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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा एक्शन, झूठी शिकायत करने वालों पर कड़ा रुख

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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, सभी राज्य सरकारों और National Human Rights Commission (NHRC) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। यह नोटिस वकील Ashwini Upadhyay द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) पर जारी किया गया है। याचिका में मांग की गई है कि सभी पुलिस स्टेशनों और सार्वजनिक संस्थानों में स्पष्ट रूप से डिस्प्ले लगाया जाए, जिसमें यह बताया जाए कि झूठी शिकायत, आरोप, बयान या साक्ष्य देने पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत कड़ी सजा हो सकती है।

फर्जी मामलों से निर्दोषों की सुरक्षा पर जोर

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस PIL का उद्देश्य उन निर्दोष नागरिकों के अधिकारों और गरिमा की रक्षा करना है, जो झूठे मामलों में फंसाए जाते हैं। याचिका में तर्क दिया गया है कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) में झूठी शिकायत दर्ज कराने वालों के खिलाफ दंड का स्पष्ट प्रावधान है, जबकि पहले इंडियन पीनल कोड (IPC) में इस तरह की सख्त व्यवस्था नहीं थी। PIL में यह भी मांग की गई है कि शिकायत दर्ज कराने वाले व्यक्ति को पहले से ही यह जानकारी दी जाए कि यदि उसकी शिकायत या आरोप झूठा पाया गया, तो उसे कानूनी दंड का सामना करना पड़ेगा।

NCERT को भी सुप्रीम कोर्ट की फटकार

इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने National Council of Educational Research and Training (NCERT) को भी कड़ी फटकार लगाई है। आठवीं कक्षा की किताब में ‘Judiciary Corruption’ नाम से एक चैप्टर जोड़े जाने पर कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस Surya Kant की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि न्यायपालिका को बदनाम करने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जा सकती। कोर्ट ने पूछा कि किताब में यह अध्याय किस आधार पर जोड़ा गया। बेंच ने कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए इसे गंभीर मामला बताया। साथ ही, काउंसिल की इस कार्रवाई को अदालत की अवमानना मानते हुए अवमानना नोटिस भी जारी किया गया है।

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