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अफगानिस्तान का पाकिस्तान पर बड़ा हमला, मिलिट्री सेंटर को बनाया निशाना

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मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच एशिया में भी हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच विवाद कम होने का नाम नहीं ले रहा है। दोनों देशों के बीच ड्रोन और हवाई हमलों का सिलसिला जारी है। इसी कड़ी में अफगानिस्तान ने पाकिस्तान पर एक और बड़े हमले का दावा किया है।

पाकिस्तान के मिलिट्री सेंटर पर हमले का दावा

अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर पोस्ट करते हुए कहा कि अफगान वायुसेना ने इस्लामाबाद के फैजाबाद इलाके में स्थित ‘हमजा’ नाम के एक रणनीतिक सैन्य केंद्र को निशाना बनाया है। मंत्रालय के मुताबिक, यह हमला ड्रोन विमान के जरिए किया गया, जिसमें मिलिट्री सेंटर के भीतर मौजूद कई अहम ठिकानों को टारगेट किया गया। अफगानिस्तान का दावा है कि इस हमले में पाकिस्तानी सेना को भारी नुकसान हुआ है।

कमांड सेंटर और सैन्य ढांचे तबाह होने का दावा

अफगान रक्षा मंत्रालय ने एक और पोस्ट में कहा कि हमले में उस सैन्य परिसर के कई महत्वपूर्ण ढांचे नष्ट हो गए। इनमें कमांड सेंटर, सैन्य डिपो और सैनिकों के रहने के क्वार्टर भी शामिल हैं। दोनों देशों के बीच लंबे समय से विवादित डुरंड लाइन को लेकर तनाव बना हुआ है। पिछले कुछ दिनों में सीमा क्षेत्र में कई बार हवाई और मोर्टार हमलों की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

पाकिस्तान ने भी किए थे हवाई हमले

इससे पहले पाकिस्तान ने काबुल, पक्तिया और कंधार के कुछ इलाकों में हवाई हमले किए थे। पाकिस्तान का दावा था कि इन हमलों में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। पाकिस्तान ने इस सैन्य कार्रवाई को ‘गजब लिल हक’ नाम दिया था। हालांकि अफगानिस्तान का कहना है कि ये हमले काबुल के रिहायशी इलाकों में किए गए, जिनमें आम नागरिक प्रभावित हुए।

नागरिकों को भी हुआ नुकसान

अफगानिस्तान के अनुसार इन हमलों में 4 लोगों की मौत हो गई और 12 से अधिक लोग घायल हुए। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन ने भी कहा कि काबुल के पुल-ए-चरखी इलाके में हुए हमलों से नागरिकों को जान-माल का नुकसान पहुंचा है। इन घटनाओं के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है और दोनों देशों के बीच हालात और अधिक गंभीर होते नजर आ रहे हैं।

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ईरान संकट से पाकिस्तान में आर्थिक झटका, पेट्रोल 321 रुपये लीटर; स्कूल बंद और ऑफिस सीमित

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ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद शुरू हुए अमेरिका-इजराइल-ईरान संघर्ष का असर अब पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में भी दिखाई देने लगा है। इलाके में आर्थिक हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं और आम लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

पेट्रोल 321 रुपये प्रति लीटर के पार

युद्ध के कारण तेल की आपूर्ति प्रभावित होने से गिलगित-बाल्टिस्तान में पेट्रोल की कीमतों में भारी उछाल आया है। हाल ही में पेट्रोल के दाम में करीब 55 रुपये की बढ़ोतरी हुई है, जिसके बाद इसकी कीमत 321 रुपये प्रति लीटर से भी अधिक हो गई है। पेट्रोल महंगा होने से माल ढुलाई की लागत तेजी से बढ़ गई है। इसका सीधा असर रोजमर्रा की जरूरत की चीजों पर पड़ रहा है और आटा, चीनी तथा सब्जियों जैसी बुनियादी वस्तुओं के दाम भी तेजी से बढ़ गए हैं। सामाजिक कार्यकर्ता शफका अली इंकलाबी का कहना है कि यह स्थिति गरीब और मध्यम वर्ग के लिए लगभग “आर्थिक मौत” जैसी बनती जा रही है।

सरकार ने लागू किया ‘वॉर ऑस्टेरिटी प्लान’

