कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा है कि राज्य सरकार कांग्रेस के उस डिसीजन के साथ है, जिसमें पार्टी के प्रोग्राम में ‘वंदे मातरम’ के सिर्फ पहले दो पद गाने की बात कही गई है। शिवकुमार ने साफ कहा कि वह पार्टी के फैसले और उसकी सोच के साथ खड़े हैं। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद बीजेपी ने कांग्रेस पर अटैक बोला। बीजेपी का कहना है कि ‘वंदे मातरम’ सिर्फ एक गीत नहीं है, बल्कि यह देश के फ्रीडम मूवमेंट और लोगों की देशभक्ति की फीलिंग से जुड़ा हुआ है। ऐसे में इसके गायन को लिमिटेड करने का फैसला ठीक नहीं है।

कांग्रेस ने 1937 के फैसले का दिया हवाला

कांग्रेस का कहना है कि दो पद गाने का फैसला आज का नहीं है। इसकी शुरुआत 1937 में हुई थी। उस समय ‘वंदे मातरम’ के पूरे गीत को लेकर चर्चा हुई थी। रवींद्रनाथ टैगोर ने सुझाव दिया था कि गीत के शुरुआती दो पदों को अलग करके अपनाया जा सकता है क्योंकि इन पदों में मातृभूमि की सुंदरता और उसके प्रति सम्मान की बात है, जबकि बाद के हिस्सों में धार्मिक संदर्भ आते हैं। इसके बाद कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने 28 अक्टूबर 1937 को फैसला लिया कि राष्ट्रीय सभाओं में ‘वंदे मातरम’ के पहले दो पद ही गाए जाएंगे।

अमित शाह ने कांग्रेस पर साधा निशाना

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ‘वंदे मातरम’ को लेकर कांग्रेस के स्टैंड पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि आजादी की लड़ाई के दौरान ‘वंदे मातरम’ ने लोगों को जोड़ने और उनके अंदर देशभक्ति की स्पिरिट पैदा करने में अहम भूमिका निभाई थी। शाह ने कांग्रेस पर पॉलिटिकल फायदे के लिए इस इश्यू को देखने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि देश से जुड़े सिंबल और इमोशन को पॉलिटिकल नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।

‘भारत कोई धर्मशाला नहीं’- अमित शाह 

अमित शाह ने इलीगल घुसपैठ के मुद्दे पर भी सख्त स्टेटमेंट दिया। उन्होंने कहा कि भारत कोई ‘धर्मशाला’ नहीं है और देश में रहने का अधिकार उसके सिटीजन को है। शाह ने इलीगल घुसपैठ को देश की सिक्योरिटी से जुड़ा गंभीर इश्यू बताया। हालांकि, ‘भारत कोई धर्मशाला नहीं’ वाला बयान ‘वंदे मातरम’ विवाद से अलग कॉन्टेक्स्ट में दिया गया था। दोनों मुद्दे अलग हैं, लेकिन इन बयानों के बाद बीजेपी और कांग्रेस के बीच पॉलिटिकल टकराव और तेज हो गया है।

अब आगे क्या?

‘वंदे मातरम’ को लेकर शुरू हुआ विवाद अब सिर्फ इस बात तक लिमिटेड नहीं रह गया है कि गीत के कितने पद गाए जाएं। इस मुद्दे पर नेशनलिज्म, सेक्युलरिज्म और कांग्रेस के पुराने डिसीजन को लेकर भी डिस्कशन शुरू हो गई है। कर्नाटक सरकार के स्टैंड के बाद बीजेपी और कांग्रेस आमने-सामने हैं। आने वाले दिनों में इस इश्यू पर दोनों पार्टियों के बीच बयानबाजी और तेज होने की उम्मीद है।