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वजन घटाने से रहेगी डायबिटीज से दूर! बस एक आदत में करें बदलाव
वजन घटाने के उपाय: वजन घटाने के लिए अगर आप अपनी जीवनशैली में एक नियमितता को शामिल करें, तो आपको डायबिटीज का सामना नहीं करना पड़ेगा। एक छोटी सी आदत में सुधार करने से आपको बड़ा लाभ मिल सकता है। डॉ. शिखा सिंह ने इस विषय में कुछ महत्वपूर्ण बातें साझा की हैं, जो आपको चौंका सकती हैं। इसके लिए सिर्फ एक साधारण उपाय की जरूरत है, जो न केवल डायबिटीज को रोकता है, बल्कि वजन कम करने में भी मददगार है। आइए जानते हैं वह आदत कौन सी है जिसमें सुधार कर सकते हैं।
भोजन के बाद वॉक क्यों जरूरी है
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डॉ. शिखा का कहना है कि जब हम भोजन ग्रहण करते हैं, तो वह हमारे शरीर के अंदर जाकर ग्लूकोस यानी शुगर में परिवर्तित हो जाता है। यह शुगर हमारे शरीर में प्रवाहित होती है और इसे पेनक्रियाज नियंत्रित करता है। फिर यह सेल्स में जाती है, जहाँ इसे ब्रेकडाउन करके ऊर्जा उत्पन्न की जाती है। जो अतिरिक्त शुगर होती है, वह कुछ लीवर में और कुछ मांसपेशियों में जमा होती है, जबकि बाकी फैट के रूप में स्थायी हो जाती है। यदि हम खानपान पर ध्यान नहीं दें, तो यह हमारी शुगर स्तर को बढ़ा देती है और हमारी बॉडी अधिक इंसुलिन उत्पन्न करने लगती है।
डायबिटीज और वजन बढ़ाने की प्रक्रिया
यह इंसुलिन ब्लड शुगर को बढ़ाती है और सेल्स उसे नजरअंदाज करना शुरू कर देती हैं। इस स्थिति में यह ब्लड में ही निरंतर बनी रहती है और यही डायबिटीज का कारण बनती है। अतिरिक्त शुगर हमारे शरीर में फैट के रूप में जमा हो जाती है। इसलिए डॉक्टर शिखा का सुझाव है कि हर भोजन के बाद 15 से 20 मिनट का वॉक करें, ताकि यह शुगर हमारे शरीर में ऊर्जा का स्रोत बने। इससे न केवल आपको डायबिटीज से बचाव होगा बल्कि आपका वजन भी नहीं बढ़ेगा।
हर भोजन के बाद वजन घटाने के लिए करें ये उपाय
डॉ. शिखा सिंह कहती हैं कि इसके लिए हर भोजन के बाद 15 से 20 मिनट की वॉक जरूरी है। 10 किलो वजन कम कर चुकी और डायबिटीज को उलटने में सक्षम इस विशेषज्ञ ने स्वयं 50 किलो वजन घटाया है। पहले वह 110 किलो वजन की थीं, लेकिन 50 किलो घटाने के बाद वह लोगों के लिए प्रेरणा बन गई हैं।
अस्वीकृति: यह लेख और इसमें दिए गए चिकित्सा सुझाव केवल सामान्य जानकारी प्रदान करते हैं। यह किसी भी स्थिति में योग्य चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं हैं। इस लेख में बताए गए उपायों और दावों को केवल सुझाव के रूप में लिया जाना चाहिए; डीएनपी इंडिया हिंदी न तो इन्हें प्रमाणित करता है और न ही इनका खंडन करता है। किसी भी सुझाव/उपचार/दवा/आहार का पालन करने से पहले हमेशा डॉक्टर से सलाह लें।
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रोज नहाने से फायदे होते हैं या नुकसान? जानिए किन लोगों को रहना चाहिए सावधान
रोज नहाना हमारी दिनचर्या का अहम हिस्सा है। लेकिन कई लोगों के मन में सवाल उठता है कि क्या रोज नहाना सेहत के लिए फायदेमंद है या इससे त्वचा को नुकसान हो सकता है? आइए विस्तार से समझते हैं।
रोज नहाने के फायदे
–शरीर की सफाई और ताजगी
रोज नहाने से शरीर पर जमा धूल, पसीना और बैक्टीरिया साफ हो जाते हैं। इससे शरीर में ताजगी बनी रहती है और बदबू की समस्या नहीं होती।
–संक्रमण का खतरा कम
