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नींबू की चाय: ठंड के मौसम में इसका सेवन करना उचित है या नहीं, जानकारी प्राप्त करें।
नींबू की चाय: ठंड के मौसम में लोग चाय का आनंद उठाते हैं। कुछ लोग अपनी सेहत के प्रति सजग रहते हुए नींबू की चाय का सेवन करते हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि सर्दियों में इसका सेवन कितना उचित है। नींबू की चाय में विटामिन सी, पोटैशियम और भरपूर एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो कि इसके कई फायदे प्रदान करते हैं। लेकिन सर्दियों में इसका इस्तेमाल शरीर पर क्या असर डालता है, इसके बारे में जानिए इस लेख में।
क्या सर्दी में नींबू की चाय पीना सही है?
यदि आप ठंडे मौसम में दूधवाली या पत्ते वाली चाय नहीं पीना चाहते, तो नींबू की चाय एक बेहतरीन विकल्प है। यह सेहत के लिए अत्यधिक लाभकारी होती है। इसमें एंटी-वायरल गुण पाए जाते हैं, जो सर्दियों में होने वाले खांसी, जुकाम और बुखार जैसे रोगों से सुरक्षा करते हैं। इसका सेवन यदि निहार मुंह किया जाए तो यह पेट और पाचन के लिए लाभदायक होता है। यदि आप इसमें अदरक मिलाकर पीते हैं, तो यह शरीर को गर्म रखेगी और ठंड लगने से बचाएगी। बिना चीनी के नींबू की चाय पीने से यह वजन कम करने में मदद करती है। यह शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करती है और मेटाबॉलिज्म को सही रखती है, इसलिए आप सर्दियों में बढ़ते वजन से बच सकते हैं।
नींबू की चाय कैसे बनाई जाए?
नींबू की चाय ठंड के मौसम के लिए एक बेहतरीन विकल्प है। इस दौरान यह जानना जरूरी है कि इसका सेवन दिन में कितनी बार करना चाहिए? तो आपको बता दें, इसे 3 से 4 कप तक पिया जा सकता है। लेकिन ध्यान रखें कि चीनी या शहद का उपयोग कम से कम हो। आप इसे खाने के 30 मिनट बाद पी सकते हैं। नींबू की चाय बनाने के लिए उबलते हुए पानी में अदरक को कूटकर डालें, फिर उसमें आधा नींबू डालें। इसके बाद सीमित मात्रा में शहद मिला सकते हैं। यह सर्दियों की सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है।
किसे नींबू की चाय से बचना चाहिए?
यदि आपको उच्च रक्तचाप, अल्सर या एसिडिटी है, या आप गर्भवती या दूध पिलाने वाली मां हैं, तो इसका सेवन करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
अस्वीकृति: यह लेख और इसमें दिए गए स्वास्थ्य संबंधी सुझाव केवल सामान्य जानकारी प्रदान करते हैं। यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं है। इस लेख में बताए गए तरीकों और दावों को केवल सुझाव के रूप में लिया जाना चाहिए; डीएनपी इंडिया हिंदी न तो इनकी पुष्टि करता है और न ही इनका खंडन करता है। किसी भी सुझाव/उपचार/दवा/आहार का पालन करने से पहले हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लें।
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90% लोग नहीं जानते डायबिटीज की असली वजह, इन 5 कारणों से बढ़ता है खतरा
आज के समय में Diabetes यानी मधुमेह एक आम लेकिन गंभीर बीमारी बन चुकी है। डायबिटीज चाहे किसी भी प्रकार की हो, इसमें शरीर का ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है, जो आगे चलकर कई स्वास्थ्य समस्याओं की वजह बन सकता है। अक्सर लोगों को लगता है कि ज्यादा चीनी खाने से ही डायबिटीज होती है, लेकिन ऐसा पूरी तरह सही नहीं है। डायबिटीज होने के पीछे कई अन्य कारण भी जिम्मेदार होते हैं।
90% लोगों को नहीं पता असली वजह
डॉक्टर के अनुसार करीब 90 प्रतिशत लोग डायबिटीज के असली कारणों से अनजान हैं। कई लोग सोचते हैं कि मीठा या चावल छोड़ देने से डायबिटीज से बचा जा सकता है, लेकिन बीमारी का कारण सिर्फ यही नहीं होता। डायबिटीज का खतरा बढ़ाने वाले कई लाइफस्टाइल और हेल्थ से जुड़े फैक्टर भी होते हैं, जिन्हें नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।