ईंधन की भारी कमी और बढ़ती कीमतों को देखते हुए पाकिस्तान सरकार ने ‘वॉर ऑस्टेरिटी प्लान’ लागू कर दिया है। इसके तहत पूरे पाकिस्तान और गिलगित-बाल्टिस्तान में स्कूलों को दो सप्ताह के लिए बंद कर दिया गया है। शिक्षा को ऑनलाइन माध्यम से जारी रखने की कोशिश की जा रही है, लेकिन क्षेत्र में कमजोर इंटरनेट कनेक्टिविटी इसके रास्ते में बड़ी बाधा बन रही है। इसके अलावा ईंधन बचाने के लिए सरकारी दफ्तरों में कर्मचारियों को सिर्फ चार दिन ही कार्यालय आने के निर्देश दिए गए हैं, जबकि कई जगह वर्क फ्रॉम होम (WFH) की व्यवस्था लागू की गई है।

खामेनेई की मौत के बाद विरोध प्रदर्शन

आयतुल्लाह खामेनेई की मृत्यु के बाद पाकिस्तान के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन भी देखने को मिले हैं। कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पें हुई हैं। स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए प्रशासन ने गिलगित और स्कर्दू जैसे प्रमुख शहरों में समय-समय पर कर्फ्यू लगाया है और कई इलाकों में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी गई हैं।

खाद्य संकट का खतरा

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि युद्ध जल्द खत्म नहीं हुआ तो गिलगित-बाल्टिस्तान में खाद्य संकट पैदा हो सकता है। क्षेत्र की दुर्गम भौगोलिक स्थिति के कारण यहां आवश्यक सामान मुख्य रूप से ट्रकों के जरिए पहुंचता है। पेट्रोल की कीमतों में तेज वृद्धि इस आपूर्ति प्रणाली को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है और इससे खाद्य आपूर्ति बाधित होने का खतरा बढ़ गया है।

सऊदी अरब दौरे पर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री

इन हालात के बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ गुरुवार को सऊदी अरब की एक संक्षिप्त आधिकारिक यात्रा पर रवाना हुए। पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच पिछले साल सितंबर में पारस्परिक रक्षा समझौता हुआ था, जिसके तहत किसी तीसरे देश के हमले की स्थिति में दोनों देशों ने एक-दूसरे की रक्षा करने की प्रतिबद्धता जताई थी। हालांकि अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमले शुरू किए जाने और ईरान द्वारा खाड़ी देशों में जवाबी कार्रवाई के बाद क्षेत्रीय समीकरण बदल गए हैं। ईरान के साथ पाकिस्तान के करीबी संबंध और भौगोलिक निकटता को देखते हुए अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या पाकिस्तान सऊदी अरब के प्रति अपने रक्षा दायित्वों को निभा पाएगा, या फिर वह इस जटिल भू-राजनीतिक स्थिति में संतुलन बनाने की कोशिश करेगा।

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ईरान युद्ध में अमेरिका को बड़ा झटका, चौथा विमान क्रैश; 4 क्रू की मौत

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ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य संघर्ष में अमेरिका और इजरायल को भी नुकसान उठाना पड़ रहा है। अब तक इस युद्ध में आधिकारिक तौर पर अमेरिका के चार विमान गिर चुके हैं और एक महंगा एयर डिफेंस सिस्टम THAAD का रडार भी नष्ट होने की खबर है। अमेरिकी सेना की United States Central Command (CENTCOM) ने शुक्रवार को चौथे विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने की पुष्टि की।

टैंकर विमान हादसे में 4 की मौत

सेंटकॉम के मुताबिक, यह हादसा एक ईंधन भरने वाले विमान के क्रैश होने से हुआ। इस विमान में कुल 6 क्रू सदस्य सवार थे, जिनमें से चार की मौत हो गई, जबकि दो अन्य को बचा लिया गया। शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि दुर्घटना दुश्मन की गोलीबारी या फ्रेंडली फायर की वजह से नहीं हुई। घटना के कारणों की जांच अभी जारी है।

KC-135 टैंकर था मिशन का हिस्सा

क्रैश हुआ विमान Boeing KC-135 Stratotanker था, जो ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियानों में शामिल था। यह विमान हवा में उड़ते हुए अन्य लड़ाकू विमानों को ईंधन उपलब्ध कराता है, जिससे वे लंबी दूरी तक मिशन जारी रख सकते हैं। सेंटकॉम ने बताया कि इस घटना में दो विमान शामिल थे। दुर्घटनाग्रस्त हुआ टैंकर विमान क्रैश हो गया, जबकि दूसरा विमान सुरक्षित तरीके से लैंड कर गया।

हवा में टकराव की आशंका

सोशल मीडिया पर सामने आए कुछ वीडियो और तस्वीरों में एक अन्य अमेरिकी टैंकर विमान को तेल अवीव एयरपोर्ट पर उतरते हुए देखा गया है। इन तस्वीरों में विमान के पिछले हिस्से को नुकसान पहुंचा हुआ दिखाई दे रहा है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि दोनों टैंकर विमान हवा में एक-दूसरे से टकरा गए थे। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

