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मंदिरों में जानवरों की बलि पर लगेगी रोक? SC ने मांगा केंद्र का पक्ष

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मंदिरों में धार्मिक परंपराओं के नाम पर पशुओं की बलि पर रोक लगाने की मांग से जुड़ी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। अदालत ने इस मामले में पशुपालन मंत्रालय को नोटिस जारी कर चार हफ्ते के भीतर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। इस मामले की सुनवाई जस्टिस Vikram Nath और जस्टिस Sandeep Mehta की बेंच ने की।

जनहित याचिका में उठाया गया मुद्दा

यह जनहित याचिका (PIL) एडवोकेट Shruti Bisht की ओर से दाखिल की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि मंदिरों में होने वाली पशु बलि के मामलों में सरकार की ओर से पर्याप्त और प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है। याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट पहले भी कई फैसलों में यह स्पष्ट कर चुका है कि हर जीव को जीवन का अधिकार प्राप्त है।

संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला

याचिका में संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि जीवन का अधिकार केवल मनुष्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि पशु-पक्षियों सहित सभी जीवों के जीवन की रक्षा भी इसी सिद्धांत के अंतर्गत आती है। इस आधार पर अदालत से आग्रह किया गया है कि पशुओं को भी उचित कानूनी संरक्षण दिया जाए।

कानून में बदलाव की मांग

याचिका में प्रिवेंशन ऑफ क्रुएल्टी टू एनिमल्स एक्ट, 1960 की धारा 28 में संशोधन की मांग की गई है। इस कानून के अनुसार यदि किसी धार्मिक परंपरा के तहत किसी जानवर की हत्या की जाती है, तो उसे अपराध नहीं माना जाता। याचिकाकर्ता ने इस प्रावधान को चुनौती देते हुए अदालत से अपील की है कि धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान होने वाली पशु बलि पर रोक लगाने के लिए सख्त कानून बनाए जाएं।

कई क्षेत्रों में आज भी जारी है यह परंपरा

याचिका में यह भी कहा गया है कि दुनिया के कई हिस्सों में आज भी पशु बलि की परंपरा जारी है। इसमें इंडोनेशिया के बाली, नेपाल और भारत के कुछ क्षेत्र जैसे हिमालयी इलाके, पूर्वोत्तर भारत, ओडिशा, बंगाल, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के कुछ हिस्से शामिल हैं। आमतौर पर बलि के लिए युवा और स्वस्थ नर पशुओं को चुना जाता है।

जागरूकता और सख्त कानून की मांग

याचिका में इस प्रथा को समाप्त करने के लिए व्यापक कदम उठाने की जरूरत बताई गई है। इसके तहत कड़े कानून बनाने, लोगों में जागरूकता बढ़ाने और गैर-सरकारी संगठनों के साथ मिलकर अभियान चलाने की सिफारिश की गई है। अब इस मामले में केंद्र सरकार के जवाब के बाद सुप्रीम कोर्ट आगे की सुनवाई करेगा।

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