Connect with us

Health

जोड़ों के दर्द का इलाज: महंगे उपचार से नहीं मिल रहा राहत, तो डॉक्टर का यह पारंपरिक उपाय कर सकता है मदद!

Published

on

गठिया दर्द का इलाज: सर्दी के मौसम में जोड़ो का दर्द पीड़ित व्यक्ति की स्थिति को और खराब कर देता है। ऐसे में लोग राहत पाने के लिए विभिन्न महंगी दवाएं लेते हैं लेकिन फिर भी उन्हें सच्ची राहत नहीं मिलती। ऐसे व्यक्तियों के लिए डॉक्टर द्वारा एक पारंपरिक नुस्खा साझा किया जा रहा है। इसे आजमा कर जॉइंट पेन से आराम पाया जा सकता है। यह कमजोर हड्डियों और जोड़ों के दर्द के लिए एक प्रभावी उपाय साबित हो सकता है।

डॉक्टर से जानें गठिया दर्द का इलाज

गठिया दर्द से राहत दिलाने के इस पारंपरिक उपाय को Healthy Hamesha नामक यूट्यूब चैनल पर डॉक्टर सलीम जैदी प्रस्तुत कर रहे हैं। इसमें वे बता रहे हैं कि, जोड़ों का दर्द, कैल्शियम की कमी, घुटने, कमर, हाथ-पैर में तेज दर्द को कैसे समाप्त किया जा सकता है। वीडियो में डॉक्टर बता रहे हैं कि, जोड़ों के दर्द में अंग्रेजी दवाएं लेने के बाद भी कोई विशेष राहत नहीं मिल पाती है, आइए जानते हैं इसके
पीछे की असली वजह। असली वजह यह है कि, अधिकतर दर्द की दवाएं केवल सूजन और दर्द को दबाने का काम करती हैं।

वीडियो देखें

वीडियो क्रेडिट: Healthy Hamesha

ये दवाएं केवल दर्द और सूजन को कम करने का कार्य करती हैं। हड्डियों और जोड़ों के स्वास्थ्य को अंदर से सुधार नहीं करतीं। इसलिए इस पारंपरिक उपाय को अपना सकते हैं। इसके लिए आपको सफेद तिल (वाइट सिस्म सीड्स) की आवश्यकता होगी। तिल कैल्शियम का एक बेहतरीन
प्राकृतिक स्रोत है, जो हड्डियों और जोड़ों को मजबूत बनाता है। दूसरा सामग्री है,
मखाना। मखाने में कैल्शियम, फास्फोरस और प्रोटीन की भरपूर मात्रा होती है। तीसरी चीज है बादाम। बादाम में विटामिन ई और हेल्दी फैट होते हैं जो कि जोड़ो को लचीला बनाते हैं और कोशिकाओं को मरम्मत करते हैं। चौथा सामग्री है फ्लैक्स सीड्स यानी अलसी के बीज। अलसी में ओमेगा थ्री फैटी एसिड होते हैं। इसके बाद आपको पिसी हुई सोंठ, हल्दी पाउडर, काली मिर्च पाउडर लेना है। इन सभी को मिक्सर में बारीक पीसकर मिश्रण तैयार कर लेना है। इसके बाद हर रात गर्म दूध के साथ सेवन करना है।

जोड़ों के दर्द की औषधि कैसे लें?

अगर आप मोटापे या फिर खराब कोलेस्ट्रॉल से परेशान हैं, तो इसे गर्म पानी के साथ लें। वहीं, अगर पाचन क्रिया कमजोर है, तो सुबह नाश्ता करने के बाद गर्म पानी के साथ इसका सेवन करें। नियमित रूप से इसका उपयोग करने से जोड़ों का दर्द स्थायी रूप से कम हो सकता है। यह हड्डियों को अंदर से हील करता है। जो लोग कैल्शियम की कमी से जूझ रहे हैं, उन्हें इसका सेवन अवश्य करना चाहिए। यह स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है।

अस्वीकृति: यह लेख और इसमें दी गई चिकित्सीय जानकारी केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है। यह किसी भी योग्य चिकित्सीय राय का विकल्प नहीं है। इस लेख में बताए गए तरीके और दावे केवल सुझाव माने जाने चाहिए; डीएनपी इंडिया हिंदी न तो इनकी पुष्टि करता है और न ही इनका खंडन करता है। किसी भी सुझाव/उपचार/दवा/आहार का पालन करने से पहले हमेशा डॉक्टर से सलाह लें।

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Health

रोज नहाने से फायदे होते हैं या नुकसान? जानिए किन लोगों को रहना चाहिए सावधान

Published

on

रोज नहाना हमारी दिनचर्या का अहम हिस्सा है। लेकिन कई लोगों के मन में सवाल उठता है कि क्या रोज नहाना सेहत के लिए फायदेमंद है या इससे त्वचा को नुकसान हो सकता है? आइए विस्तार से समझते हैं।

