उन्हें रोकने की कोशिश की जा रही है, लेकिन वे अपने फैसले पर कायम हैं। दूसरी ओर, बंगाल पुलिस ने कबीर के परिजनों से जुड़े कुछ मामलों में कार्रवाई शुरू की है। रिपोर्ट्स के अनुसार, उनकी बेटी के ससुर की लगभग 10 करोड़ रुपये की संपत्ति को कथित ड्रग्स तस्करी के संदेह में जब्त किया गया है। इस कार्रवाई के बाद मस्जिद निर्माण के लिए जुटाए जा रहे फंड के स्रोत को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। हालांकि कबीर के परिवार ने इन आरोपों को राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है।

सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता बढ़ी

गौरतलब है कि अयोध्या विवाद पर 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए विवादित स्थल पर मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया था और मस्जिद के लिए वैकल्पिक जमीन आवंटित करने का निर्देश दिया था। ऐसे में मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद जैसी संरचना के निर्माण की घोषणा ने सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता बढ़ा दी है। कुछ संगठनों ने इस पहल का विरोध करने की बात कही है, जिसके चलते इलाके में एहतियात बरती जा रही है। प्रशासन ने कार्यक्रम के दौरान शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है।

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ब्रेन-डेड मरीज की पत्नी बनना चाहती है मां, HC का ऐतिहासिक कदम; दी खास अनुमति

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केरल हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश देते हुए अस्पताल को निर्देश दिया है कि वह ‘ब्रेन-डेड’ घोषित व्यक्ति के स्पर्म को निकालकर सुरक्षित रखे। इस फैसले से पत्नी को भविष्य में सहायक प्रजनन तकनीक (ART) के जरिए मां बनने का रास्ता मिल सकता है।

क्या है क्रायोप्रिजर्वेशन?

क्रायोप्रिजर्वेशन एक वैज्ञानिक तकनीक है, जिसमें स्पर्म, कोशिकाएं या भ्रूण को माइनस 196 डिग्री सेल्सियस या उससे भी कम तापमान पर लिक्विड नाइट्रोजन में संरक्षित किया जाता है। इससे जैविक नमूनों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

पत्नी की याचिका पर मिली राहत

यह मामला ब्रेन-डेड व्यक्ति की पत्नी द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। जस्टिस एम.बी. स्नेहलता ने सुनवाई के दौरान कोझिकोड के बेबी मेमोरियल अस्पताल को निर्देश दिया कि वह किसी मान्यता प्राप्त ART क्लिनिक के जरिए स्पर्म निकालकर उसे सुरक्षित रखे।

कोर्ट की सख्त शर्त

अदालत ने स्पष्ट किया कि असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (रेगुलेशन) एक्ट, 2021 के तहत फिलहाल सिर्फ स्पर्म निकालने और सुरक्षित रखने की अनुमति दी गई है। बिना कोर्ट की मंजूरी के आगे कोई प्रजनन प्रक्रिया नहीं की जा सकेगी।

बीमारी के बाद हुई गंभीर हालत

पत्नी के मुताबिक, उनके पति को पहले दो हफ्तों तक चिकनपॉक्स रहा, जिसके बाद उन्हें ‘सेरेब्रल वेनस थ्रोम्बोसिस’ (दिमाग की नसों में खून का थक्का) हो गया। हालत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां वे ब्रेन-डेड घोषित कर दिए गए और फिलहाल वेंटिलेटर पर हैं।

सहमति पर उठे कानूनी सवाल

ART कानून की धारा 22 के अनुसार, स्पर्म उपयोग के लिए संबंधित व्यक्ति की लिखित सहमति जरूरी होती है। लेकिन पत्नी ने अदालत को बताया कि मौजूदा स्थिति में पति से सहमति लेना संभव नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर देरी हुई तो स्पर्म सुरक्षित रखने का मौका हमेशा के लिए खत्म हो सकता है, जिससे उन्हें अपूरणीय नुकसान होगा।

अगली सुनवाई

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अदालत ने पत्नी को अंतरिम राहत दी है। अब इस केस की अगली सुनवाई 7 अप्रैल को होगी। यह फैसला सिर्फ एक केस नहीं, बल्कि कानून, नैतिकता और आधुनिक चिकित्सा के बीच संतुलन का एक अहम उदाहरण बन सकता है।

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संसद परिसर में अचानक बजा सुरक्षा अलार्म, CISF अलर्ट; क्या है हड़कंप का कारण?