पहले भी गिर चुके हैं तीन लड़ाकू विमान

KC-135 के हादसे से पहले अमेरिका के तीन F-15 लड़ाकू विमान भी इस संघर्ष के दौरान गिर चुके थे। रिपोर्ट्स के अनुसार, ये विमान गलती से कतरी वायुसेना की फायरिंग में मार गिराए गए थे।

KC-135 की अहम भूमिका

Boeing KC-135 Stratotanker अमेरिकी वायुसेना के लिए बेहद महत्वपूर्ण विमान माना जाता है। इसमें चार टर्बोफैन इंजन लगे होते हैं। यह लगभग 146 टन वजन के साथ उड़ान भर सकता है। हवा में ही अन्य लड़ाकू विमानों को ईंधन भरने की क्षमता रखता है। पिछले करीब 60 वर्षों से यह विमान अमेरिकी सेना के लंबी दूरी के सैन्य अभियानों में अहम भूमिका निभा रहा है। ईरान के साथ चल रहे संघर्ष में भी इन टैंकर विमानों का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जा रहा है, ताकि लड़ाकू विमानों की ऑपरेशन क्षमता बढ़ाई जा सके।

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‘रहबर-ए-एंघेलाब’ नाम से सामने आए मुज्तबा खामेनेई, अमेरिका-इजराइल को दी चेतावनी

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ईरान की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। देश के सर्वोच्च धार्मिक और राजनीतिक पद पर अब Mojtaba Khamenei को नया सुप्रीम लीडर चुना गया है। नए पद संभालने के बाद मुज्तबा खामेनेई अब दुनिया भर में “रहबर-ए-एंघेलाब” के नाम से जाने जाएंगे। यही नाम उनके आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर भी इस्तेमाल किया जा रहा है।

सोशल मीडिया से दिया पहला संदेश

अपने नए सोशल मीडिया हैंडल @Rahbarenghelab_ के जरिए मुज्तबा खामेनेई ने पहला आधिकारिक संदेश जारी किया। इसमें उन्होंने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ संघर्ष जारी रखने की बात कही। दिलचस्प बात यह है कि उनके पिता Ali Khamenei का आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल @khamenei_ir नाम से सक्रिय रहा है, जबकि मुज्तबा ने खुद को सीधे “क्रांति” से जुड़ी पहचान के साथ पेश किया है।

‘रहबर-ए-एंघेलाब’ का क्या मतलब है?

फारसी शब्दावली में ‘एंघेलाब’ का अर्थ होता है क्रांति या बड़ा परिवर्तन। यह शब्द ईरान के इतिहास में खास महत्व रखता है, क्योंकि 1979 की इस्लामिक क्रांति के दौरान इसी विचारधारा ने देश को एकजुट किया था। वहीं ‘रहबर’ का मतलब होता है मार्गदर्शक या नेता। इस तरह ‘रहबर-ए-एंघेलाब’ का अर्थ हुआ- “क्रांति का मार्गदर्शक” या “क्रांति का नेता”। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस नाम के जरिए मुज्तबा खामेनेई यह संकेत देना चाहते हैं कि वे ईरान की क्रांतिकारी विचारधारा को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

सोशल मीडिया पर तेजी से बढ़े फॉलोअर्स

रिपोर्ट्स के अनुसार, सुप्रीम लीडर बनने के बाद मुज्तबा खामेनेई ने 6 अलग-अलग भाषाओं में अपने सोशल मीडिया अकाउंट शुरू किए हैं।सिर्फ दो दिनों के भीतर ही इन अकाउंट्स पर 10 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स जुड़ चुके हैं। अपने पहले संबोधन में उन्होंने साफ कर दिया कि ईरान की विदेश नीति में कोई नरमी नहीं आएगी।

8 मार्च 2026 को हुई नियुक्ति

ईरान की निर्णायक समिति ने 8 मार्च 2026 को मुज्तबा खामेनेई को देश का नया सुप्रीम लीडर नियुक्त किया। 56 वर्षीय मुज्तबा खामेनेई, अयातुल्ला अली खामेनेई के दूसरे बेटे हैं। उन्होंने 17 साल की उम्र में ईरान की सेना में शामिल होकर इराक के खिलाफ युद्ध में हिस्सा लिया था।

राजनीतिक सफर

1990 के दशक में मुज्तबा खामेनेई सुप्रीम लीडर के कार्यालय से जुड़े और राजनीतिक समन्वय की जिम्मेदारी संभाली। 2022 में उन्हें अयातुल्ला की उपाधि दी गई और इसके बाद वे कई राजनीतिक समितियों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनके पास लंदन और खाड़ी देशों में 100 मिलियन डॉलर से ज्यादा की संपत्ति भी बताई जाती है।

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