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Viral Video: वृंदावन में विदेशी महिला के साथ होली में बदसलूकी? आंखों में फेंका पत्थर मिला गुलाल, मचा बवाल

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होली के मौके पर सोशल मीडिया पर कई तरह के वीडियो सामने आ रहे हैं। कुछ वीडियो त्योहार की खुशियों और रंगों को दिखाते हैं, तो कुछ ऐसे भी हैं जो सोचने पर मजबूर कर देते हैं। हाल ही में एक ऐसा ही वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें ऑस्ट्रिया की एक महिला पर्यटक ब्रिता ने वृंदावन में अपने साथ हुए एक दर्दनाक अनुभव को साझा किया है।

होली देखने आई थीं भारत

ब्रिता बड़ी उम्मीदों के साथ भारत आई थीं ताकि यहां की मशहूर होली का अनुभव कर सकें। जब वह वृंदावन पहुंचीं, तो शुरुआत में सब कुछ उन्हें बेहद खास और जादुई लगा। उन्होंने अपने वीडियो में बताया कि उन्होंने रंग-बिरंगे स्कार्फ खरीदे, भांग का स्वाद लिया, मंदिरों के दर्शन किए और बंदरों की शरारतों को भी करीब से देखा। चारों तरफ “राधे-राधे” की गूंज और होली का उत्साह था। उन्हें लगा कि यह उनकी जिंदगी का सबसे यादगार अनुभव बनने वाला है।

भीड़ का माहौल अचानक बदल गया

लेकिन जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा, माहौल बदलने लगा। ब्रिता के मुताबिक, जो भीड़ पहले धार्मिक उत्साह में डूबी दिख रही थी, वही बाद में बेकाबू हो गई। कई लोग जबरदस्ती रंग लगाने लगे और भीड़ का फायदा उठाकर बदतमीजी करने लगे।

आंखों में फेंका गया पत्थर मिला गुलाल

ब्रिता ने बताया कि उनके साथ सबसे बुरा तब हुआ जब वह सड़क से गुजर रही थीं। अचानक किसी ने उनकी आंखों में सीधे गुलाल फेंक दिया। लेकिन यह सिर्फ रंग नहीं था, बल्कि उसमें छोटे-छोटे पत्थर भी मिले हुए थे। पत्थर सीधे उनकी आंखों में लगे, जिससे उन्हें तेज जलन होने लगी और कुछ देर के लिए उन्हें दिखाई देना बंद हो गया। वह दर्द से सड़क पर ही रोने लगीं और किसी तरह अपनी आंखें साफ कीं। घटना के कई दिन बाद भी ब्रिता का कहना है कि उनकी आंखों की रोशनी पूरी तरह ठीक नहीं हुई है और अभी भी धुंधलापन महसूस हो रहा है।

वीडियो हुआ वायरल, लोगों ने मांगी माफी

ब्रिता ने जब अपना अनुभव इंस्टाग्राम पर साझा किया, तो उनका वीडियो तेजी से वायरल हो गया। हजारों भारतीयों ने उनके पोस्ट पर कमेंट कर उनसे माफी मांगी और कहा कि भारत की संस्कृति मेहमानों का सम्मान करना सिखाती है। कई लोगों ने यह भी लिखा कि भारत में भी बहुत सी महिलाएं सड़कों पर होली खेलने से बचती हैं। अधिकतर लोग अपने घरों या परिचितों के साथ ही सुरक्षित माहौल में होली मनाना पसंद करते हैं।

‘बुरा न मानो होली है’ पर उठे सवाल

इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर एक बार फिर उस कहावत पर सवाल उठने लगे हैं, जो अक्सर होली के समय सुनने को मिलती है—“बुरा न मानो होली है।” लोगों का कहना है कि क्या इस एक लाइन के नाम पर किसी के साथ बदतमीजी या हिंसा को सही ठहराया जा सकता है?

भारत की छवि पर पड़ता है असर

पिछले कुछ दिनों में ऐसे कई वीडियो सामने आए हैं, जिनमें विदेशी पर्यटकों के साथ जबरदस्ती रंग लगाने या धक्का-मुक्की करने की घटनाएं दिखी हैं। जब ये वीडियो दुनिया भर में फैलते हैं, तो भारत की छवि पर भी नकारात्मक असर पड़ता है।

त्योहार की साख बचाना जरूरी

होली रंगों, खुशी और भाईचारे का त्योहार है। लेकिन अगर इसमें जबरदस्ती और डर शामिल हो जाए, तो इसकी असली भावना खत्म हो जाती है। खासकर वृंदावन जैसे धार्मिक स्थान पर ऐसी घटनाएं होना चिंता की बात है। हर साल हजारों विदेशी पर्यटक भारत की संस्कृति और त्योहारों को करीब से देखने आते हैं। ऐसे में यह जरूरी है कि उन्हें सुरक्षित माहौल मिले और “अतिथि देवो भव” की भावना सच में दिखाई दे।

सैलानियों के लिए जरूरी सावधानी

ब्रिता की कहानी उन लोगों के लिए भी एक सीख है जो पहली बार भारत में होली का अनुभव करने आते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भीड़भाड़ वाली जगहों के बजाय सुरक्षित और आयोजित कार्यक्रमों में शामिल होना बेहतर होता है। इसके अलावा आंखों की सुरक्षा के लिए चश्मा पहनना और अनजान लोगों से दूरी बनाए रखना भी जरूरी है।

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