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सोमवार को संसद भवन परिसर में अचानक सुरक्षा अलार्म बजने से कुछ समय के लिए स्थिति चिंताजनक हो गई। अलार्म बजते ही वहां तैनात सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड में आ गईं और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की क्विक रिएक्शन टीम (QRT) तुरंत मौके पर पहुंच गई।

तेज हवा से गिरा बूम बैरियर

सूत्रों के मुताबिक, तेज हवाओं के कारण संसद परिसर के एक प्रवेश द्वार पर लगा बूम बैरियर अचानक नीचे गिर गया। इससे सुरक्षा सेंसर सक्रिय हो गए और ऑटोमेटिक अलार्म बजने लगा। सुरक्षा व्यवस्था के तहत सिस्टम को ऐसा लगा कि कोई संदिग्ध वाहन या वस्तु परिसर में प्रवेश करने की कोशिश कर रही है, जिसके कारण अलार्म एक्टिव हो गया।

विजय चौक के पास हुआ घटनाक्रम

यह घटना संसद भवन परिसर के उस गेट पर हुई जो विजय चौक के पास स्थित है। अलार्म बजने के बाद कुछ समय के लिए वहां वाहनों की आवाजाही रोक दी गई थी। हालांकि शुरुआती जांच में किसी भी तरह के सुरक्षा खतरे की पुष्टि नहीं हुई और स्थिति स्पष्ट होने के बाद वाहनों की आवाजाही फिर से सामान्य कर दी गई।

तकनीकी गड़बड़ी की भी जांच

प्रारंभिक जांच में माना जा रहा है कि तेज हवा के कारण बूम बैरियर गिरा। हालांकि सुरक्षा एजेंसियां यह भी जांच कर रही हैं कि कहीं ऐसा इसलिए तो नहीं हुआ कि उस समय प्रवेश कर रही किसी गाड़ी के स्टिकर को सुरक्षा प्रणाली पढ़ नहीं पाई हो।

CISF के जिम्मे है संसद की सुरक्षा

गौरतलब है कि मई 2024 से संसद भवन परिसर की सुरक्षा केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के जिम्मे है। दिसंबर 2023 में हुए सुरक्षा उल्लंघन के बाद यह जिम्मेदारी CISF को सौंपी गई थी। गृह मंत्रालय के अधीन काम करने वाली इस अर्धसैनिक बल के करीब 3,300 जवान संसद परिसर की सुरक्षा में तैनात हैं, जिनमें फायर फाइटर्स और डिजास्टर रिस्पॉन्स टीम भी शामिल हैं।

2023 में भी हुई थी बड़ी सुरक्षा चूक

13 दिसंबर 2023 को संसद की सुरक्षा में बड़ी सेंध लगी थी। उस दिन लोकसभा की विजिटर गैलरी से सागर शर्मा और मनोरंजन डी सदन के अंदर कूद गए थे। उन्होंने पीले रंग का धुआं फैलाने के लिए स्मोक कैन का इस्तेमाल किया और नारे लगाते हुए सदन में अफरा-तफरी मचा दी थी। वहीं संसद भवन के बाहर भी उनके कुछ साथियों ने स्मोक गन से धुआं फैलाने की कोशिश की थी। सुरक्षा बलों ने तुरंत सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। इस मामले में यूएपीए (UAPA) जैसे कड़े आतंकवाद विरोधी कानून के तहत केस दर्ज किया गया था।

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एंटरटेनमेंट

Saand Ki Aankh वाली शूटर दादी प्रकाशी तोमर की फटी नाक की नस, नोएडा के अस्पताल में हुईं भर्ती

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उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के जौहड़ी गांव की विश्वविख्यात शूटर दादी प्रकाशी तोमर की तबीयत अचानक बिगड़ गई है। बताया जा रहा है कि उनकी नाक की नस फटने के कारण काफी देर तक खून बहता रहा, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। परिवार के लोगों ने उन्हें नोएडा के कैलाश अस्पताल में भर्ती कराया है, जहां डॉक्टर उनकी देखरेख कर रहे हैं।

रात में अचानक नाक से बहने लगा खून

शूटर दादी के बेटे रामबीर सिंह ने बताया कि शनिवार रात करीब दो बजे अचानक उनकी नाक से खून बहना शुरू हो गया। काफी देर तक खून नहीं रुका और वह बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ीं। इसके बाद परिवार वाले उन्हें तुरंत बड़ौत के एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक इलाज किया। कुछ समय के लिए आराम मिलने के बाद उन्हें घर ले आया गया।

सुबह फिर बिगड़ी हालत

रविवार सुबह उनकी नाक से दोबारा खून बहने लगा। इसके बाद परिवार के लोग उन्हें फिर से बड़ौत के अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन इस बार भी खून रुक नहीं रहा था। डॉक्टरों ने स्थिति को देखते हुए उन्हें बेहतर इलाज के लिए दिल्ली-एनसीआर रेफर कर दिया। इसके बाद उनकी बेटी और अंतरराष्ट्रीय शूटर सीमा तोमर उन्हें नोएडा के कैलाश अस्पताल लेकर पहुंचीं, जहां उनका इलाज जारी है।

फिलहाल हालत स्थिर

सीमा तोमर ने बताया कि डॉक्टर लगातार उनकी निगरानी कर रहे हैं और फिलहाल शूटर दादी की हालत स्थिर बताई जा रही है।

‘सांड की आंख’ से मिली थी नई पहचान

गौरतलब है कि शूटर दादी प्रकाशी तोमर के जीवन संघर्ष पर बॉलीवुड फिल्म ‘सांड की आंख’ भी बन चुकी है। इस फिल्म में अभिनेत्री तापसी पन्नू ने उनका किरदार निभाया था। दादी की तबीयत खराब होने की खबर सामने आने के बाद उनके प्रशंसक और शुभचिंतक उनकी सलामती की दुआ कर रहे हैं।

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