रोज नहाने के फायदे

शरीर की सफाई और ताजगी

रोज नहाने से शरीर पर जमा धूल, पसीना और बैक्टीरिया साफ हो जाते हैं। इससे शरीर में ताजगी बनी रहती है और बदबू की समस्या नहीं होती।

संक्रमण का खतरा कम

नियमित स्नान त्वचा से गंदगी और कीटाणुओं को हटाता है, जिससे फंगल इंफेक्शन और स्किन एलर्जी का खतरा कम होता है।

मानसिक सुकून

गर्म पानी से नहाने पर शरीर की मांसपेशियां रिलैक्स होती हैं और तनाव कम होता है। वहीं ठंडे पानी से नहाना शरीर को एनर्जी देता है और मूड बेहतर करता है।

बेहतर नींद

रात में गुनगुने पानी से नहाने से शरीर शांत होता है और नींद की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है।

रोज नहाने के नुकसान

त्वचा का ड्राई होना

बहुत ज्यादा साबुन या गर्म पानी का इस्तेमाल करने से त्वचा की प्राकृतिक नमी (नेचुरल ऑयल) कम हो सकती है, जिससे ड्राइनेस और खुजली की समस्या हो सकती है।

स्किन बैरियर को नुकसान

त्वचा की ऊपरी परत हमें बाहरी बैक्टीरिया से बचाती है। रोज लंबे समय तक गर्म पानी से नहाना इस सुरक्षा परत को कमजोर कर सकता है।

बालों को नुकसान

रोज शैंपू करने से बालों का नेचुरल ऑयल खत्म हो सकता है, जिससे बाल रूखे और कमजोर हो सकते हैं।

किसे रोज नहाना चाहिए?

-जो लोग ज्यादा पसीना बहाते हैं या बाहर धूल-मिट्टी में काम करते हैं

-जिम या खेलकूद करने वाले लोग

-गर्म और उमस भरे मौसम में रहने वाले लोग

किसे सावधानी बरतनी चाहिए?

-जिनकी त्वचा बहुत ज्यादा ड्राई या संवेदनशील है

-सर्दियों के मौसम में रहने वाले लोग

-छोटे बच्चों और बुजुर्गों को हल्के गुनगुने पानी से और कम समय के लिए नहाना चाहिए

सही तरीका क्या है?

-बहुत गर्म पानी की बजाय गुनगुना पानी इस्तेमाल करें

-हल्के और मॉइस्चराइजिंग साबुन का उपयोग करें

-नहाने के बाद मॉइस्चराइज़र जरूर लगाएं

-बालों में रोज शैंपू न करें

निष्कर्ष

रोज नहाना सामान्य रूप से फायदेमंद है, खासकर अगर आप साफ-सफाई और मौसम का ध्यान रखें। लेकिन जरूरत से ज्यादा गर्म पानी और केमिकल वाले प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए संतुलन बनाए रखना ही सबसे बेहतर उपाय है।

Continue Reading

Health

सेब खाने से पहले पढ़ लें ये खबर: इस हिस्से में छुपा है जहर! किन लोगों को नहीं खाना चाहिए ‘एप्पल’

Published

on

सेब को अक्सर ‘An Apple a Day Keeps the Doctor Away’ कहावत से जोड़ा जाता है। इसमें फाइबर, विटामिन-C और एंटीऑक्सिडेंट्स भरपूर होते हैं। लेकिन हर किसी के लिए सेब फायदेमंद हो, यह जरूरी नहीं। कुछ लोगों को इसे सावधानी से या सीमित मात्रा में खाना चाहिए। साथ ही, बहुत कम लोग जानते हैं कि सेब के एक हिस्से में प्राकृतिक रूप से “जहर” भी पाया जाता है।

किन लोगों को नहीं खाना चाहिए सेब?

1) डायबिटीज के मरीज

सेब का ग्लाइसेमिक इंडेक्स मध्यम है, पर इसमें प्राकृतिक शुगर (फ्रक्टोज) होती है। डायबिटीज के मरीजों को मात्रा नियंत्रित रखनी चाहिए और जूस की बजाय पूरा सेब (छिलके सहित) खाना बेहतर है।

2) इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (IBS) या पाचन समस्या वाले लोग

सेब में FODMAPs (फ्रक्टोज) होते हैं, जो कुछ लोगों में गैस, पेट दर्द या ब्लोटिंग बढ़ा सकते हैं।

3) एसिडिटी या GERD से पीड़ित

खाली पेट सेब खाने से कुछ लोगों में एसिडिटी बढ़ सकती है।

4) किडनी रोगी

सेब में पोटैशियम होता है। गंभीर किडनी रोग में डॉक्टर की सलाह से ही फल की मात्रा तय करें।

5) सेब से एलर्जी वाले लोग

कुछ लोगों को सेब खाने से मुंह/गले में खुजली, सूजन या रैशेज हो सकते हैं (ओरल एलर्जी सिंड्रोम)।

सेब के किस हिस्से में होता है “जहर”?