पेट की चर्बी और शारीरिक निष्क्रियता
पेट के आसपास बढ़ने वाली चर्बी भी डायबिटीज का बड़ा कारण बन सकती है। जब पेट की चर्बी बढ़ती है तो शरीर में ऐसे हार्मोन निकलते हैं जो इंसुलिन के काम को प्रभावित करते हैं। इसके अलावा अगर व्यक्ति शारीरिक रूप से सक्रिय नहीं रहता और लंबे समय तक बैठे रहने की आदत है, तो इससे भी डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है।
ज्यादा हाई-कार्ब फूड खाना
बार-बार हाई कार्बोहाइड्रेट वाला खाना भी डायबिटीज का एक बड़ा कारण माना जाता है। अगर कोई व्यक्ति हर 2–3 घंटे में कुछ न कुछ खाता रहता है, तो शरीर में बार-बार इंसुलिन रिलीज होता है। ऐसे में धीरे-धीरे पैंक्रियाज पर दबाव बढ़ता है और समय के साथ इसकी कार्यक्षमता कमजोर पड़ सकती है।
नींद की कमी और ज्यादा तनाव
पर्याप्त नींद न लेना और लगातार तनाव में रहना भी डायबिटीज का जोखिम बढ़ा सकता है। नींद की कमी से शरीर में कॉर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जो इंसुलिन के काम में बाधा डाल सकता है।
जेनेटिक कारण
अगर परिवार में किसी को पहले से डायबिटीज रही है, तो अन्य सदस्यों में भी इसका खतरा ज्यादा हो सकता है। यानी जेनेटिक्स भी इस बीमारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
डायबिटीज के शुरुआती लक्षण
डायबिटीज के शुरुआती लक्षणों को पहचानना बहुत जरूरी होता है। इनमें शामिल हैं-बार-बार प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, लगातार थकान और कमजोरी महसूस होना, धुंधला दिखाई देना, चोट लगने पर घाव का देर से भरना, बार-बार अलग-अलग तरह के संक्रमण होना। अगर ये लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है, ताकि समय रहते बीमारी को कंट्रोल किया जा सके।
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बाल रंगने से पहले सावधान! हेयर डाई से हो सकता है नुकसान, इस्तेमाल से पहले जान लें ये जरूरी बातें
आजकल कम उम्र में ही बाल सफेद होने की समस्या तेजी से बढ़ रही है। बदलती लाइफस्टाइल, बढ़ता तनाव, गलत खानपान और प्रदूषण को इसके प्रमुख कारण माना जाता है। ऐसे में कई लोग सफेद बालों को छिपाने के लिए हेयर डाई का सहारा लेते हैं। पहले जहां हेयर डाई का इस्तेमाल अधिकतर उम्रदराज लोग करते थे, वहीं अब युवा भी नियमित रूप से इसका उपयोग करने लगे हैं। बाजार में केमिकल बेस्ड डाई, हर्बल डाई और इंस्टेंट कलर जैसे कई विकल्प उपलब्ध हैं, जिन्हें लोग घर पर ही आसानी से इस्तेमाल कर लेते हैं। हालांकि, बालों को रंगते समय अक्सर लोग सिर्फ रंग पर ध्यान देते हैं और यह भूल जाते हैं कि हेयर डाई का असर त्वचा पर भी पड़ सकता है।
त्वचा पर भी पड़ सकता है हेयर डाई का असर
बालों में डाई लगाते समय यह अक्सर माथे, कानों और गर्दन के आसपास की त्वचा के संपर्क में आ जाती है। इससे स्किन से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। डॉक्टरों के मुताबिक, हेयर डाई में मौजूद कई केमिकल्स त्वचा के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। कुछ लोगों को इसके कारण एलर्जी, खुजली और जलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
एलर्जी, रैशेज और सूजन का खतरा
डॉक्टर बताते हैं कि जब हेयर डाई त्वचा के संपर्क में आती है, तो यह स्किन को सेंसिटिव बना सकती है। कई मामलों में त्वचा पर लालपन, रैशेज और सूजन भी देखने को मिलती है। अगर लंबे समय तक या बार-बार हेयर डाई का इस्तेमाल किया जाए, तो इससे त्वचा की प्राकृतिक नमी भी प्रभावित हो सकती है। इसके कारण त्वचा रूखी और बेजान लगने लगती है। कुछ लोगों को डाई लगाने के बाद सिर की त्वचा में जलन या चुभन भी महसूस हो सकती है, खासकर उन लोगों को जिनकी त्वचा पहले से संवेदनशील होती है।
