स्कूल में हिजाब पहनने की मांग इलाहाबाद हाईकोर्ट से खारिज हो गई है। अदालत के फैसले से मुस्लिम धर्मगुरुओं में बैचेनी देखी जा रही है। एआईएमपीएलबी ने कहा लड़ेंगे कानूनी लड़ाई। इस मुद्दे पर सियासत भी तेज़ हो गई है। एसबीएसपी नेता ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव से अपना रुख साफ करने के लिए कहा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के स्कूल में हिजाब पहनने की मांग ठुकराने के निर्णय ने मुस्लिम धर्मगुरुओं और नेताओं में असुरक्षा का भाव पैदा कर दिया है। ऑल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी शुरू कर दी है।
क्या बोला कोर्ट?
इलाहाबाद हाई कोर्ट में प्रयागराज के एक निजी स्कूल की छात्रा सुकैन रिजवी ने अपनी मां के जरिए स्कूल में हिजाब पहनने की अनुमति के लिए याचिका दायर की थी। न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की दो सदस्यीय पीठ ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि हिजाब इस्लाम की अनिवार्य धार्मिक प्रथा नहीं है। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता यह साबित नही कर सकी कि हिजाब न पहनने से उनकी आस्था खतरे में पड़ जाएगी। पीठ ने कहा कि हमने स्कूल की तस्वीरें देखीं, जिसमें याचिकाकर्ता के धार्मिक समुदाय की अन्य लड़कियों ने भी हिजाब नहीं पहना था।
क्या बोले ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य?
वहीं अदालत के इस फैसले से मुस्लिम धर्मगुरुओं में बैचेनी बढ़ गई है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी ने समाचार एजेंसी से बात करते हुए कहा- 'हिजाब हमेशा से इस्लाम का हिस्सा रहा है और हम निश्चित तौर पर अदालत जाएंगे।' वे कहते हैं कि ज़रूर कहीं न कहीं कोई भ्रम है, वरना हिजाब का उल्लेख कुरान और हदीस दोनों में है और दुनियाभर में मुस्लिम महिलाएं इसे पहनती हैं। मौलाना खालिद रशीद फरंगी ने यह भी साफ कहा कि हमें ड्रेस कोड के पालन करने से कोई उज्र नहीं है। लेकिन अगर कोई छात्रा अपने धार्मिक कर्तव्यों का पालन करने के लिए हिजाब पहनना चाहती है, तो उसे यह अधिकार दिया जाना चाहिए। 21 अगस्त को दिए फैसले में अदालत ने कहा था कि याचिका में हिजाब को धार्मिक प्रथा साबित करने के लिए कोई ज़रूरी तथ्य नहीं रखा गया था। ऐसे में अनुच्छेद 25 के तहत दावे को बगैर तथ्यों और कानूनी आधार पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।
अनुच्छेद 25 क्या है?
अनुच्छेद 25 के मुताबिक देश के सभी नागरिकों और व्यक्तियों को अंतःकरण की स्वतंत्रता और किसी भी धर्म को स्वतंत्र रूप से मानने, उसका आचरण करने और उसका प्रचार करने का अधिकार प्रदान करता है। वहीं सरकारी पक्ष का कहना था कि बगैर शासकीय अनुदान से चलने वाले विद्यालयों द्वारा यूनिफॉर्म तय करना उनका आंतरिक मामला है। इससे छात्रों के बीच एकरूपता कायम की जाती है। इससे धार्मिक अधिकार का उल्लंघन नहीं होता। दिलचस्प बात यह है कि इलाहाबाद हाई कोर्ट के इस फैसले को यूपी में चुनावी माहौल में सियासी रंग दिया जाना भी तय माना जा रहा है। सुहेलदेव भारत समाज पार्टी के नेता ओम प्रकाश राजभर ने इस मुद्दे को लेकर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव से अपना रुख साफ करने को कहा है। इसे देखते हुए आने वाले दिनों में एक नई सियासी बहस छिड़ने के आसार नज़र आ रहे हैं।
मायावती का आया रिएक्शन
उधर बहुजन समाज पार्टी की नेता मायावती ने कहा है कि ऐसे मामले अदालत तक जानें ही नहीं चाहिए। इन्हें आपस में मिल बैठ कर सुलझाया जाना चाहिए।