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ईरान संकट से पाकिस्तान में आर्थिक झटका, पेट्रोल 321 रुपये लीटर; स्कूल बंद और ऑफिस सीमित

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ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद शुरू हुए अमेरिका-इजराइल-ईरान संघर्ष का असर अब पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में भी दिखाई देने लगा है। इलाके में आर्थिक हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं और आम लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

पेट्रोल 321 रुपये प्रति लीटर के पार

युद्ध के कारण तेल की आपूर्ति प्रभावित होने से गिलगित-बाल्टिस्तान में पेट्रोल की कीमतों में भारी उछाल आया है। हाल ही में पेट्रोल के दाम में करीब 55 रुपये की बढ़ोतरी हुई है, जिसके बाद इसकी कीमत 321 रुपये प्रति लीटर से भी अधिक हो गई है। पेट्रोल महंगा होने से माल ढुलाई की लागत तेजी से बढ़ गई है। इसका सीधा असर रोजमर्रा की जरूरत की चीजों पर पड़ रहा है और आटा, चीनी तथा सब्जियों जैसी बुनियादी वस्तुओं के दाम भी तेजी से बढ़ गए हैं। सामाजिक कार्यकर्ता शफका अली इंकलाबी का कहना है कि यह स्थिति गरीब और मध्यम वर्ग के लिए लगभग “आर्थिक मौत” जैसी बनती जा रही है।

सरकार ने लागू किया ‘वॉर ऑस्टेरिटी प्लान’

ईंधन की भारी कमी और बढ़ती कीमतों को देखते हुए पाकिस्तान सरकार ने ‘वॉर ऑस्टेरिटी प्लान’ लागू कर दिया है। इसके तहत पूरे पाकिस्तान और गिलगित-बाल्टिस्तान में स्कूलों को दो सप्ताह के लिए बंद कर दिया गया है। शिक्षा को ऑनलाइन माध्यम से जारी रखने की कोशिश की जा रही है, लेकिन क्षेत्र में कमजोर इंटरनेट कनेक्टिविटी इसके रास्ते में बड़ी बाधा बन रही है। इसके अलावा ईंधन बचाने के लिए सरकारी दफ्तरों में कर्मचारियों को सिर्फ चार दिन ही कार्यालय आने के निर्देश दिए गए हैं, जबकि कई जगह वर्क फ्रॉम होम (WFH) की व्यवस्था लागू की गई है।

खामेनेई की मौत के बाद विरोध प्रदर्शन

आयतुल्लाह खामेनेई की मृत्यु के बाद पाकिस्तान के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन भी देखने को मिले हैं। कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पें हुई हैं। स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए प्रशासन ने गिलगित और स्कर्दू जैसे प्रमुख शहरों में समय-समय पर कर्फ्यू लगाया है और कई इलाकों में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी गई हैं।

खाद्य संकट का खतरा

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि युद्ध जल्द खत्म नहीं हुआ तो गिलगित-बाल्टिस्तान में खाद्य संकट पैदा हो सकता है। क्षेत्र की दुर्गम भौगोलिक स्थिति के कारण यहां आवश्यक सामान मुख्य रूप से ट्रकों के जरिए पहुंचता है। पेट्रोल की कीमतों में तेज वृद्धि इस आपूर्ति प्रणाली को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है और इससे खाद्य आपूर्ति बाधित होने का खतरा बढ़ गया है।

सऊदी अरब दौरे पर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री

इन हालात के बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ गुरुवार को सऊदी अरब की एक संक्षिप्त आधिकारिक यात्रा पर रवाना हुए। पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच पिछले साल सितंबर में पारस्परिक रक्षा समझौता हुआ था, जिसके तहत किसी तीसरे देश के हमले की स्थिति में दोनों देशों ने एक-दूसरे की रक्षा करने की प्रतिबद्धता जताई थी। हालांकि अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमले शुरू किए जाने और ईरान द्वारा खाड़ी देशों में जवाबी कार्रवाई के बाद क्षेत्रीय समीकरण बदल गए हैं। ईरान के साथ पाकिस्तान के करीबी संबंध और भौगोलिक निकटता को देखते हुए अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या पाकिस्तान सऊदी अरब के प्रति अपने रक्षा दायित्वों को निभा पाएगा, या फिर वह इस जटिल भू-राजनीतिक स्थिति में संतुलन बनाने की कोशिश करेगा।

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