हेयर डाई लगाते समय रखें ये सावधानियां
हेयर डाई का इस्तेमाल करते समय कुछ आसान सावधानियां अपनाकर त्वचा को नुकसान से बचाया जा सकता है। डाई लगाने से पहले हमेशा पैच टेस्ट जरूर करें। माथे, कान और गर्दन के आसपास वैसलीन या क्रीम लगा लें, ताकि डाई सीधे त्वचा पर न लगे। हमेशा अच्छे ब्रांड और कम केमिकल वाले प्रोडक्ट का ही इस्तेमाल करें। डाई लगाने के बाद बालों और स्किन को अच्छी तरह साफ करना जरूरी है। अगर हेयर डाई लगाने के बाद त्वचा में ज्यादा खुजली, लालपन या जलन महसूस हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में तुरंत बालों को साफ पानी से धोना बेहतर होता है। अगर इसके बाद भी समस्या बनी रहती है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
बार-बार डाई लगाने से बचें
विशेषज्ञों के अनुसार, बार-बार हेयर डाई लगाने से बचना चाहिए। कोशिश करें कि बालों की देखभाल के लिए प्राकृतिक उपायों को भी अपनाया जाए। इससे बालों के साथ-साथ त्वचा भी स्वस्थ बनी रहती है।
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रोज नहाने से फायदे होते हैं या नुकसान? जानिए किन लोगों को रहना चाहिए सावधान
रोज नहाना हमारी दिनचर्या का अहम हिस्सा है। लेकिन कई लोगों के मन में सवाल उठता है कि क्या रोज नहाना सेहत के लिए फायदेमंद है या इससे त्वचा को नुकसान हो सकता है? आइए विस्तार से समझते हैं।
रोज नहाने के फायदे
–शरीर की सफाई और ताजगी
रोज नहाने से शरीर पर जमा धूल, पसीना और बैक्टीरिया साफ हो जाते हैं। इससे शरीर में ताजगी बनी रहती है और बदबू की समस्या नहीं होती।
–संक्रमण का खतरा कम
नियमित स्नान त्वचा से गंदगी और कीटाणुओं को हटाता है, जिससे फंगल इंफेक्शन और स्किन एलर्जी का खतरा कम होता है।
–मानसिक सुकून
गर्म पानी से नहाने पर शरीर की मांसपेशियां रिलैक्स होती हैं और तनाव कम होता है। वहीं ठंडे पानी से नहाना शरीर को एनर्जी देता है और मूड बेहतर करता है।
–बेहतर नींद
रात में गुनगुने पानी से नहाने से शरीर शांत होता है और नींद की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है।
रोज नहाने के नुकसान
–त्वचा का ड्राई होना
बहुत ज्यादा साबुन या गर्म पानी का इस्तेमाल करने से त्वचा की प्राकृतिक नमी (नेचुरल ऑयल) कम हो सकती है, जिससे ड्राइनेस और खुजली की समस्या हो सकती है।
–स्किन बैरियर को नुकसान
त्वचा की ऊपरी परत हमें बाहरी बैक्टीरिया से बचाती है। रोज लंबे समय तक गर्म पानी से नहाना इस सुरक्षा परत को कमजोर कर सकता है।
–बालों को नुकसान
रोज शैंपू करने से बालों का नेचुरल ऑयल खत्म हो सकता है, जिससे बाल रूखे और कमजोर हो सकते हैं।
किसे रोज नहाना चाहिए?
-जो लोग ज्यादा पसीना बहाते हैं या बाहर धूल-मिट्टी में काम करते हैं
-जिम या खेलकूद करने वाले लोग
-गर्म और उमस भरे मौसम में रहने वाले लोग
किसे सावधानी बरतनी चाहिए?
-जिनकी त्वचा बहुत ज्यादा ड्राई या संवेदनशील है
-सर्दियों के मौसम में रहने वाले लोग
-छोटे बच्चों और बुजुर्गों को हल्के गुनगुने पानी से और कम समय के लिए नहाना चाहिए
सही तरीका क्या है?
-बहुत गर्म पानी की बजाय गुनगुना पानी इस्तेमाल करें
-हल्के और मॉइस्चराइजिंग साबुन का उपयोग करें
-नहाने के बाद मॉइस्चराइज़र जरूर लगाएं
-बालों में रोज शैंपू न करें
निष्कर्ष
रोज नहाना सामान्य रूप से फायदेमंद है, खासकर अगर आप साफ-सफाई और मौसम का ध्यान रखें। लेकिन जरूरत से ज्यादा गर्म पानी और केमिकल वाले प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए संतुलन बनाए रखना ही सबसे बेहतर उपाय है।
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