नियमित स्नान त्वचा से गंदगी और कीटाणुओं को हटाता है, जिससे फंगल इंफेक्शन और स्किन एलर्जी का खतरा कम होता है।
–मानसिक सुकून
गर्म पानी से नहाने पर शरीर की मांसपेशियां रिलैक्स होती हैं और तनाव कम होता है। वहीं ठंडे पानी से नहाना शरीर को एनर्जी देता है और मूड बेहतर करता है।
–बेहतर नींद
रात में गुनगुने पानी से नहाने से शरीर शांत होता है और नींद की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है।
रोज नहाने के नुकसान
–त्वचा का ड्राई होना
बहुत ज्यादा साबुन या गर्म पानी का इस्तेमाल करने से त्वचा की प्राकृतिक नमी (नेचुरल ऑयल) कम हो सकती है, जिससे ड्राइनेस और खुजली की समस्या हो सकती है।
–स्किन बैरियर को नुकसान
त्वचा की ऊपरी परत हमें बाहरी बैक्टीरिया से बचाती है। रोज लंबे समय तक गर्म पानी से नहाना इस सुरक्षा परत को कमजोर कर सकता है।
–बालों को नुकसान
रोज शैंपू करने से बालों का नेचुरल ऑयल खत्म हो सकता है, जिससे बाल रूखे और कमजोर हो सकते हैं।
किसे रोज नहाना चाहिए?
-जो लोग ज्यादा पसीना बहाते हैं या बाहर धूल-मिट्टी में काम करते हैं
-जिम या खेलकूद करने वाले लोग
-गर्म और उमस भरे मौसम में रहने वाले लोग
किसे सावधानी बरतनी चाहिए?
-जिनकी त्वचा बहुत ज्यादा ड्राई या संवेदनशील है
-सर्दियों के मौसम में रहने वाले लोग
-छोटे बच्चों और बुजुर्गों को हल्के गुनगुने पानी से और कम समय के लिए नहाना चाहिए
सही तरीका क्या है?
-बहुत गर्म पानी की बजाय गुनगुना पानी इस्तेमाल करें
-हल्के और मॉइस्चराइजिंग साबुन का उपयोग करें
-नहाने के बाद मॉइस्चराइज़र जरूर लगाएं
-बालों में रोज शैंपू न करें
निष्कर्ष
रोज नहाना सामान्य रूप से फायदेमंद है, खासकर अगर आप साफ-सफाई और मौसम का ध्यान रखें। लेकिन जरूरत से ज्यादा गर्म पानी और केमिकल वाले प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए संतुलन बनाए रखना ही सबसे बेहतर उपाय है।
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सेब खाने से पहले पढ़ लें ये खबर: इस हिस्से में छुपा है जहर! किन लोगों को नहीं खाना चाहिए ‘एप्पल’
सेब को अक्सर ‘An Apple a Day Keeps the Doctor Away’ कहावत से जोड़ा जाता है। इसमें फाइबर, विटामिन-C और एंटीऑक्सिडेंट्स भरपूर होते हैं। लेकिन हर किसी के लिए सेब फायदेमंद हो, यह जरूरी नहीं। कुछ लोगों को इसे सावधानी से या सीमित मात्रा में खाना चाहिए। साथ ही, बहुत कम लोग जानते हैं कि सेब के एक हिस्से में प्राकृतिक रूप से “जहर” भी पाया जाता है।
किन लोगों को नहीं खाना चाहिए सेब?
1) डायबिटीज के मरीज
सेब का ग्लाइसेमिक इंडेक्स मध्यम है, पर इसमें प्राकृतिक शुगर (फ्रक्टोज) होती है। डायबिटीज के मरीजों को मात्रा नियंत्रित रखनी चाहिए और जूस की बजाय पूरा सेब (छिलके सहित) खाना बेहतर है।
2) इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (IBS) या पाचन समस्या वाले लोग
सेब में FODMAPs (फ्रक्टोज) होते हैं, जो कुछ लोगों में गैस, पेट दर्द या ब्लोटिंग बढ़ा सकते हैं।
3) एसिडिटी या GERD से पीड़ित
खाली पेट सेब खाने से कुछ लोगों में एसिडिटी बढ़ सकती है।
4) किडनी रोगी
सेब में पोटैशियम होता है। गंभीर किडनी रोग में डॉक्टर की सलाह से ही फल की मात्रा तय करें।
5) सेब से एलर्जी वाले लोग
कुछ लोगों को सेब खाने से मुंह/गले में खुजली, सूजन या रैशेज हो सकते हैं (ओरल एलर्जी सिंड्रोम)।

सेब के किस हिस्से में होता है “जहर”?