सेब के बीज (Seeds) में एमिग्डालिन नामक यौगिक होता है। यह शरीर में जाकर बहुत अधिक मात्रा में लेने पर सायनाइड (Cyanide) छोड़ सकता है। सामान्य तौर पर 1–2 सेब के बीज गलती से निगल लेने से नुकसान की संभावना बेहद कम होती है। लेकिन बड़ी मात्रा में बीज चबाकर खाना खतरनाक हो सकता है। इसलिए सेब खाते समय बीज निकाल देना ही बेहतर है। ध्यान दें: सेब का गूदा और छिलका सुरक्षित और पौष्टिक होते हैं; समस्या केवल बीज की अत्यधिक मात्रा से है।

Continue Reading

Health

चाय पीने के शौकीन हो जाए सतर्क, एक भूल से हो सकता है कैंसर; जानें गरमा-गरम चाय कैसे बनती है जानलेवा…

Published

on

भारत में चाय लोगों की दिनचर्या और भावनाओं से जुड़ी आदत है। सुबह की शुरुआत हो या दिनभर की थकान दूर करनी हो, अधिकतर लोग चाय पर ही भरोसा करते हैं। कई घरों में तो बिना चाय के दिन अधूरा माना जाता है। लेकिन अगर यही चाय बहुत ज्यादा गर्म पी जाए, तो यह सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।

गर्म चाय से खाने की नली को पहुंचता है नुकसान

वैज्ञानिक अध्ययनों में पाया गया है कि अत्यधिक गर्म पेय—खासकर 65 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक तापमान पर—नियमित रूप से पीने से खाने की नली (एसोफैगस) को नुकसान पहुंच सकता है। बार-बार बहुत गर्म तरल निगलने से इस नली की अंदरूनी परत जल सकती है, जिससे सूजन (क्रॉनिक इंफ्लेमेशन) और कोशिकाओं में बदलाव (सेल म्यूटेशन) शुरू हो सकते हैं। लंबे समय में यही बदलाव कैंसर का रूप ले सकते हैं।

बढ़ सकता है कैंसर का जोखिम

World Health Organization (डब्ल्यूएचओ) भी यह चेतावनी दे चुका है कि 65 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा गर्म पेय का नियमित सेवन एसोफैजियल कैंसर का जोखिम बढ़ा सकता है। खाने की नली के कैंसर के मुख्य रूप से दो प्रकार होते हैं—एसोफैजियल स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा और एसोफैजियल एडेनोकार्सिनोमा। पहला प्रकार आमतौर पर नली के ऊपरी हिस्से में पाया जाता है और इसे गर्म पेय व तंबाकू सेवन से जोड़ा जाता है। दूसरा प्रकार नली के निचले हिस्से में होता है और अक्सर मोटापा या लंबे समय तक बनी रहने वाली एसिडिटी से संबंधित होता है।

चाय नहीं तापमान से होती है समस्या

ध्यान देने वाली बात यह है कि चाय खुद नुकसानदेह नहीं है, बल्कि उसका अत्यधिक गर्म होना समस्या पैदा करता है। यही बात कॉफी, सूप या किसी भी गरम पेय पर लागू होती है। आयुर्वेद भी सलाह देता है कि भोजन और पेय न तो बहुत गरम हों, न अत्यधिक ठंडे। आयुर्वेदिक दृष्टिकोण के अनुसार, हल्का गर्म पेय पाचन में सहायक हो सकता है, लेकिन जरूरत से ज्यादा गर्म चीजें शरीर में पित्त बढ़ाकर सूजन और अन्य रोगों की आशंका बढ़ा सकती हैं।

ये संकेत होते हैं गंभीर बीमारी के इशारे

यदि किसी व्यक्ति को निगलने में कठिनाई, गले में लगातार खराश, निगलते समय दर्द या बिना कारण तेजी से वजन कम होने जैसे लक्षण महसूस हों, तो इन्हें हल्के में नहीं लेना चाहिए। ऐसे संकेत गंभीर बीमारी की ओर इशारा कर सकते हैं। समय रहते डॉक्टर से परामर्श लेना बेहद जरूरी है, क्योंकि शुरुआती पहचान ही कई बार बड़ी बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका साबित होती है।

Continue Reading
Advertisement

Trending