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अटल बिहारी वाजपेयी ने विपक्ष को भी किया झुकने पर मजबूर! फर्नांडीस, ममता बनर्जी और जयललिता के सहयोग से कैसे चला संघीय शासन? उदारता की प्रशंसा करते हुए श्रद्धांजलि।

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अटल बिहारी वाजपेयी: लुटियन्स दिल्ली में 7 लोक कल्याण ने कभी अटल बिहारी वाजपेयी के सरकारी निवास का स्थानाधिकार किया। 25 दिसंबर, 1924 को जन्मे अटल बिहारी वाजपेयी ने स्वयंसेवक से लेकर देश के प्रधानमंत्री तक की यात्रा की। इस दौरान वे अनेक उतार-चढ़ाव के शिकार रहे, लेकिन अटल हमेशा अपनी स्थिरता बनाए रखते थे और हर संकट का सामना दृढ़ता से करते थे। भारत रत्न प्राप्त पूर्व प्रधानमंत्री की शख्सियत के सामने उनके विपक्षी भी खुद को झुकाते थे।

उनकी उदारता ने पहले गैर-कांग्रेसी सरकार को चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जो उन्होंने 5 वर्षों तक धुर-विरोधियों जैसे जॉर्ज फर्नांडीस, ममता बनर्जी, और जयललिता के साथ मिलकर बनाई। अटल बिहारी वाजपेयी का महान चरित्र उनकी शख्सियत का उजला पक्ष था, जिसे आज भी याद किया जाता है। पूर्व पीएम का उदार जीवन इस स्तर पर है कि आज भी लोग उन्हें आदरपूर्वक स्मरण करते हैं।

पूर्व पीएम Atal Bihari Vajpayee ने कैसे फर्नांडीस, ममता बनर्जी, जयललिता के साथ मिलकर चलाई थी सरकार?

1998-1999 का वह समय जब अटल बिहारी वाजपेयी 13 महीनों तक प्रधानमंत्री रहे। ऑल इंडिया अन्ना द्रविड मुनेत्र कड़गम द्वारा समर्थन वापस लेने पर उनकी सरकार गिर गई और फिर एक नया गठबंधन बनाया गया। 24 दलों के इस गठबंधन को ‘जंबो गठबंधन’ का नाम दिया गया और अटल बिहारी वाजपेयी ने 81 मंत्रियों के साथ मिलकर 5 वर्षों तक शासन किया।

इस सरकार में जॉर्ज फर्नांडीस, ममता बनर्जी, जयललिता, फारुक अब्दुल्ला, शिवसेना, नवीन पटनायक सहित कई प्रमुख राजनीतिक व्यक्ति शामिल थे जो कभी अटल बिहारी वाजपेयी के कट्टर विरोधी रहे थे। यहां तक कि अनेक विपक्षी नेता भी अटल बिहारी वाजपेयी की शख्सियत की प्रशंसा करते थे। उनकी उदार नीति इतनी प्रभावशाली थी कि कश्मीर से कन्याकुमारी तक उस समय की एनडीए सरकार की कार्यप्रणाली चर्चा का विषय रहती थी।

अटल बिहारी वाजपेयी की शख्सियत के आगे विरोधी भी रहते थे नतमस्तक

राजनीति में विरोध का दौर हमेशा से मौजूद रहा है। फिर भी, एक ऐसा समय था जब उम्मीदों की संभावना हमेशा बनी रहती थी। भाषाई शालीनता का पालन किया जाता था। इसका एक उदाहरण वर्ष 2001 में देखने को मिला जब अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे। रिपोर्ट्स के अनुसार नवंबर 2001 में ममता बनर्जी अपनी ही सरकार से नाराज थीं। समय की संवेदनशीलता को समझते हुए, अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने काफिले के साथ कालीघाट की उस संकीर्ण गली में प्रवेश किया, जो ममता बनर्जी का निवास था।

वहां पहुँचकर पूर्व पीएम ने ममता बनर्जी की मां के चरण छुए और उनसे संवाद स्थापित किया। यह उनकी विशेष शैली थी जिसके आगे उनके विरोधी भी झुकते थे। इस तरह अटल बिहारी वाजपेयी ने अपनी तेजतर्रार सहयोगी को मान लिया और 2004 तक केंद्र में मजबूती से सरकार चलाई। हालांकि, शाइनिंग इंडिया के सहारे चुनावी मैदान में उतरी एनडीए को 2004 में हार का सामना करना पड़ा और यूपीए सत्ता में आई।

यही कारण है कि आज भी अटल बिहारी वाजपेयी के व्यक्तित्व को एक उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। उनके निधन के 7 साल बाद भी उनकी जयंती (25 दिसंबर) को सुशासन दिवस यानी गुड गवर्नेंस डे के रूप में मनाया जाता है। लोग आज के दिन पूर्व प्रधानमंत्री को याद करते हुए श्रद्धा और सम्मान अर्पित करते हैं।

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