सेब के बीज (Seeds) में एमिग्डालिन नामक यौगिक होता है। यह शरीर में जाकर बहुत अधिक मात्रा में लेने पर सायनाइड (Cyanide) छोड़ सकता है। सामान्य तौर पर 1–2 सेब के बीज गलती से निगल लेने से नुकसान की संभावना बेहद कम होती है। लेकिन बड़ी मात्रा में बीज चबाकर खाना खतरनाक हो सकता है। इसलिए सेब खाते समय बीज निकाल देना ही बेहतर है। ध्यान दें: सेब का गूदा और छिलका सुरक्षित और पौष्टिक होते हैं; समस्या केवल बीज की अत्यधिक मात्रा से है।
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चाय पीने के शौकीन हो जाए सतर्क, एक भूल से हो सकता है कैंसर; जानें गरमा-गरम चाय कैसे बनती है जानलेवा…
भारत में चाय लोगों की दिनचर्या और भावनाओं से जुड़ी आदत है। सुबह की शुरुआत हो या दिनभर की थकान दूर करनी हो, अधिकतर लोग चाय पर ही भरोसा करते हैं। कई घरों में तो बिना चाय के दिन अधूरा माना जाता है। लेकिन अगर यही चाय बहुत ज्यादा गर्म पी जाए, तो यह सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
गर्म चाय से खाने की नली को पहुंचता है नुकसान
वैज्ञानिक अध्ययनों में पाया गया है कि अत्यधिक गर्म पेय—खासकर 65 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक तापमान पर—नियमित रूप से पीने से खाने की नली (एसोफैगस) को नुकसान पहुंच सकता है। बार-बार बहुत गर्म तरल निगलने से इस नली की अंदरूनी परत जल सकती है, जिससे सूजन (क्रॉनिक इंफ्लेमेशन) और कोशिकाओं में बदलाव (सेल म्यूटेशन) शुरू हो सकते हैं। लंबे समय में यही बदलाव कैंसर का रूप ले सकते हैं।
बढ़ सकता है कैंसर का जोखिम
World Health Organization (डब्ल्यूएचओ) भी यह चेतावनी दे चुका है कि 65 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा गर्म पेय का नियमित सेवन एसोफैजियल कैंसर का जोखिम बढ़ा सकता है। खाने की नली के कैंसर के मुख्य रूप से दो प्रकार होते हैं—एसोफैजियल स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा और एसोफैजियल एडेनोकार्सिनोमा। पहला प्रकार आमतौर पर नली के ऊपरी हिस्से में पाया जाता है और इसे गर्म पेय व तंबाकू सेवन से जोड़ा जाता है। दूसरा प्रकार नली के निचले हिस्से में होता है और अक्सर मोटापा या लंबे समय तक बनी रहने वाली एसिडिटी से संबंधित होता है।

चाय नहीं तापमान से होती है समस्या
ध्यान देने वाली बात यह है कि चाय खुद नुकसानदेह नहीं है, बल्कि उसका अत्यधिक गर्म होना समस्या पैदा करता है। यही बात कॉफी, सूप या किसी भी गरम पेय पर लागू होती है। आयुर्वेद भी सलाह देता है कि भोजन और पेय न तो बहुत गरम हों, न अत्यधिक ठंडे। आयुर्वेदिक दृष्टिकोण के अनुसार, हल्का गर्म पेय पाचन में सहायक हो सकता है, लेकिन जरूरत से ज्यादा गर्म चीजें शरीर में पित्त बढ़ाकर सूजन और अन्य रोगों की आशंका बढ़ा सकती हैं।
ये संकेत होते हैं गंभीर बीमारी के इशारे
यदि किसी व्यक्ति को निगलने में कठिनाई, गले में लगातार खराश, निगलते समय दर्द या बिना कारण तेजी से वजन कम होने जैसे लक्षण महसूस हों, तो इन्हें हल्के में नहीं लेना चाहिए। ऐसे संकेत गंभीर बीमारी की ओर इशारा कर सकते हैं। समय रहते डॉक्टर से परामर्श लेना बेहद जरूरी है, क्योंकि शुरुआती पहचान ही कई बार बड़ी बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका साबित होती है।
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