रक्षाबंधन नाम सुनते ही सबसे पहले भाई-बहन का अनोखा रिश्ता जहन में आता है। कैसे भाई की कलाई पर बहनों की रंग बिरंगी राखियां बंधी रहती हैं और कितनी बेचैनी से बहनें अपने तोहफे का इंतजार करती हैं। ये त्योहार भाई-बहन के प्यार और नोक-झोंक भरे रिश्ते का दिन है, लेकिन बदलते वक्त के साथ ये त्योहार एक नई दिशा की ओर जा रहा है। अब राखी सिर्फ भाइयों की कलाई के लिए नहीं है, बल्कि छोटे भाई- बहन भी अपनी बड़ी बहनों को राखी बांध रहे हैं। साथ ही ननद भी अपनी भाभियों को राखी बांध रही हैं। राखी अब सिर्फ एक धागे तक सीमित नहीं रह गई, बल्कि रिश्तों की असली अहमियत को दिखाती है।
अब बड़ी बहनें हैं भाइयों की रक्षक
इस बात से तो सब वाकिफ हैं कि ये सदियों पुराना रिवाज रहा है कि बहन ही अपने भाई को राखी बांधकर धागे के रूप में उन्हें अपना रक्षक मानती हैं। भाई इस अहम जिम्मेदारी को संभालते आए हैं, लेकिन अब बहनों ने इस रिवाज को चुनौती देते हुए पूरा रुख ही बदल दिया है। अब छोटे भाई अपनी बड़ी बहनों को राखी बांधने लगे हैं। ये छोटी सी पहल दर्शाती है कि भाइयों के मन में बहनों को लेकर सम्मान, प्यार और इज्जत कितनी उच्च स्तर पर है। वे ये कहना चाहते हैं कि "तुम सिर्फ मेरी बड़ी बहन नहीं, बल्कि मेरी रक्षक भी हो।"
बहनों की कलाइयां एक-दूसरे के वास्ते
एक ये नई परंपरा भी शुरू हो गई है जहां बहनें एक-दूसरे को राखी बांध रही हैं। जिस घर में भाई नहीं होते, वहां बहनें एक-दूसरे को ये धागा बांधकर दर्शाती हैं कि रक्षक का काम सिर्फ किसी एक 'जेंडर' का नहीं है, बल्कि ये उस रिश्ते की निशानी होती है। ऐसा रिश्ता जो छोटे से लेकर बड़े होने तक एक-दूसरे का हर मुश्किल घड़ी में साथ देने, ढाल बनकर बचाव करने और नोक-झोंक के बावजूद एक-दूसरे के साथ रहने का वादा करता है।
ननदें बांध रहीं भाभियों को राखी
कई परिवार अब अपनी बहुओं को बेटी मानते हैं और अपनेपन और इज्जत के साथ रिश्ता निभा रहे हैं। जो त्योहार सिर्फ खून के रिश्ते तक बंधा हुआ था, अब बेड़ियां तोड़ रहा है। ननदें अपनी भाभियों को राखी बांधकर वो सदियों पुरानी क्रूर परम्पराएं तोड़ रही हैं। राखी अब परिवार के बाकी रिश्तों को मजबूत बनाने का एक अहम रास्ता बन चुका है। ननद-भाभी के बीच कभी-कभी होने वाली छोटी-मोटी अनबन के बीच यह धागा प्यार और इज्जत का पहला कदम है।
क्या राखी का मूल बदल गया है?
बदलते समय और रिश्तों के साथ राखी का रुख कुछ ऐसा बदला कि हर जगह रिश्तों को एक नए नजरिए से देखने पर मजबूर कर दिया है। जहां पहले इसे सिर्फ 'भाई बहन की रक्षा करेगा' माना जाता था, अब इसकी जगह एक नई सोच ने ले ली है कि 'हम एक-दूसरे की ढाल हैं, चाहे रिश्ता कोई भी हो।' यानी रस्म चाहे अभी भी वही हो, लेकिन उसके पीछे की कहानी ने नया रूप ले लिया है।